Indian Railway: क्या है 'कवच तकनीक', जिसकी मदद से तैयार होगा 2 हजार किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क

Indian Railway: क्या है 'कवच तकनीक', जिसकी मदद से तैयार होगा 2 हजार किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क Indian Railway: What is 'armor technology', with the help of which 2 thousand kilometer railway network will be prepared NKP

Indian Railway: क्या है 'कवच तकनीक', जिसकी मदद से तैयार होगा 2 हजार किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क

Indian Railway: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बजट पेश करते हुए एक अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि कवच तकनीक (KAWACH technology) की मदद से देश में 2 हजार किलोमीटर का रेल नेटवर्क तैयार किया जाएगा। जैसे ही वित्त मंत्री ने संसद में इसका घोषणा की, लोगों में यह जानने की उत्सुकता होने लगी कि यह 'कवच तकनीक' क्या है और इसकी मदद से रेलवे को क्या लाभ होगा?

रेल नेटवर्क को इससे बेहतर बनाया जाएगा

जानकारों की माने तो इस तकनीक की मदद से रेल नेटवर्क को बेहतर बनाया जाएगा। कवच तकनीक एक स्वदेशी तकनीक है और इसे पूरी तरह से देश में ही विकसित किया गया है। इस तकनीक में ऐसी एंटी-कोलिजन डिवाइस का इस्तेमाल किया गया है जो एक्सीडेंट रोकने में सक्षम है। देश में बनने वाले 2 हजार किलोीटर के रेल नेटवर्क को इसी डिवाइस की मदद से सुरक्षित बनाने की तैयारी है।

रेलवे ने ही इसे विकसित किया है

रेलवे ने इस तकनीक को यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए विकसित किया है। ये डिवाइस दो ट्रेनों को आपस में होने वाली टक्कर से बचाएगी। यह प्रणाली सैटेलाइट द्वारा रेडियो क्यूनिकेशन के माध्यम से लोकोमोटिव और स्टेशनों पर आपस में संबंध स्थापित करती है।

इस तरह काम करता है ये सिस्टम

इस सिस्टम के द्वारा लोको पायलेट को जहां एक और आगे आने वाले सिग्नलों की स्थिति के बारे में पता चलता है, वहीं दूसरी ओर उसे लाइन पर रुकावट/रोक का पता भी चल जाता है। साथ ही, इस प्रणाली से सिग्नल की लोकेशन और आने वाले सिग्नल की दूरी का भी पता चल जाता है, जिससे लोको पायलेट अधिक प्रभावी ढंग से गाड़ी का परिचालन कर पाता है। किसी लाइन पर अन्य गाड़ी के आने या खड़ी रहने का पता लगते ही यह प्रणाली सक्रिय होकर लोको पायलट को सचेत करती है और निश्चित अवधि पर स्वतः ही गाड़ी में ब्रेक लगा देती है, जिससे किसी भी अनहोनी घटना को रोका जा सकता है।

ट्रेनों की गति भी बढ़ेगी

रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस प्रणाली के लगने से जहां एक ओर रेलों के सुरक्षित व संरक्षित संचालन में वृद्धि होगी वहीं दूसरी ओर लोको पायलट को सिग्नलों की स्थिति की सटीक जानकारी मिलने से ट्रेनों की औसत गति में भी वृद्धि होगी।

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