Priyank Kanungo: मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो पहुंचे शहपुरा थाने, स्टाफ ने सहयोग से किया इनकार, उठे कई सवाल

मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो जबलपुर के शहपुरा थाने निरीक्षण के लिए पहुंचे, लेकिन पुलिस स्टाफ ने सहयोग करने से इंकार कर दिया। कहा गया कि बिना पूर्व सूचना की अनुमति नहीं दी जा सकती।

Priyank Kanungo: मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो पहुंचे शहपुरा थाने, स्टाफ ने सहयोग से किया इनकार, उठे कई सवाल

हाइलाइट्स

  • जबलपुर में प्रियंक कानूनगो पहुंचे शहपुरा थाना।
  • थाने का रिकॉर्ड नहीं दिखाए जाने का आरोप।
  • मानवाधिकार आयोग सदस्य ने उठाए गंभीर सवाल।

Human Rights Commission of India Priyank Kanungo Jabalpur Shahpura Thana Inspection: जबलपुर के शहपुरा थाने में मानवाधिकार आयोग के निरीक्षण को लेकर नया विवाद सामने आया है। आयोग सदस्य प्रियंक कानूनगो निरीक्षण के लिए पहुंचे, लेकिन पुलिस स्टाफ ने सहयोग करने से मना कर दिया। आरोप है कि थाने का रिकॉर्ड नहीं दिया गया। इस असमंजस की स्थिति को लेकर कानूनगो ने सोशल मीडिया पर प्रश्न खड़े किए हैं। अब सोशल मीडिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पूछा कि उन्हें निरीक्षण की अनुमति किससे लेनी होगी।

थाने पहुंचे आयोग सदस्य प्रियंक कानूनगो

दरअसल, मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो जबलपुर के शहपुरा थाने निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि वहां मौजूद स्टाफ ने कोई सहयोग नहीं किया, और निरीक्षण में बाधा डाली गई।

https://twitter.com/KanoongoPriyank/status/1974877657926861284

रिकॉर्ड तक नहीं दिखाया गया

प्रियंक कानूनगो ने यह जानकारी सोशल मीडिया एक्स पर साझा की है। कानूनगो ने कहा कि थाने में सिर्फ दो पुलिस कांस्टेबल मिले। थाने का स्टाफ या हवालात रिकॉर्ड, बंदियों की गणना या अन्य दस्तावेज नहीं मिले। जब उन्होंने रिकॉर्ड मांगने की कोशिश की, तो सब-इंस्पेक्टर महेंद्र जाटव को बुलाया गया, लेकिन उन्होंने भी सहयोग करने से इनकार कर दिया।

कानूनगो ने कहा कि उन्हें बताया गया कि “बिना पूर्व सूचना के थाने में नहीं आ सकते।” उन्होंने यह प्रश्न उठाया कि निरीक्षण के लिए उन्हें डीजीपी या किस विभाग से अनुमति लेनी होगी?

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मानवाधिकार आयोग को किसकी अनुमति?

यह मामला इस बात को उजागर करता है कि क्या मानव अधिकार आयोग को थाने निरीक्षण के लिए किसी अनुमति की जरूरत होती है या नहीं? आयोग के सदस्य कानूनगो ने स्पष्ट किया कि इसे राज्य और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए।

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