Jatmai Temple: जतमई मंदिर दर्शनीय पर्यटन स्थल, जहां देशभर से बड़ी संख्या में आते हैं सैलानी

अगर आप छत्तीसगढ़ में कहीं टूर पर घूमने की सोच रहे हैं तो जतमई मंदिर आपके लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।

Jatmai Temple: जतमई मंदिर दर्शनीय पर्यटन स्थल, जहां देशभर से बड़ी संख्या में आते हैं सैलानी

गरियाबंद। अगर आप छत्तीसगढ़ में कहीं टूर पर घूमने की सोच रहे हैं तो जतमई मंदिर आपके लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। जतमई मंदिर को मुख्य रूप से यहां जल प्रपात के लिए जाना जाता है। आपने इससे पहले भी कई जल प्रपात तो देखे ही होंगे लेकिन ये जलप्रपात कुछ खास है।

छत्तीसगढ़ की विविधता से तो आप अच्छी तरह से परिचित ही होंगे। यहां लोग फ्री समय मिलने पर अक्सर किसी मंदिर या किसी नेचुरल प्लेस की सैर के लिए जाते है। लेकिन अगर आपको ये दोनों ही चीजे पसंद है तो आपको जतमई जरुर आना चाहिए यहां जतमई मंदिर दर्शनीय पर्यटन स्थल है। आपको विशालकाय हनुमान जी की मूर्ति राम और लक्ष्मण को अपने कंधे में विराजित नजर आएगी।

जैसे ही आप मंदिर की तरफ आगे बढ़ेंगे यहां आपको मंदिर के साथ साथ एक झरना भी देखने को मिलता है जो बरसात के दिनों में अति मनभावन प्रतीत होता है।

दर्शन के साथ जलप्रपात का लुत्फ

जतमई मंदिर स्थित जलप्रपात कुछ खास है। स्थानीय लोगो की माने तो ये माता की सेविका है जो साल के 12 महीने और दिन के 24 घंटे माता की सेवा में लगे रहता है माता के चरणों को छूकर ही पानी नीचे गिरती है।

जतमई माता मंदिर चारों तरफ से पेड़-पौधों से घिरा है। इसके आसपास हरियाली है। जो इसकी खूबसूरती में चार-चांद लगा देती है। मंदिर के आसपास छोटी-छोटी चट्टान भी देखने को मिल जाती है जो देखने में बड़ी आकर्षक लगती है।

वैसे तो छत्तीसगढ़ में कई दार्शनिक स्थल है जिसमे से कई अपने इतिहास तो कई अपनी मान्यताओं के चलते प्रसिद्ध है, इसका मुख्य कारण है यहां की लोगो द्वारा भगवान पर किये गए अपार श्रद्धा भक्ति।

मंदिर पहुंचने से पहले ही आपको विशालकाय हनुमान जी की मूर्ति राम और लक्ष्मण को अपने कंधे में विराजित नजर आएगी

झरने से पानी गिरने का दिलचस्प नजारा

जैसे ही आप मंदिर की तरफ आगे बढ़ेंगे,यहां आपको मंदिर के साथ साथ एक झरना भी देखने को मिलता जो बरसात के दिनों में अति मनभावन प्रतीत होता है।

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जतमई मंदिर का झरना

जतमई मंदिर को मुख्य रूप से यहां स्थित मंदिर और जल प्रपात के लिए जाना जाता है। आपने इससे पहले भी कई जलप्रपात तो देखे ही होंगे लेकिन यह जलप्रपात कुछ खास है क्योंकि अगर यहां की स्थानीय लोगो की माने तो यह जलप्रपात माता की सेविका है।

जो साल के 12 महीने और दिन के 24 घंटे माता की सेवा करने में लगे रहते है और यह जलप्रपात माता के चरणों को छूकर ही नीचे गिरती है। यह झरना नीचे गिरते समय विहंगम दृश्य प्रगट करती है जिसे देखने के लिए किसी का भी दिल मचल उठेगा। झरनों के बीच हम पहुंचते हैं जतमई माता के मंदिर

मानसून सीजन में मनमोहक नजारा

जतमई माता का मंदिर सफेद रंग से पेंट किया हुआ है यह दूर से देखने पर ताजमहल की भांति सफेद संगमरमर का प्रतीत होता है।मां जतमई का मंदिर चारो तरफ से पेड़ पौधे से घिरा हुआ है। और यह पूरा इलाका भी पेड़ पौधे से घिरा है या फिर यह कहे कि यह इलाका एक जंगल की तरह प्रतीत होता है।

तो यह गलत नहीं होगा। जतमई माता का मंदिर इसीलिए खास भी है क्योंकि इसके आस पास हरियाली है जो कि इसके सुंदरता में चार चांद लगा देती है। मंदिर के आस पास आपको छोटे छोटे पत्थरो के चट्टान भी देखने को मिल जाएंगे जो कि देखने में लुभावना प्रतीत होते है।

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