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हे भगवान: कन्या भ्रूण हत्या की शिकायत पर NCPCR ने मप्र सरकार को लिखा पत्र, ग्वालियर में CMHO दे चुके हैं नोटिस

Gwalior Illegal Medical Practice: फैमली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के क्लिनिकों पर बड़ा आरोप, ग्वालियर में तो हद ही हो गई।

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Rahul Sharma
हे भगवान: कन्या भ्रूण हत्या की शिकायत पर NCPCR ने मप्र सरकार को लिखा पत्र, ग्वालियर में CMHO दे चुके हैं नोटिस

हाइलाइट्स

  • सवालों के घेरे में फैमली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के क्लीनिक
  • राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने आयुक्त स्वास्थ्य मप्र को लिखा पत्र
  • ग्वालियर के क्लीनिक को CMHO दो बार जारी कर चुके हैं नोटिस
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Gwalior Illegal Medical Practice: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में गैरकानूनी रूप से मेडिकल प्रैक्टिस की जा रही है।

इसका खुलासा राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग द्वारा मध्यप्रदेश सरकार को लिखे गए एक पत्र में हुआ है।

पत्र में फैमली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FPAI) के क्लिनिकों में भ्रूण लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या जैसे शिकायतों का जिक्र कर कार्रवाई करने की बात कही है।

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ग्वालियर में खुद सीएमएचओ FPAI द्वारा संचालित क्लीनिक को दो बार नोटिस थमा चुके हैं।

पत्र में ये लिखा है

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को 5 जुलाई को इस मामले में शिकायत मिली।

जिसके बाद 8 जुलाई को आयोग ने आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल मध्यप्रदेश को पत्र भी जारी कर कार्रवाई करने के लिये कहा।

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Gwalior-Illegal-Medical-Practice-NCPCR-Notice

दरअसल FPAI के ग्वालियर क्लीनिक को लेकर ये शिकायत की गई है।

जिसके बाद आयोग ने पूरे प्रदेश में इसकी जांच को लेकर विभाग को पत्र लिखा है।

पहले मामले को जान लें

ग्वालियर में पंडित विहार कॉलोनी गोला का मंदिर के पास रीप्रोडक्टिव सेक्सुअल हेल्थ एंड चाइल्ड हेल्थकेयर सेंटर (RHFPC) के नाम एक अवैध क्लिनिक का संचालन हो रहा है।

https://twitter.com/BansalNewsMPCG/status/1815396854777213127

इसका संचालन फैमली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FPAI) के अंतर्गत हो रहा है। इस क्लीनिक में सबकुछ फर्जी है।

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CMHO ग्वालियर के निरीक्षण में खुद इस बात की पुष्टी हो चुकी है। बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

दो बार नोटिस हुआ जारी

अवैध रूप से चल रहे Reproductive Health and Family Planning clinics (RHFPC) का निरीक्षण करने सीएमएचओ कार्यालय से दो बार टीम गई।

पहली बार टीम ने 15 सितंबर 2023 को निरीक्षण किया और भारी कमी मिलने के बाद 21 सितंबर 2023 को नोटिस जारी किया।

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Gwalior-FPAI-Clinic-Notice-01

इसके बाद भी क्लिनिक की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। 26 मई 2024 को दोबारा सीएमएचओ कार्यालय की टीम ने निरीक्षण किया।

इस बार करीब एक महीने बाद 27 जून को रीप्रोडक्टिव सेक्सुअल हेल्थ एंड चाइल्ड हेल्थकेयर सेंटर (RHFPC) के डायरेक्टर को नोटिस थमाया गया।

निरीक्षण में सामने आया चौंकाने वाला सच

1.निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कोई भी चिकित्सक नहीं था।
2. अस्पताल में बिना डॉक्टर गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा रही थी।
3.अस्पताल में कोई भी प्रशिक्षित नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था।
4.पैथोलोजी लैब बिना पंजीयन के संचालित मिली, जिसमें पैथोलॉजिस्ट-लैब टेक्नीशियन नहीं था।
5. पेसेन्ट रिपोर्ट शीट में न्यू दिल्ली का पता अंकित था।
6.दवाईयों के निरीक्षण के दौरान कुछ दवाईयां EXPIRE थी।
7.बीएमडब्ल्यू प्रमाण पत्र, प्रदूषण प्रमाण पत्र एवं अग्निशामक यंत्र भी उपलब्ध नहीं था।

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पूछताछ करने पर मरीजों को ही भगा दिया

सीएमएचओ कार्यालय से पहली बार जब 15 सितंबर 2023 को टीम रीप्रोडक्टिव सेक्सुअल हेल्थ एंड चाइल्ड हेल्थकेयर सेंटर (RHFPC) निरीक्षण करने पहुंची।

Gwalior-FPAI-Clinic-Notice-02

तब ओपीडी रजिस्टर में 28 मरीजों को पंजीकृत किया गया। बिना डॉक्टर इनका उपचार किया जा रहा था। निरीक्षण टीम के द्वारा पूछताछ करने पर मरीजों को भगा दिया गया।

ब्रांच मैनेजर ग्वालियर नीलम दीक्षित से सवाल जवाब

सवाल:सीएमएचओ के निरीक्षण में बिना डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ के उपचार करना पाया गया।

जवाब:जिस दिन निरीक्षण हुआ उस दिन ईद की छुट्टी थी। सिर्फ ऑफिस खुला था, कोई उपचार नहीं हो रहा था। इसलिए स्टॉफ नहीं था।

सवाल:शिकायत तो यहां तक हुई कि भ्रूण की जांच तक कर रहे हैं। गर्भपात करा रहे हैं।

जवाब:मशीन तो बंद पड़ी है। कहीं कोई जांच नहीं हो रही। सीएमएचओ ने भी अपनी रिपोर्ट में मशीन खराब होने का जिक्र किया है।

Gwalior-FPAI-Clinic-Neelam-Dixit

सवाल:आपके खिलाफ राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की ओर से भी एमपी हेल्थ डायरेक्टर को लेटर लिखा गया।

जवाब: नहीं...ये गलत है। आप भी आकर देखिए एक बार, छोटी सी एनजीओ है। सेवाओं का तो बहुत ज्यादा काम ही नहीं है।

सवाल:क्लिनिक में ​लापरवाही को लेकर सीएमएचओ दो बार नोटिस दे चुके हैं। उसके बाद भी सेंटर चालू है।

जवाब:गर्वमेंट के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। सेवाएं देने का काम तो हो ही नहीं रहा है। अप्रैल महीने से उपचार का काम पूरी तरह से बंद है।

जिम्मेदारों का गैर जिम्मेदाराना रवैया

मामले में अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जबकि सीएमएचओ कार्यालय से गई टीम के निरीक्षण में भारी कमी और लापरवाही सामने आई थी। खुद सीएमएचओ दो बार नोटिस जारी कर चुके हैं।

मामले में सीएमएचओ डॉ. आरके राजौरिया को कई बार कॉल किया, पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। व्हॉट्सएप पर मैसेज भी किये, लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आया।

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