जरूरी खबर : PUBJI GAME बनता जा रहा अभिभावकों की मौत का कारण, ऐसे करें बचाव

जरूरी खबर : PUBJI GAME बनता जा रहा अभिभावकों की मौत का कारण, ऐसे करें बचाव

Online Games PUBJI Effects : भोपाल के रहने वाले 11 साल के प्रखर (परिवर्तित नाम) 8 साल की उम्र से ही मोबाइल पर गेम (Online Games PUBJI Effects) खेल रहे थे।लत से परेशान पिता ने जब मोबाइल देखने से रोका तो प्रखर अपने पिता को मारने लगे और कहने लगे कि मुझे रोका तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ। प्रखर का यह बोलना पिता के लिए अचंभित करने वाला था। उन्होंने अगले ही दिन डॉ सत्यकांत त्रिवेदी (Psychiatrist Dr Satyakant Trivedi) से संपर्क किया। डॉ त्रिवेदी ने कहा कि प्रखर पब्जी गेम (Online Games PUBJI Effects) एडिक्शन के शिकार हो गए हैं। उपचार के बाद प्रखर के आक्रामक व्यवहार में थोड़ा सुधार आया।

यह केवल प्रखर का मामला नहीं है। कोरोना काल में ऐसा व्यवहार करने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दरअसल कोरोना काल में जब ऑनलाइन क्लास का समय चल रहा है, तो कई बार बच्चे पढ़ाई करते-करते लैपटॉप पर प्राइवेट विंडो खोलकर गेम खेलने लगते हैं और गेम खेलते-खेलते यह बच्चे कुछ हिंसात्मक वीडियो देखने लगते हैं या एडल्ट गेम खेलने लगते हैं,जिसका उनके मेंटल हेल्थ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

डॉ त्रिवेदी (Psychiatrist Dr Satyakant Trivedi) कहते हैं कि ऑनलाइन गेम्स (Online Games PUBJI Effects) की लत के शिकार बच्चों के व्यवहार में अक्रामकता के साथ अवसाद, एडीएचडी, एंग्जायटी और नॉवेल्टी सीकिंग प्रवृत्ति होना देखा गया है। कोरोनाकाल में बच्चों के घर में कैद होने के चलते  मोबाइल पर उनकी निर्भरता बढ़ी है इसलिए गेम एडिक्शन (Online Games PUBJI Effects) के शिकार बच्चों की संख्या में बड़े पैमाने पर बढ़ोत्तरी है।

 

वह उदाहरण देते हुए कहते हैं कि जब बच्चे किसी ऑनलाइन गेम (Online Games PUBJI Effects) में अच्छा करते हैं, तो उस पैरेंट्स भी उसको बढ़ावा दे देते है जिससे बच्चा प्रोत्साहित होता और वह बार-बार वह गेम खेलना शुरू कर देते हैं। धीरे-धीरे यह लत लग जाती है और यह उतनी ही खतरनाक है, जितनी किसी व्यक्ति को नशे की लत लगना। इसके लिए पैरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है।

क्या करें

मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी (Psychiatrist Dr Satyakant Trivedi) कहते हैं कि पैरेंट्स को बच्चों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। कोरोना काल में 6-7 साल की उम्र में भी बच्चों में एग्रेशन देखने को मिल रहा है ऐसे में यह पैरेंट्स की जिम्मेदारी है कि बच्चों का अधिक ध्यान रखे। बच्चों के सामने खुद ज्यादा मोबाइल न चलाएं, बच्चों को अपना समय जरूर दें, उनसे बाते करें,बच्चों के मन में क्या चल रहा है जानने की कोशिश करें,बच्चों को ऑनलाइन गेम (Online Games PUBJI Effects) की का ऑप्शन दें, बच्चों को ड्राइंग, डांस आदि करवाएं। अगर बच्चों को कुछ देर के लिए मोबाइल दे रहे हैं, तो अपने सामने ही गेम खेलने को कहें।ये भी देखें कि वो क्या कर रहे हैं, क्या कंटेंट देख रहे हैं।

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