Jhabua News: बाजार का नमकीन खाने से फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुआ परिवार, एक बच्चे की मौत, 3 गंभीर

Jhabua News: जानलेवा बना नमकीन: बाजार का नमकीन खाने से फू़ड प्वाइजनिंग का शिकार हुआ परिवार, एक बच्चे की मौत, 3 गंभीर

Jhabua News: बाजार का नमकीन खाने से फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुआ परिवार, एक बच्चे की मौत, 3 गंभीर

हाइलाइट्स

  • जान का दुश्मन बना बाजारी नमकीन
  • फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुआ परिवार
  • एक बच्चे की मौत, 3 लोग गंभीर 

रिपोर्ट- श्रवण मालवीय

Jhabua News: मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले से दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है, जहां बाजार के नमकीन को खाने से एक परिवार फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गया। जिसमें 7 साल के बच्चे की मौत  हो गई और 3 लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किए गए हैं। मामला झाबुआ जिले के ग्राम बावड़ी का है।

जानकारी के मुताबिक, बावड़ी गांव के रहने वाले तीन लोगों लूनकी बाई भाभर उम्र 50 साल, विजय भाभर उम्र 8 साल, सोनाली भाभर उम्र 10 साल और आयुष भाभर उम्र 7 साल ने अपने घर पर परिवार के साथ नमकीन खाया था।

इसके बाद कुछ ही घंटे बाद सभी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और उल्टी दस्त की शिकायत हुई। तबीयत बिगड़ने के बाद 2 बच्चे और एक महिला को गंभीर अवस्था में पेटलावद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

तहसीदार पहुंचे सिविल अस्पताल

मामले की जानकारी मिलते ही (Jhabua News) पेटलावद तहसीलदार हुकुम सिंह निगवाल सिविल अस्पताल पहुंचे और परिजनों से चर्चा की।

उन्होंने बताया कि 4 लोग फूड प्वाइजनिंग के बाद अस्पताल में भर्ती हुए थे, जिसमें से एक बच्चे की मौत हो गई वहीं तीन लोगों का इलाज चल रहा है।

हालांकि इस पूरे मामले का खुलासा 7 साल के बच्चे आयुष के पोस्टमार्टम के बाद ही हो पाएगा, कि आखिर बालक की मौत कैसी हुई।

परिजनों के मुताबिक, सभी की तबीयत नमकीन खाने के बाद फूड प्वाइजनिंग की वजह से बिगड़ी है, हालांकि डॉक्टरों ने इसे डिहाइड्रेशन बताया है।

परिजनों में आक्रोश

नमकीन खाने से हुई इस घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश है। परिजनों ने इसकी शिकायत थाने में भी कराई है। मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

वहीं परिवार वाले अपने 7 साल के मृतक बेटे को लेकर कई घंटे (Jhabua News) पेटलावद पीएम रूम के बाहर खड़े रहे, लेकिन कोई भी जिम्मेदार पीएम के लिए नही पहुंचा।

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मेडिकल ऑफिस मिला बंद

जब इस संबंध में मेडिकल ऑफिसर सुरेश कटारा से उनके ऑफिस पर संपर्क करना चाहा तो उनका भी ऑफिस बंद मिला।

इसके बाद जब दूरभाष पर चर्चा की गई, तो उन्होंने भी पुलिस प्रकरण का हवाला देते हुए टाल दिया।

आदिवासी मृतक के परिजन पोस्टमार्टम को लेकर पुलिस प्रशासन की लापरवाही के चलते शव को लेकर चमचमाती धूप में घंटों खड़े रहे।

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