Ujjain News: उज्जैन में माता महालया और महामाया को महाअष्टमी पर कलेक्टर ने पिलाई मदिरा, देखें वीडियो -

Ujjain News: उज्जैन में माता महालया और महामाया को महाअष्टमी पर कलेक्टर ने पिलाई मदिरा, देखें वीडियो

उज्जैन। प्रदेश में कोरोना के कहर ने हाहाकार मचाया हुआ है। सरकार और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी यह कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इलाज और तमाम आधुनिक सुविधाएं भी कोरोना के कहर को काबू करने में पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो रहीं हैं। ऐसे में कोरोना को रोकने के लिए आस्था भी सहारा लिया जा रहा है। पिछले दिनों उज्जैन में महाकाल मंदिर में कोरोना को रोकने के लिए पूजा अर्चना की गई थी। अब मंगलवार को उज्जैन के चौबीस खंभा माता मंदिर में भी पूजा की गई।

इस पूजा में उज्जैन के कलेक्टर आशीष सिंह ने महालया और महामाया माता को मदिरा पिलाकर कोरोना से जल्द ही निजात दिलाने और लोगों के स्वास्थ्य की कामना की। इस मंदर को लेकर यहां के लोगों की मान्यता है कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य महालया और महामाया माता की पूजा किया करते थे। उसी समय से आज तक यह परंपरा चली आ रही है। नवरात्री के महाअष्टमी पर्व पर माता को मदिरा का भोग लगाया जाता है और जिले के कलेक्टर इस परंपरा का निर्वाहन करते हैं।

इस बार भी उज्जैन के कलेक्टर आशीष ने यह परंपरा निभाई और माता को मदिरा का भोग लगाया। इसके बाद 27 किमी तक शराब की धार चढ़ाकर अलग-अलग भैरव मंदिरों में शराब का भोग लगाया गया। कलेक्टर सिंह ने भी कुछ दूर तक हांडी हाथ में लेकर पैदल यात्रा की।

प्राचीन का चौबीस खंबा माता मंदिर…
बता दें कि उज्जैन में महाकाल मंदिर तो विश्व प्रसिद्ध है ही इसके साथ ही शहर में कई जगह प्रचीन देवी के मंदर हैं। इन मंदिरों में नवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा का महत्व है। इन्ही मंदिरों में से एक चौबीस खंबा माता मंदिर है। यह मंदिर भी काफी प्राचीन है। बताया जाता है। कि प्राचीनकाल में भगवान महाकालेश्वर के मन्दिर में प्रवेश करने और वहां से बाहर की ओर जाने का मार्ग चौबीस खंबों से बनाया गया था। इस द्वार के दोनों किनारों पर देवी महामाया और देवी महालाया की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य इन देवियों की अराधना किया करते थे। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। इस मंदर में 24 खंभे बने हुए हैं। इसलिए इसे 24 खंबा द्वार कहा जाता है। यहां अष्टमी के मौके पर शासकीय पूजा के बाद पैदल नगर पूजा की जाती है। लोगों का मान्यता है कि देवी लोगों की रक्षा करती हैं और महामारी से बचाकर रखती हैं। बता दें कि इस 27 किमी की लंबी यात्रा में 40 मंदिरों में मदिरा का भोग लगाया जाता है।

यह यात्रा सुबह से प्रारंभ होकर शाम तक चलती है। 24 खंबामाता मंदिर से प्रारंभ होकर ज्योर्तिलिंग महाकालेश्वर पर शिखर ध्वज चढ़ाकर समाप्त होती है। इस यात्रा में एक घड़े में छेद किया जाता है। इसके बाद उसमें मदिरा भरकर उसे 27 किमी तक लगातार गिराया जाता है। यह धार लगातार बहती रहती है। 27 किमी तक मदिरा की यह अटूट धार चलती रहती है।

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