सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के रूप में भारत का दो साल का कार्यकाल शुरू

(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, एक जनवरी (भाषा) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए सालों से प्रयास कर रहे भारत ने दो साल के लिए विश्व निकाय की इस प्रभावशाली संस्था के अस्थायी सदस्य के रूप में शुक्रवार को अपना कार्यकाल प्रारंभ किया।

भारत 2021- 22 के लिए अस्थायी सदस्य के रूप में इस 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में बैठेगा। वह आठवीं बार इस परिषद का अस्थायी सदस्य बना है।

भारत, नार्वे, केन्या, आयरलैंड और मैक्सिको 2021 में एस्टोनिया, नाईजर, सैंट विसेंट, ग्रेनाडाइन्स, ट्यूनीशिया और वियतनाम जैसे अस्थायी सदस्यों के साथ जुड़े हैं जबकि चीन,फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका उसके स्थायी सदस्य हैं।

भारत अगस्त, 2021 में परिषद की अध्यक्षता करेगा और 2022 में भी उसे एक महीने के लिए यह मौका मिलेगा।

परिषद की अध्यक्षता अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों के हिसाब से हर सदस्य के पास एक एक महीने के लिए रहती है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरूमूर्ति ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सहयोग की जरूरत पर बल देते हुए मानवाधिकार और विकास जैसे मौलिक मूल्यों को बढ़ावा देगा और बहुपक्षवाद को सुदृढ़ करेगा।

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘ सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के नाते … हम लोकतंत्र, मानवाधिकार एवं विकास जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देंगे ’’

उन्होंने कहा कि भारत का संदेश यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘‘कैसे हम संयुक्त ढांचे में विविधता को फलने-फूलने देते हैं, जो कि संयुक्त राष्ट्र कई मायनों में यही है। यह एक ऐसी चीज है जिसके पक्ष में भारत सदैव खड़ा है और उसे परिषद तक ले जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि भारत निश्चित ही परिषद में सहयोग की वृहत आवश्यकत पर बल देगा जो ऐसी जगह नहीं हो जहां निर्णय लेने में ढीले रवैये के चलते अत्यावश्यक जरूरतों पर उचित ध्यान नहीं दिया जाता हो, हमें और सहयोगकारी ढांचा चाहेंगे जहां हम वाकई समाधान ढूढं पाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘ वर्तमान पहुपक्षवाद में बहुध्रुवीय स्थिति का ध्यान नहीं है। जब आपके पास ऐसा ढांचा हो जो बहुपक्षवाद में बहुध्रुवीय स्थिति का समावेश करने में समर्थ हो तब निश्चित ही वह अधिक जवाबकारी, अधिक नियम आधारित तथा और समावेशी प्रक्रिया है।’’

सुरक्षा परिषद में सुधार पर देरी को लेकर भारतीय दूत ने इस दिशा में प्रगति नहीं होने की आलोचना की और कहा कि पिछले दशक में बमुश्किल ही कुछ हुआ।

उन्होंने कहा , ‘‘ हम एक ऐसा देश होंगे जो विकासशील देशों के पक्ष में खड़ा हेागा।’’

सितंबर में महासभा के सत्र में प्रधानमंत्री ने डिजिटल माध्यम से कहा था कि सुरक्षा परिषद के सदस्य के तौर पर भारत आतंकवाद समेत मानवता के दुश्मन के खिलाफ आवाज उठाने से नहीं हिचकिचाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि दुनिया के सबसे बड़े देश भारत को कब तक संयुक्त राष्ट्र के निर्णय लेने संबंधी निकाय से दूर रखा जाएगा।

भारत एशिया प्रशांत देशों की ओर से उम्मीदवार था और उसे जून में सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के चुनाव में 192 में से 184 वोट मिले।

भाषा राजकुमार रंजन

रंजन

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