Bhopal: देश में जिस विषय से आईएएस चुने जाते हों, उसे समझना बहुत जरूरी: राघवेंद्र सिंह तोमर

Bhopal: देश में जिस विषय से आईएएस चुने जाते हों, उसे समझना बहुत जरूरी: राघवेंद्र सिंह तोमर

Bhopal: देश में जिस विषय से आईएएस चुने जाते हों, उसे समझना बहुत जरूरी: राघवेंद्र सिंह तोमर

भोपाल। हम सब यहां इस्लाम को समझने के लिए एकजुट हुए हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है। इस्लाम पर चर्चा करना हमारा अधिकार है। हिंदुस्तान में इस्लामिक स्टडी एक विषय यूपीएससी डाल दिया गया है, जिसमें से आईएएस बनते हैं। यह हमें-आपको सबको पढ़ना चाहिए। तभी इसके खतरे से निपटते हुए अखण्ड भारत बना सकते हैं। ये बातें राजपूत महापंचायत के अध्यक्ष, सनातन विद्वान और इतिहासकार राघवेन्द्र सिंह तोमर ने आयोजित विशाल युवा सम्मेलन में कहीं। सम्मेलन के मुख्य अतिथि तोमर ने कहा कि मैंने अपनी नजर से इस्लाम का अध्ययन किया तो पाया कि मक्का की अर्थ व्यवस्था कब्जाने को मोहम्मद पैगम्बर द्वारा गठित अनपेड आर्मी ही इस्लाम है। मक्का में सनातन धर्म के मूर्तिपूजक, शिवलिंग पूजक आदि अनेक मतों को मानने वाले लोग हजारों साल से वर्ष में एक बार तीर्थ यात्रा पर जाते थे।

व्यापारियों के ठहरने का ठिकाना भी मक्का

यूरोप आदि देशों के लिए जाने वाले व्यापारियों के ठहरने का ठिकाना भी मक्का होता था। यहीं से व्यापारी अफ्रीका और यूरोप के लिए मुड़ते थे। मक्का में सनातन का हमेशा से प्रभाव था। तीर्थ यात्रा और व्यापार के ठिकाने से विकसित अर्थ व्यवस्था को कैप्चर करने के लिए मोहम्मद पैगम्बर ने जिस अनपेड आर्मी का गठन किया, वह इस्लाम है। आर्मी के लड़ाकों को वेतन की जगह कितनी भी, किसी भी रिश्ते, किसी भी उम्र, कितनी भी महिलाएं कुरान के माध्यम से दीं।

कुरान में पांच बार की नमाज के प्रावधान

यह कितनी शर्म की बात है। कुरान में पांच बार की नमाज के प्रावधान कर ऐसी व्यवस्था कर दी जिससे मुस्लिम मानस इस्लाम से बाहर का सोच ही नहीं सके। बीच- बीच नमाज से काम का भी नुकसान होता है। अब समय आ गया है, जब नुकसान पहुंचाने वाले मजहब और मतों को देश में प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए। असल मे गलती यह हो रही है कि हम धर्म को मजहब के संदर्भ में समझने लगे हैं। धर्म को मजहब के संदर्भ में नहीं समझा जा सकता। धर्म का ज्ञान जिन लोगों को है, वे एक बात समझते हैं कि धर्म का उल्लेख सनातन व्यवस्था में कहां हुआ है, वह है पितृ धर्म, पुत्र धर्म, व्यापार धर्म, युद्ध धर्म, पड़ोसी धर्म, आदि पर हुआ है।

शांति सिखाता है सनातन धर्म

पूजा पद्धति के साथ धर्म का उल्लेख नहीं हुआ। धर्मात्मा शब्द का उल्लेख पूजा-हवन करने वालों के लिए नहीं हुआ। इसके पूजा पद्धतियों में पैदा जिज्ञासाओं ने मत-मतांतरों में भ्रमण करना शुरू किया। भारत में इस्लाम के आने के बाद के हिंदुत्व को अलग से समझ लीजिए, सबकुछ साफ हो जाएगा। तोमर ने कहा कि करीब 1500 साल पहले यहूदी, ईसाइयत और इस्लाम तीन अब्राहम मत आए। इन मतों ने दुनिया को अशांति के रास्ते पर धकेला। दुनिया में धर्म तो केवल एक है सनातन, जो शांति सिखाता है।

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