MP NEWS: जबलपुर हाईकोर्ट ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था को दी मंजूरी, अब सभी सरकारी स्कूलों में ऐप से हाज़िरी लगेगी

MP NEWS: जबलपुर हाईकोर्ट ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था को दी मंजूरी, अब सभी सरकारी स्कूलों में ऐप से हाज़िरी लगेगी

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षको के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य रूप से लागू हो गई है.... जबलपुर हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया..... यह याचिका गेस्ट टीचर को-ऑर्डिनेशन कमेटी अशोकनगर के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने लगाई थी, जिन्होंने 1 जुलाई 2025 से लागू हुई इस व्यवस्था को चुनौती दी थी.... उनका कहना था कि ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या है और कई शिक्षक स्मार्टफोन खरीदने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए यह प्रणाली व्यावहारिक नहीं है....याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि ग्रामीण और अंचल क्षेत्रों में डिजिटल ढांचा कमजोर है, जिससे मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी में गंभीर कठिनाइयां हैं। इसके अतिरिक्त, कई शिक्षक स्मार्टफोन खरीदने में असमर्थ हैं, जिससे उनके लिए ई-अटेंडेंस दर्ज करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता... निलेश यादव ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि... ई-अटेंडेंस प्रणाली शिक्षकों के हित में है और इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि पहले शिक्षकों की उपस्थिति मैन्युअल रजिस्टरों पर दर्ज की जाती थी, जिसमें गड़बड़ियों की संभावना रहती थी... लेकिन डिजिटल अटेंडेंस से फर्जी उपस्थिति पर रोक लगेगी और सिस्टम और ज्यादा पारदर्शी बनेगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस संजय सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा इस व्यवस्था में किसी भी तरह की कानूनी बाधा नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सरकार का प्रशासनिक निर्णय है, और इसमें न्यायालय के हस्तक्षेप की कोई ज़रूरत नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए राज्य सरकार के आदेश को वैध और सही ठहराया। इस फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को अपनी उपस्थिति रोज़ाना ई-अटेंडेंस ऐप या पोर्टल के माध्यम से ही दर्ज करनी होगी। राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी है।

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