Family Court: बुढ़ापे में मां को घर से निकालने वाली बेटी को फैमिली कोर्ट का आदेश, अब हर महीने देने पड़ेंगे 3 हजार

Family Court: बुढ़ापे में मां को घर से निकालने वाली बेटी को फैमिली कोर्ट का आदेश, अब हर महीने देंगे पड़ेंगे 3 हजार

Family Court: बुढ़ापे में मां को घर से निकालने वाली बेटी को फैमिली कोर्ट का आदेश, अब हर महीने देने पड़ेंगे 3 हजार

हाइलाइट्स

  • बेटी ने बुजुर्ग मां के साथ किया विश्वासघात
  • मां का मकान बेच खाते से निकाले पैसे
  • मां के पैसों से खरीदी आयशर, बनाया मकान

Family Court: मध्यप्रदेश के इंदौर से बड़ी खबर सामने आई है, जहां बुढ़ापे में मां को घर से निकालने के मामले में फैमिली कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। आपको बता दें कि कोर्ट ने बेटी को अब हर महीने अपनी मां को 3 हजार रुपए देने को कहा है।

बता दें कि बुजुर्ग मां की जमा-पूंजी को इकलौती बेटी ने लिया। जब मां के पैसे खत्म हो गए तो उसके साथ मारपीट करके घर से निकाल दिया। परेशान मां ने मामले की गुहार फैमिली कोर्ट में लगाई। बेटी ने इससे बचने के लिए अजीब तर्क भी दिए। इतना ही नहीं मां को ट्रक व्यवसायी तक बता दिया।

झूठ पकड़ाने के बाद कोर्ट ने मां के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बेटी को आदेश दिए हैं कि वो हर महीने अपनी मां को 3 हजार रुपए देगी।

पहले जान लेते हैं पूरा मामला क्या है?

मां कौशल्या जिसकी उम्र महज 78 साल ने मार्च 2021 में अपनी इकलौती बेटी राज कंवर उम्र 55 साल के खिलाफ भरण-पोषण का केस फैमिली कोर्ट में लगाया था। पति की 2001 में मौत हो जाने के बाद बेटी राज कंवरर ही इकलौती संतान थी, जिसकी शादी साल 1984 में इंदौर में हुई थी।

पति की मौत होने के बाद कौशल्या भिंड में अकेली रह रही थी। साल 2003 में बेटी-दामाद पहुंचे और का कि मां यहां आपकी देखभाल कौन करेगा, इसलिए घर बेचकर हमारे साथ इंदौर चलो। पैसे तुम्हारे खाते में डाल देंगे।

कौशल्या ने बेटी-दामाद की बात पर विश्वास कर सब बेच-बाच कर इंदौर आ गई। पति की मौत के बाद PF का पैसा भी कौशल्या को मिला था।

मां को इंदौर लाने के बाद बेटी मां के खाते से धीरे-धीरे पैसे निकलवाती रही। जब मकान और पैसे खत्म हो गए तो बेटी ने मां के प्रति व्यवहार बदल दिए। बेटी राजकंवर मां कौशल्या को ताने मारने लगी। घर का काम करवाने लगी। कुलमिलाकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

आखिर में लॉकडाउन के समय मार्च 2020 में मां से मारपीट की और घर से बाहर निकाल दिया। कहा कि भीख मांग या कुछ भी कर मेरे घर नहीं आएगी। बुजुर्ग मां के रहने-खाने, दवाई की भी कोई व्यवस्था नहीं की। तब से बुजुर्ग मां बेटी से अलग अपनी नातिन के साथ रहकर अपना गुजारा कर रही है।

कभी सीढ़ियों से धक्का देती, कभी फर्श पर साबुन का पानी गिराती

जैसे ही मां कौशल्या की जमा पूंजी खत्म हुई तो बेटी राजकंवर मां को बोझ समझने लगी। ताने मारने के साथ समय पर खाना नहीं देती। कभी सीढ़ियों से धक्का दे देती, तो कभी फर्श पर साबुन का पानी डालकर गिराती। हर दिन प्रताड़ित करने का एक अलग तरीका निकालती, ताकि मां को चोट पहुंचे।

मां के पैसों से खरीदी आयशर

कोर्ट को मां कौशल्या ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि दामाद ने आयशर गाड़ी खरीदने और बेटी ने इंदौर में मकान जो कि पहले चद्दर का था उले डबल मंजिल बनवाने, दुकान बनवाने और बेटी पूनम की शादी करने कि लिए रुपए मांगे और बैंक ले जाकर निकलवा लिए।

बेटी-दामाद ने आयशर गाड़ी कौशल्या के नाम पर खरीदी और बाद में उसे बेच दिया। कौशल्या की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि बेटी साड़ी की दुकान चलाती है और दामाद का ट्रांसपोर्ट का काम है। जिससे महीने की 80 हजार रुपए इनकम है। इस पर भी बेटी ने अपने बचाव में कहा कि पति को पैर में चोट लगने के बाद ट्रांसपोर्ट का काम बंद हो गया है।

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जिम्मेदारी मानी, लेकिन देखभाल करने को तैयार नहीं

फैमिली कोर्ट मे सुनवाई के दौरान बेटी राजकंवर ने अपनी जिम्मेदारी मानी और इसे स्वीकार भी किया कि वो इकलौती बेटी है। मान तो लिया कि मां की देखभाल उसी की जीम्मेदारी है, लेकिन वो मां का ख्याल रखने के लिए तैयार नहीं है। न तो वो मां को रखेगी और न ही भरण-पोषण देगी। उसने 2003 से लेकर 2019 तक मां की देखभाल की है। साथ ही ये भी कहा कि मां परेशान करती है। लड़ाई-झगड़ा करती है।

कोर्ट का आदेश- अब 3 हजार रुपए मां को देगी बेटी

मां कौशल्या की तरफ से केस लड़ने वाली हाईकोर्ट एडवोकेट सुश्री शैल राजपूत के मुताबिक, कोविड के दौरान बेटी ने मां को घर से निकाल दिया था। मां को कई यातनाएं भी दीं। बेटी से बहुत ज्यादा परेशान होकर भरण-पोषण का केस मार्च 2021 में लगाया। वजह ये थी कि इकलौती बेटी मां की देखभाल नहीं करती थी।

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