Indian Railways: कुतुब मीनार से भी ऊंचे खंभों पर दौड़ेगी भारतीय रेल, मंत्रालय ने शेयर किया शानदार वीडियो

Indian Railways: कुतुब मीनार से भी ऊंचे खंभों पर दौड़ेगी भारतीय रेल, मंत्रालय ने शेयर किया शानदार वीडियो Indian Railways: Indian Railways will run on pillars higher than Qutub Minar, Ministry shared a great video nkp

Indian Railways: कुतुब मीनार से भी ऊंचे खंभों पर दौड़ेगी भारतीय रेल, मंत्रालय ने शेयर किया शानदार वीडियो

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में स्थित कुतुब मीनार के बारे में तो आप जानते ही होंगे। इसकी उंचाई लगभग 72.5 मीटर हैं। अफगानिस्तान में स्थित, जाम की मीनार से प्रेरित होकर और उससे आगे निकलने के लिए दिल्ली के प्रथम मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने सन 1193 में इसका निर्माण कार्य आरंभ करवाया था। लेकिन अब भारतीय रेलवे ने कुतुब मीनार से भी उंचा ब्रिज, पुर्वोत्तर भारत में निर्माण कराया है। ब्रिज नंबर 53 के सबसे ऊंचे पियर्स (खंभों) की उंचाई 75 मीटर है। इसे इम्फाल नई रेल लाइन परियोजना के तहत मणिपुर की सबसे बड़ी नदी 'बराक' पर निर्माण कराया जा रहा है।

रेल मंत्रालय ने शेयर किया शानदार वीडियो

बतादें कि मणिपुर में बराक नदी को सबसे बड़ी नदी के रूप में जाना जाता है। रेल मंत्रालय ने इस पुल का शानदार वीडियों भी ट्विट किया है। जिसमें बताया गया है कि जिरीबाम-इंफाल नई लाइन परियोजना में ब्रिज संख्या 53 का निर्माण मणिपुर की सबसे बड़ी नदी बराक नदी पर किया गया है। पुल बेहद ही मुश्किल स्थान पर स्थित है, जहां सबसे उंचे पियर्स की उंचाई 75 मीटर है जो कुतुब मीनार से भी अधिक उंची है।

इस परियोजना में 47 सरंगें, 156 पुल शामिल है

मालूम हो कि युवा हिमालय के पहाड़ी इलाके में जिरीबाम-इंफाल नई लाइन परियोजना एक चुनौतीपूर्ण परियोजना है। जिसमें 47 सरंगें, 156 पुल शामिल है। खास बात ये है कि इसमें 141 मीटर ऊंच घाट पुल आदि भी शामिल हैं। जिरीबाम- इंफाल नई रेल लाइन लगभग 111 किलोमीटर लम्बी है। ये रेललाइन मणिपुर की राजधानी इंफाल को राज्य के पश्चिमोत्तर शहर जिरीबाम से जोड़ेगा। इस परियोजना की शुरुआत 2008 में शुरू हुई थी और इसकी कुल लागत 13809 करोड़ रुपये है।

कुल 09 स्टेशन इस लाइन से जुड़ंगे

इस रेल लाइन के माध्यम से कुल नौ स्टेशनों को जोड़ा जाएगा। इसमें जिरीबाम, कांबिरोन, खोंगसांग, तुपुल, हाचिंग रोड, कैमाई रोड, थिंगौ, नांदी और इंफाल शामिल हैं। इस परियोजना से आशियान देशों से कारोबार बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। क्योंकि पूर्वोत्तर राज्य आशियान देशों से जुड़े हैं।

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