MP Elections 2023: मुद्दे गायब, चेहरे हावी, क्या स्थानीय मुद्दे बनाएंगे समीकरण?

Aaj Ka Mudda: 2023 चुनाव में कभी भ्रष्टाचार आया, कभी विकास, कभी राम मंदिर तो कभी जातिगत जनगणना। जितने भी बार मुद्दे उठे वो आग की तरह फैले

MP Elections 2023: मुद्दे गायब, चेहरे हावी, क्या स्थानीय मुद्दे बनाएंगे समीकरण?

Aaj Ka Mudda: 2023 चुनाव में कभी भ्रष्टाचार आया, कभी विकास, कभी राम मंदिर तो कभी जातिगत जनगणना।. जितने भी बार मुद्दे उठे वो आग की तरह फैले। लेकिन आग के धुएं की तरह उतनी ही जल्दी ओझल भी हो गए।

मध्यप्रदेश चुनाव में 10 दिन से भी कम का वक्त बचा है। लेकिन मुद्दों के लिहाज से अभी तक चुनाव भटका हुआ नजर आ रहा है।

मंडल और कमंडल की राजनीति गरमाई

प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दे इस चुनाव में गूंजे। 3 दशक बाद मंडल और कमंडल की राजनीति भी गरमाई। लेकिन 23 के दंगल में कोई भी चुनावी एंगल वो कमाल नहीं दिखा पाया।

सोमवार को भी मालवा में चुनावी हुंकार भरने पहुंची प्रियंका गांधी ने बेरोजगारी के मुद्दे को जमकर उछाला। तो उससे पहले सीएम शिवराज उसी मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते नजर आए।

2 लाख सरकारी पद जल्दी से भरे जाएंगे। ये आपके लिए गांरटी है और जो बेरोजगार नौजवान हैं उनको प्रतिमाह 3 हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। -प्रियंका गांधी

श्रीमति प्रियंका गांधी जी जबाव दें ये कांग्रेस ऐसा दलदल क्यों बन गई। जिसमें इंडिया गंठबंधन ही धस गया। कोई आप पर भरोसा नहीं कर रहा तो प्रदेश आप पर भरोसा कैसे करेगा और मेडम प्रियंका गांधी आप जब आती हो मप्र में झूठ की दुकांन खोल देती हो। –सीएम शिवरा

 प्रदेश में हो रहा धुंआधार प्रचार

इस चुनाव में दोनों पार्टियों के दिग्गजों ने मोर्चा संभाल रखा है। बीजेपी से खुद मोदी और शाह करीब दर्जनभर दौरे कर चुके हैं। तो प्रियंका राहुल और खड़गे भी धुंआधार प्रचार में जुटे हैं। शायद यही वजह है कि मुद्दे गायब और चेहरे हावी होते नजर आ रहे हैं।

सारे मुद्दे एक साथ चल रहे हैं। कुछ नाराजगी के तौर पर हैं तो कुछ सरकार के कामकाज के तौर पर हैं। सरकार तो कोशिश करेगी की लाड़ली बहना पर उसे वोट मिले और विपक्ष लगातार ऐसे मुद्दों को उठा रहा है। जो जनता के बीच में मुद्दे हैं चाहे बेरोजगारी का मुद्दा हो उस पर चर्चा हो रही है।

तो वहीं सीएम शिवराज भी बता रहे हैं कि हमने 22 हजार नहीं बल्कि 50 हजार रोजगार दिए हैं। -दिनेश गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार

नैरेटिव सेट नहीं कर पाईं पार्टियां?

जाहिर है कि अगर प्रदेश और देश के मुद्दे मजबूत जमीन नहीं बना सके। तो विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों का बोलबाला रहेगा। ऐसे में जो पार्टी स्थानीय समीकरणों को साध लेगी। वो सत्ता पर काबिज हो जाएगी।

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