Maharashtra: पानी पर लेट और चल सकता हूं, बाबा ने किया दावा, फिर जो हुआ खुद उसे देख लीजिए

Maharashtra: पानी पर लेट और चल सकता हूं, बाबा ने किया दावा, फिर जो हुआ खुद उसे देख लीजिए Maharashtra: I can lie down and walk on water, Baba claimed, then see what happened

Maharashtra: पानी पर लेट और चल सकता हूं, बाबा ने किया दावा, फिर जो हुआ खुद उसे देख लीजिए

Maharashtra: सोशल मीडिया पर आए दिन चमत्कार से जुड़े कई वीडियोज वायरल होते रहते है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के एक बाबा का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने पानी पर लेटने और चलने का दावा कर डाला। लेकिन जब उसने यह कारनामा कर दिखाया तो सभी हैरान रह गए। कई लोगों इसे चमत्कार मान रहे है। आईए जानते है क्या है पूरा माजरा।

दरअसल, महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में फ्लोटिंग बाबा के नाम से मशहूर हरिभाऊ राठोड़ का दावा है कि वे 24 घंटे पानी के ऊपर योगमुद्रा में स्थिर रह सकते हैं। जिसके बाद महाराष्ट्र की अंधश्रद्धानिर्मूलन समिति ने उन पर सवाल उठा दिए। समिति ने कहना था कि इसमें कोई चमत्कार नहीं है। यह काम तो उनकी समिति के सदस्य भी कर सकते हैं।

फिर क्या था। फ्लोटिंग बाबा हरिभाऊ राठोड़ ने समिति के सदस्यों को उनकी तरह पानी के ऊपर चौबीस घंटे फ्लोट करके दिखाने का ओपन चैलेंज कर डाला। जिसके बाद अंधश्रद्धानिर्मूलन समिति ने चैलेंज स्वीकार करते हुए अपने सदस्य को 4 अप्रैल, मंगलवार को हिंगोली के धोतरा गांव में फ्लोटिंग बाबा के साथ पानी में उतार दिया।

अंधश्रद्धानिर्मूलन समिति के अध्यक्ष डेढ़ मिनट तक ही पानी में फ्लोट कर सके। उसके बाद वह उठ बैठे। लेकिन बाबा बड़े ही आराम से पानी में योगमुद्रा में बड़े रहे। हालांकि धोतरा गांव के निवासियों ने बाबा से भी अपील करके उन्हें उठा दिया। बताया गया कि धोतरा गांव के निवासियों ने भागवतकथा के लिए बाबा को आमंत्रित किया था। इसलिए लोग नहीं चाहते थे कि वे कथा से वंचित रह जाए।

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यहां भले ही फ्लोटिंग बाबा ने चैलेंज जीत लिया, लेकिन अंधश्रद्धानिर्मूलन समिति ने बाबा की क्षमता को स्वीकार जरूर किया लेकिन चमत्कार मानने से इनकार कर दिया। समिति ने कहा कि अभ्यास के बल पर उन्होंने यह कर पाने में कामयाबी पाई है, इसे चमत्कार का नाम ना दें। वरना जादूटोना के खिलाफ बने कानून के तहत उन पर केस दर्ज हो सकता है।

मैने चमत्कार का दावा नहीं किया

उधर बाबा का कहना है कि उन्होंने इसे कभी चमत्कार का नाम नहीं दिया है। बाबा ने इसका श्रेय भगवत कृपा और स्मरण शक्ति को दिया है। यानी उन्होंने भगवान के आशीर्वाद से ऐसा संभव हो पाने की बात कही है।

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