GenZ Protest: इंदौर के DAVV रैगिंग मामले में बड़ा खुलासा, नेपाल की GEN-Z प्रोटेस्ट जैसी की गई थी तैयारी

DAVV GenZ Protest : इंदौर के DAVV IET में सीनियर्स द्वारा जूनियर छात्रों पर धमकी और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनवाकर GenZ प्रोटेस्ट की साजिश का खुलासा।

GenZ Protest: इंदौर के DAVV रैगिंग मामले में बड़ा खुलासा, नेपाल की GEN-Z प्रोटेस्ट जैसी की गई थी तैयारी

DAVV IET Ragging Case 2025:  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) में सीनियर्स द्वारा नेपाल जैसी GenZ प्रोटेस्ट की साजिश रचे जाने का खुलासा हुआ है। यह जानकारी यूनिवर्सिटी की एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर छात्रों ने फर्स्ट ईयर स्टूडेंट्स पर सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाने और पोस्ट वायरल करने का दबाव डाला। विरोध करने पर धमकी भी दी गई। एंटी रैगिंग कमेटी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस योजना में डिजिटल प्रोपगेंडा, फेक सोशल मीडिया अकाउंट्स और नेपाल जैसी राजनीतिक रणनीतियों को अपनाने की कोशिश की गई थी।

सीनियर्स ने क्या किया?

फर्स्ट ईयर छात्रों को फर्जी ईमेल और ट्विटर अकाउंट बनाने के लिए कहा गया। छात्रों को सीनियर्स के संदेश रीट्वीट करने और विशेष हैशटैग वायरल करने के लिए बाध्य किया गया।  विरोध करने पर छात्रों को बैच आउट करने की धमकी दी गई। विवेक शर्मा ने अन्य छात्रों के फोन से व्हाट्सएप मैसेज डिलीट किए। “सीनियर इंट्रोडक्शन” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में आंदोलन के निर्देश साझा किए गए।

शिवसागर रेस्टोरेंट में मीटिंग

जांच में सामने आया कि सीनियर्स ने शिवसागर रेस्टोरेंट में बैठक कर फर्स्ट ईयर छात्रों को हॉस्टल नियमों के बहाने दबाव में लिया। इस मीटिंग में शामिल प्रमुख छात्र अमन पटेल, आदर्श मकवाना, आदित्य शर्मा, सुनील अहिरवार, नमन पांडे, यशश्वी मिश्रा और धवल चौधरी हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, अमन पटेल ने हॉस्टल के सीसीटीवी कैमरे तोड़ने की योजना भी बनाई। अनुज पटेल, जो अमन का छोटा भाई और फर्स्ट ईयर छात्र है, अवैध रूप से हॉस्टल में रह रहा था और एजेंट का काम कर रहा था।

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एंटी रैगिंग कमेटी की सिफारिश

आरोपी छात्रों के खिलाफ BNS की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है । जिनपर रैगिंग, धमकाना, फर्जी आईडी बनवाना, विश्वविद्यालय विरोधी माहौल तैयार करना और डिजिटल साक्ष्य मिटाना जैसे आरोप लगे हैं।

नामजद आरोपी छात्र

अमन पटेल, आदर्श मकवाना, आदित्य शर्मा, अनुज पटेल, उमंग अग्रवाल। साइबर सेल से जांच कर अन्य छात्रों की पहचान कर कार्रवाई करने का सुझाव।

कुलपति का बयान 

कुलपति राकेश सिंघई ने बताया कि एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस से शिकायत की गई है। अभी नामजद शिकायत दर्ज नहीं की गई; पुलिस जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी। बीते दिनों हुई रैगिंग में कुछ सीनियर्स को हॉस्टल से निकाला गया और कुछ पर आर्थिक दंड लगाया गया।

IET से सामने आए दो प्रमुख मामले

पोस्ट वायरल करने का दबाव (19 अगस्त 2025)

फर्स्ट ईयर छात्र ने UGC एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर शिकायत की। सीनियर्स ने उन्हें धमकाया और फेक ईमेल, ट्विटर अकाउंट बनवाकर पोस्ट वायरल करने को कहा। जांच के बाद 6 सीनियर्स को हॉस्टल से निकाल दिया गया।

गुड मॉर्निंग विश करने पर मारपीट (29 अगस्त 2025)

बीटेक थर्ड ईयर छात्र ने गलती से फोर्थ ईयर सीनियर को गुड मॉर्निंग कहा। सीनियर्स ने मिलकर छात्र की पिटाई की। छात्र ने पहले संस्थान में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

Gen-Z कौन है?

Gen Z एक पीढ़ी है, जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ। आज ये युवा वर्ग टेक्नोलॉजी और स्मार्टफोन के साथ बड़े हुए हैं और सोशल मीडिया पर सबसे अधिक सक्रिय हैं।

Gen-Z की प्रमुख विशेषताएं

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर: युवा मोबाइल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट बनाते हैं।

क्रिएटिविटी और आर्टिस्टिक सोच: नए आइडियाज पर काम करना और अपनी क्रिएटिविटी दिखाना पसंद करते हैं।

सामाजिक मुद्दों पर फोकस: जेंडर इक्वलिटी, सामाजिक न्याय और कल्चर सेट करने में सक्रिय।

टेक्नोलॉजी में अग्रणी: डिजिटल और तकनीकी माध्यमों में तेजी से आगे बढ़ रहे।

क्यों हो रहे उग्र?

हालांकि Gen-Z स्वभाव से तकनीकी और क्रिएटिव है, हाल के प्रदर्शन और आंदोलन बताते हैं कि कुछ कारण उनकी उग्रता का आधार बन रहे हैं:

  • बेरोजगारी और आर्थिक असंतोष
  • सरकारी नीतियों और भ्रष्टाचार का विरोध
  • शिक्षा और स्वास्थ्य में कमी
  • सामाजिक असमानताएं

इन कारकों के कारण युवा वर्ग आसानी से किसी आंदोलन या प्रोटेस्ट में आकर्षित हो सकते हैं।

क्या सोशल मीडिया बन गया है माइंड कंट्रोल का हथियार?

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं के विचारों और सोच को प्रभावित किया जा सकता है। फर्जी अकाउंट, हैशटैग और ट्रेंडिंग पोस्ट के जरिए Gen-Z को आक्रामक और उग्र बनाया जा सकता है।

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