जबलपुर के निजी अस्पताल में तैनात डॉक्टर निकला पेंटर: ICU में था पदस्थ, ऐसे हुआ खुलासा, अब पुलिस कर रही जांच

Madhya Pradesh (MP) Jabalpur Bhanwartal Marble City Doctor Fraud Case Update: जबलपुर में भंवर ताल स्थित एक निजी अस्पताल में जिस डॉक्टर को तैनात किया गया था असल में वह पेंटर निकला।

Jabalpur Doctor Fraud

Jabalpur Doctor Fraud

Jabalpur Doctor Fraud Case: मध्यप्रदेश के जबलपुर में भंवर ताल के एक प्राइवेट अस्पताल में जिस डॉक्टर को नियुक्त किया गया था, वह असल में एक पेंटर निकला। खुलासा तब हुआ जब एक महिला की मौत के बाद परिजन ने पड़ताल की। इसके बाद परिजन की शिकायत पर पुलिस ने 22 मई को जांच शुरू की।

क्या था पूरा मामला ?

मामला जबलपुर के सिविल लाइन में रेल सौरभ ऑफिसर्स कॉलोनी के निवासी मनोज कुमार की मां शांति देवी से संबंधित है। शांति देवी सितंबर महीने से बीमार थीं, जिन्हें उनके परिवार ने भंवरताल में स्थित मार्बल सिटी अस्पताल में भर्ती कराया था। 2 सितंबर 2024 को उनका निधन हो गया।

मृतका के बेटे मनोज कुमार ने जब अस्पताल से मिले मेडिकल रिकॉर्ड देखे, तो उसमें लिखा था कि शांति देवी का इलाज ICU में डॉक्टर बृजराज उइके की निगरानी में हो रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, 1 और 2 सितंबर की रात को ICU में मरीज का चेकअप किया गया था। रिपोर्ट में यह भी दर्ज था कि डॉक्टर उइके ने मरीज को वेंटिलेटर पर शिफ्ट करने की सलाह दी थी, लेकिन स्टाफ की सहमति नहीं मिलने के कारण ऐसा नहीं हो सका।

अस्पताल के स्टाफ बोला- इस नाम का कोई डॉक्टर नहीं है

हालांकि, मनोज कुमार का कहना है कि ICU के किसी डॉक्टर से ऐसी कोई बात नहीं हुई थी। जब उन्होंने डॉक्टर बृजराज उइके से मिलने की कोशिश की, तो अस्पताल प्रबंधन लगातार टालता रहा। इससे मनोज को शक हुआ, और उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से डॉक्टर के बारे में जानकारी मांगी। इस पर कर्मचारियों ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर बृजराज उइके नाम का कोई व्यक्ति काम नहीं कर रहा है।

इसके बाद मनोज ने डॉक्टर बृजराज सिंह उइके के बारे में इंटरनेट पर जानकारी खोजी। उन्हें एक रजिस्टर्ड डॉक्टर की तस्वीर मिली, जो अस्पताल में मौजूद व्यक्ति से मेल नहीं खा रही थी। जब उस व्यक्ति से पूछा गया, तो उसने अपना नाम बृजराज सिंह उइके बताया, लेकिन असल में वह एक पेंटिंग करने वाला मजदूर निकला।

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असली डॉक्टर के कहने पर मजदूर बना डॉक्टर

पूछताछ में उसने बताया कि असली डॉक्टर का नाम सत्येंद्र है, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे डॉक्टर बनकर इलाज करता है। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह सत्येंद्र का परिचित है और उसी के कहने पर डॉक्टर बनकर अस्पताल में काम कर रहा था। अब पुलिस फर्जी डॉक्टर सत्येंद्र की तलाश में जुट गई है और पूरे मामले की जांच जारी है।

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