रंगपंचमी की गेर पर कोरोना का साया, 75 साल में दूसरी बार राजबाड़ा पर नहीं बिखरेंगे रंग

रंगपंचमी की गेर पर कोरोना का साया, 75 साल में दूसरी बार राजबाड़ा पर नहीं बिखरेंगे रंग

रंगपंचमी की गेर पर कोरोना का साया, 75 साल में दूसरी बार राजबाड़ा पर नहीं बिखरेंगे रंग

इंदौर: कोरोना की प्रदेश में वापसी ने एक बार फिर से लोगों के मन में खतरे की घंटी बजने लगी है। इसी खतरे को देखते हुए मंगलवार शाम को क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक के बाद बड़ा फैसला लिया गया है। जिसके मुताबिक पिछले साल की तरह इस साल भी रंगपंचमी पर शहर में गेर नहीं निकलेगी। ऐसा 75 साल में दूसरी बार हो रहा है कि, शहर में निकलने वाली ऐतिहासिक गेर नहीं निकलेगी।

बता दें कि शहर में निकलने वाली गैर आपातकाल, दंगों और भीषण सूखे के दौर ने भी नहीं रूकी, जो कि अब कोरोना के कारण रोकी जा रही है। हालांकि पिछले साल 2020 में भी गेर पर कोरोना का साया पड़ गया था।

इस बार राजबाड़ा पर रंग नहीं बिखेर पाएंगी ये संस्थाएं

संगम कॉर्नर- 65 साल
टोरी कॉर्नर- 74 साल
मॉरल क्लब- 48 साल
रसिया कॉर्नर-47 साल

मंगलवार को क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में लिए गए ये निर्णय

क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि कोरोना केस बढ़ने के बाद कुछ फैसले लिए गए हैं। इसमें मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है और अगर आप मास्क नहीं पहनते हैं तो आपको स्पॉट फाइन देना होगा।

- कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए शहर में निकलने वाली गेर को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

- इस स्थिति में सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजर अनिवार्य होगा।

- आयोजन हाल और ओपन ग्राउंड में 50 फीसदी क्षमता अनिवार्य की गई है।

- इसके अलावा उठावना और अंतिम यात्रा में 50 लोग ही शामिल हो पाएंगे।

- बिना अनुमति किसी प्रकार का कोई आयोजन नहीं किया जाएगा, बड़े आयोजन को अनुमति नहीं दी जाएगी।

पिछले साल 30 हजार लोग पहुंचे थे

पिछले साल कोरोना के कारण रंगपंचमी पर पहली बार गेर और फाग यात्राएं तो नहीं निकली थीं, लेकिन शहर ने फिर भी खूब-रंग गुलाल उड़ाए थे। कोरोना के खौफ को हराकर राजबाड़ा पर 30 हजार से ज्यादा लोग सुबह से शाम तक पहुंचे थे। हालांकि भीड़ गेर जितनी तो नहीं थी, लेकिन राजबाड़ा का चप्पा-चप्पा रंगों से रंगा हुआ था।

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