अंतरिक्ष में लंबे हो जाते हैं इंसान!, जानिए क्या है इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

अंतरिक्ष में लंबे हो जाते हैं इंसान!, जानिए क्या है इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण Humans grow tall in space, know what is the scientific reason behind it nkp

अंतरिक्ष में लंबे हो जाते हैं इंसान!, जानिए क्या है इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

नई दिल्ली। अंतरिक्ष से जुड़े कई ऐसे तथ्य हैं, जिनके बारे में शायद ही हम जानते हों। हालांकि शोधकर्ता हमें समय-समय पर अंतरिक्ष से जुड़ी कई ऐसी चीजों के बारे में बताते रहते हैं, जिन्हें जानकर हम हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक तथ्य यह है कि अंतरिक्ष में छह महीने बिताने के बाद, अंतरिक्ष यात्री अपनी वास्तविक लंबाई से लगभग तीन प्रतिशत अधिक लंबे हो जाते हैं।

इस कारण से लंबे हो जाते हैं

वैज्ञानिकों कि माने तो ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि उनपर पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण का असर नहीं रहता है। इस कारण से अंतरिक्ष में उनका कद बढ़ जाता है। हालांकि, यह एक अस्थायी प्रक्रिया है, यानी जब वैज्ञानिक जमीन पर लौटते हैं तो कुछ ही महीनों में उनका कद वापस पहले जैसा हो जाता है। आइए जानते हैं अंतरिक्ष से जुड़े कुछ और रोचक तथ्यों के बारे में।

स्पेस में पानी उबालने पर क्या होता है?

अगर आप स्पेस में पानी उबालेंगे तो आपको धरती से एकदम अलग अनुभव होगा। धरती पर जहां उबलते पानी में सैकडों बुलबुले बनते हैं, वहीं अंतरिक्ष में पानी गर्म करेंगे तो सिर्फ एक बड़ा सा बुलबुला बनेगा। इसके लिए धरती का गुरूत्वाकर्षण ही जिम्मेदार है।

अंतरिक्ष में बैक्टिरिया तेजी से बढ़ते हैं

वैज्ञानिकों ने अपने 30 साल के शोध में पाया कि धरती पर फलने-फूलने वाले बैक्टीरिया, अंतरिक्ष में ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं और बेहद खतरनाक होते हैं। अंतरिक्ष में बैक्टीरिया की अनुवांशिकता में बदलाव हो जाता है।

चाह कर भी स्पेस में कोक नहीं पी सकते

अंतरिक्ष में कोई भी व्यक्ति चाह कर भी सोडा या कोक का आनंद नहीं ले सकता। क्योंकि स्पेस में ग्रेविटी न होने की वजह से गैस के बुलबुले निष्क्रिय पड़े रहते हैं और सोडा पीन के बाद भी डकार नहीं आती है। इसके अलावा पेट में भी अजीब सा अहसास होता है।

फूलों की खुशबू बदल जाती है

अंतरिक्ष में फूलों की खुशबू एकदम बदल जाती है। यहां तापमान, आद्रर्ता और कई कारकों की वजह से पौधे से पैदा होने वाला तैलीय तत्व प्रभावित होता है, जिसका असर खुशबू पर होता है।

पसीना नहीं टपकता

स्पेस में पसीना नहीं टपकता। क्योंकि यहां गुरूत्वाकर्षण नहीं होता है ऐसे में पसीना तो आता है लेकिन न तो सूखता है और न ही टपकता है। इससे पसीना जहां है, वहीं बना रहता है।

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