MP के गौतमपुरा में हिंगोट युद्ध: 5 योद्धा घायल, तुर्रा और कलंगी दल के बीच डेढ़ घंटे चला युद्ध

Indore Gautampura Hingot Yuddh: इंदौर के देपालपुर स्थित गौतमपुरा में दिवाली के दूसरे दिन यानी धोक पड़वा पर परंपरागत हिंगोट युद्ध शुरू हो गया। परंपरा के अनुसार मैदान में तुर्रा और कलंगी दलों में युद्ध हो रहा है।

Indore Gautampura Hingot Yuddh

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Indore Gautampura Hingot Yuddh: इंदौर के देपालपुर स्थित गौतमपुरा में दिवाली के दूसरे दिन यानी धोक पड़वा पर परंपरागत हिंगोट युद्ध शुरू हो गया। वर्षों पुरानी परंपरा के तहत मैदान में गौतमपुरा और रूणजी के वीर योद्धा तुर्रा और कलंगी दलों में बंटकर युद्ध कर रहे हैं। इसमें दोनों पक्षों के योद्धा एक-दूसरे पर हिंगोट (अग्निबाण) चला रहे हैं।
आयोजकों का कहना है कि यह जानलेवा युद्ध नहीं है, बल्कि साहस, परंपरा और लोक आस्था का प्रतीक है। इसमें हार-जीत नहीं, बल्कि शौर्य और परंपरा का प्रदर्शन काफी मायने रखता है। यह युद्ध खतरनाक होने के साथ-साथ रोमांचक भी होता है।

देखें, हिंगोट युद्ध की कुछ तस्वीरें

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5 योद्धा घायल

अब तक दोनों सेनाओं के 5 योद्धा घायल हुए हैं। एक की आंख में गहरी चोट आई है। युद्ध अभी दोनों ओर से जारी है। मुकाबले में तुर्रा दल के योद्धा भारी पड़ रहे हैं।

200 साल पुरानी है हिंगोट की परंपरा

  • कलंगी और मुर्रा गांव के लोग हिंगोट लेकर आमने-सामने होते हैं।
  • युद्ध शुरू होते ही दोनों पक्ष एक-दूसरे पर जलती हुई हिंगोट फेंकते हैं।
  • आग लगाकर फेंकने पर हिंगोट जलती हुई मिसाइल की तरह उड़ती है।
  • स्थानीय मान्यता के अनुसार यह देवताओं और असुरों के युद्ध का प्रतीक है।
  • लोग मानते हैं कि इससे बहादुरी, शक्ति और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
  • ब्रिटिश काल में हिंगोट को 'फायर बॉल वॉर ऑफ इंडिया' कहा जाता था।
  • ब्रिटिश काल में इसे बैन करने की कोशिश की गई, लेकिन ग्रामीण नहीं माने।

कैसे बनाया जाता है हिंगोट ?

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  • हिंगोट एक जंगली और मजबूत खोल वाला फल है, जो हिंगोरिया नामक पेड़ पर उगता है।
  • इसे काटकर सुखाने के बाद अंदर का गूदा निकाल दिया जाता है और इसे खोखला कर लिया जाता है।
  • उस खोखले खोल में बारूद, कोयला, गंधक और लोहे की कणिकाएं भरी जाती हैं।
  • ऊपर से एक पतली डंडी या रॉकेट जैसा फ्यूज बांध दिया जाता है।

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