Japanese Fever Vaccine: भोपाल में आज से लगेगा जापानी बुखार का टीका, जानें कितने साल के बच्चों को कौन से सरकारी अस्पतालों में लगाई जाएगी वैक्सीन

Japanese Fever Vaccine: भोपाल में आज से लगेगा जापानी बुखार का टीका, जानें कितने साल के बच्चों को कौनसे अस्पतालों में लगाई जाएगी वैक्सीन।

Japanese Fever Vaccine: भोपाल में आज से लगेगा जापानी बुखार का टीका, जानें कितने साल के बच्चों को कौन से सरकारी अस्पतालों में लगाई जाएगी वैक्सीन

   हाइलाइट्स

  • राजधानी में आज से लगेगी जापानी बुखार की वैक्सीन।
  • सरकारी अस्पतालों में रोजाना लगेगी वैक्सीन।
  • 1 साल से कम उम्र के बच्चों को अभी नहीं लगेगी वैक्सीन।

Japanese Fever Vaccine: राजधानी में आज यानी मंगलवार 27 फरवरी से जापानी इंसेफेलाइटिस टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है। यह वैक्सीन 1 से 15 साल तक के 9 लाख बच्चों को लगाई जाएगी।

शहर के सरकारी अस्पतालों के अलावा चिह्नित निजी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में भी ये वैक्सीन लगाई जाएगी। जिसका कोई शुल्क नहीं रहेगा। 20 सेंटर्स पर रोजाना और 348 सेंटर्स पर मंगलवार और शुक्रवार को ये वैक्सीन लगेगी।

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जापानी बुकार का टीका टीकाकरण नियमित वैक्सीन सेंटर्स के अलावा चिह्नित सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन लगाई जाएगी। जिनमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान हमीदिया हॉस्पिटल, जिला जय प्रकाश चिकित्सालय, सिविल अस्पताल डॉ. कैलाश नाथ काटजू, सिविल अस्पताल बैरागढ़, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गांधीनगर और कोलार, सिविल अस्पताल बैरसिया, जवाहरलाल नेहरू गैस राहत हॉस्पिटल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिसरोद, सिविल डिस्पेंसरी 1100 क्वार्टर, सिविल डिस्पेंसरी बाग सेवनिया, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अशोका गार्डन और कोलुआ कला, रेलवे हॉस्पिटल, कस्तूरबा हॉस्पिटल, सिविल हॉस्पिटल गोविंदपुरा, प्रतिमा मलिक पुलिस अस्पताल, कंपोजिट हॉस्पिटल बंगरसिया और मिलिट्री हॉस्पिटल शामिल हैं। आप इन अस्पतालों में से किसी भी अपने करीबी अस्पताल में अपने बच्चों को वैक्सीन लगवा सकते हैं। जो कि निःशुल्क रहेगी।

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   इन सरकारी अस्पतालों में लगेगी रोजाना वैक्सीन

   वैक्सीन लगने पर नहीं आएगा बुखार

जेपेनीज इंसेफेलाइटिस का टीका लगने के बाद संबधित बच्चे को बुखार और कोई दूसरा सेहत में बदलाव नहीं होगा। कुछ बच्चों को वैक्सीन लगने के बाद रेडनेस की समस्या हो सकती है। लेकिन रेडनेस को दूर करने के लिए कोई दवा की जरूरत नहीं होगी। रेडनेस कुछ ही मिनटों बाद ठीक हो जाएगी।

   1 साल से कम उम्र के बच्चों को अभी नहीं लगेगी वैक्सीन

बच्चों के इस वैक्सीन के लगाए जाने से मस्तिष्क बुखार फैलाने वाले वायरस से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा होगी। 1 साल से कम उम्र के बच्चों को इस बुखार की वैक्सीन अभी नहीं लगेगी। इन्हें अगले चरण में लगाया जाएगा।

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   बच्चों को घातक बीमारी से बचाने के लिए जरूर लगवाएं टीका

जापनीज इंसेफेलाइटिस टीकाकरण अभियान में निजी स्वास्थ्य संस्थाओं को शामिल किया गया है। यह एक स्वागत योग्य कदम है। पालकों से आग्रह है, कि वे अपने बच्चों को इस घातक बीमारी से बचाने के लिए नि:शुल्क टीका जरूर लगवाएं।

   क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है जेपेनीज इंसेफेलाइटस

जेपेनीज इंसेफेलाइटिस (JE) बुखार को जापानी बुखार और दिमागी बुखार भी कहा जाता है। यह मच्छर के काटने से होता है। नेशनल वेक्टर बोर्न कंट्रोल प्रोग्राम की रिपोर्ट के अनुसार, जेपेनीज इंसेफेलाइटिस का वायरस सुअर और जंगली पक्षियों में पाया जाता है।

जो मच्छर JE वायरस वाले सुअर या जंगली पक्षी को काटता है, तो इस वायरस के लक्षण मच्छर के शरीर में पहुंच जाते हैं। जब यही मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो व्यक्ति संक्रमित हो जाता है।

   जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षण

जापानी इंसेफेलाइटिस होने पर तेज बुखार, सिर में दर्द और उल्टियां होने जैसे लक्षणों दिखने लगते हैं। इसके बाद अगले कुछ दिनों में मानसिक स्थिति में बदलाव, कमजोरी और चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती हैं। खासकर बच्चों में इंसेफेलाइटिस ब्रेन में इंफेक्शन का कारण बन जाता है। इन बच्चों में से 20 से 30% मामलों में मृत्यु भी हो सकती है।

   जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव

इस घातक बीमारी से बचने के लिए खुद को और अपने बच्चों को ऐसे कपड़े पहनाएं जो हाथ और पैर को ढक सकें। मच्छरदानी को लगाकर सोएं। घर के आस-पास पानी जमा न होने दें और फिर मच्छर भगाने वाले तमाम उपायों को अपनाएं। एंटी मॉस्किटो स्प्रे करें और मच्छरों को भगाने वाले नेचुरल उपायों को अपनाएं। जिससे मच्छरों से बचाव हो सके।

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