Income Tax भरने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, नहीं तो सकती है मुश्किल

भोपाल: आयकर विभाग ( Income Tax ) ने साल 2018-19 के आयकर रिटर्न भरने की तारीख को बढ़ाया गया था। आपको बता दें इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय कोई ड़क्यूमेंट जमा नहीं करना होता है और ना ही कोई डॉक्यूमेंट अपलोड करना होता है। अगर आपको ख्याल रखने वाली कोई बात होती है तो वो है सिर्फ दस्तावेजों के मुताबिक अपनी जानकारी को सही भरना, तो अगर आपने अब तक अपना रिटर्न फाइल नहीं किया है तो हम आपको कुछ ऐसे बेसिक टर्म्स के बारे में बता रहे हैं जो कि ITR भरने में आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

1 अप्रैल से 31 मार्च तक के समय को फाइनेंशिल इयर कहते हैं। जैसे एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक के समय को फाइनेंशिल इयर 2020-21 कहा जाएगा। आयकर अधिनियम की धारा 2 (7) के अनुसार करदाता का मतलब ऐसे व्यक्ति से है जो आयकर विभाग को राशि (ब्याज दंड आदि) देने के लिए उत्तरदायी है। वह करदाता कहलाता है।

एसेसमेंट ईयर ( Assessment year)

भले ही नया साल एक जनवरी से शुरू होकर 31 दिसंबर को खत्म हो जाता हो लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न एक अप्रैल से शुरू होकर अगले साल 31 मार्च तक कमाई का हिसाब आप से लेता है। एक फाइनेंशियल ईयर में कमाई का टैक्स अगले फाइनेंशियल ईयर में लिया जाता है।

डिडक्शन ( Deduction )

इनकम टैक्स विभाग आपको कई तरह के निवेश और खर्च पर आयकर नियमों के तहत टैक्स में छूट देता है। आप जो निवेश करते हैं आपको उसी के आधार पर छूट दी जाती है और इस पर आयकर विभाग आपको टैक्स रिफंड करता है। बता दें कि टैक्स में मिलने वाली छूट को डिडक्शन कहा जाता है।

ग्रॉस इनकम ( Gross income )

ग्रॉस इनकम करदाता की टैक्स-फ्री आमदनी और अलाउंसेस को घटाने के बाद साल की कुल आय को ग्रॉस इनकम कहा जाता है। ग्रॉस इनकम हमेशा 80C से 80U तक मिलने वाले डिडक्शन से पहले वाली इनकम होती है।

टैक्सेबल इनकम ( Taxable income )

ग्रॉस इनकम में आयकर की धारा 80C से 80U तक मिलने वाली टैक्स छूट लेने के बाद जो इनकम आती है, उसे टैक्सेबल इनकम कहते हैं। मतबल डिडक्शन से पहले वाली इनकम ग्रॉस इनकम और डिडक्शन के बाद वाली इनकम को टैक्सेबल इनकम कहलाती है।

फॉर्म 16ए ( Form 16A)

फार्म 16A के अंतर्गत करदाता को सैलरी के अलावा अगर दूसरे स्त्रोतों से आमदनी हुई है और उस पर टीडीएस कट चुका हो तो उस संस्था से भी टीडीएस सर्टिफिकेट लेना चाहिए। इस सर्टिफिकेट को ही फॉर्म 16ए कहा जाता है। फार्म 16 आपको कहीं नौकरी करते समय आपके एम्प्लॉयर द्वारा दिया जाता है। यह फॉर्म अब तक आपके एम्प्लॉयर ने आपको दे दिया होगा।

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