7.4 तीव्रता के झटके, ऐसे भूकंप से मच जाती है तबाही, उससे कैसे जीत गया ताइवान? जानें

Taiwan Earthquake: ताइवान के घनी आबादी वाले क्षेत्र में तेज भूकंप के बावजूद दर्ज की गई मौतों की संख्या उल्लेखनीय रूप से कम है।

7.4 तीव्रता के झटके, ऐसे भूकंप से मच जाती है तबाही, उससे कैसे जीत गया ताइवान? जानें

   हाइलाइट्स

  • ताइवान में 25 साल में सबसे तेज भूकंप
  • भूकंप से शहरी इलाकों में ज्यादा मौतें नहीं
  • बेहतर प्लान की वजह से ताइवान में कम मौतें

Taiwan Earthquake: ताइवान के घनी आबादी वाले क्षेत्र में तेज भूकंप के बावजूद दर्ज की गई मौतों की संख्या उल्लेखनीय रूप से कम है। ये देश की आपदा तैयारियों के क्षेत्र में किए गए काम को दिखाता है।

"हम यहां जो देख रहे हैं वह 'टॉप-डाउन' और 'बॉटम-अप' गवर्नेंस कल्चर का कॉम्बिनेशन है, जिसने मरने वालों की संख्या को अपेक्षाकृत कम रखा है।

सरकार ने लंबे समय से भूकंपीय जोखिमों से खतरे को पहचाना है और कई तरह के उपायों में निवेश किया है। इसमें खासतौर से सख्त बिल्डिंग कोड का जिक्र किया जाना चाहिए, जिसने बहुत सी जानें बचाई हैं।"

   क्या है टॉप डाउन और बॉटम अप कल्चर

‘टॉप-डाउन’ और ‘बॉटम-अप’ गवर्नेंस कल्चर है। आपदा तैयारियों में ‘टॉप डाउन’ के तहत अधिकारी बिल्डिंग कोड को अपडेट और लागू करते हैं। इसमें इमारत से भूकंप की स्थिति में कैसे लोग निकलें, इसे प्लान में शामिल किया जाता है।

‘बॉटम-अप’ का अर्थ है कि समुदाय साथ काम करते हैं, एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं। भूकंप के बाद निकासी में और जरूरतमंद को मदद देना शामिल है।

   पेंडुलम सिस्टम ने बिल्डिंग के झुकाव की रफ्तार थाम ली

ताइवान की सबसे ऊंची इमारत ताइपे 101 भूकंप में हिलती दिखी। वह झुक गई, पर गिरी नहीं। 1,671 फीट ऊंची इस इमारत में भूकंप से निपटने के लिए अनोखा उपाय अपनाया गया है।

इसे ‘पैसिव डंपिंग सिस्टम’ कहते हैं। यह भूकंप और तेज हवा में इमारत के हिलने को 40% तक कम कर देता है।

   दुनिया को ताइवान से कुछ सीखना चाहिए

दुनिया में बहुत सारी इमारतें कोड का पालन नहीं करती है। न केवल भारत में बल्कि कई देश ऐसे है जहां ये व्यवस्था ही नहीं है। विकसित देशों को भी ताइवान से सीखने की बहुत जरूरत है।

आपको बता  दें कि ताईवान में छोटी तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं।

   इस तीव्रता से पहले किस देश में कितनों की गई जान

इन देशों में इसी तीव्रता के भूकंप आए थे। हैती में 2,20,000 भारत में 15,000 तो चीन में 90,000 लोग इससे मर गए थे। ऐसे में ताइवान के काम की सराहना की जानी चाहिए। इस भूकंप में ही आप देखें तो झटकों के बाद लोग जानते थे कि कहां जाना है।

झटके रूकने के बाद भी यहां आप लोगों को वापस आकर इमारतों से सामान निकालने की कोशिश करते हुए नहीं देखते हैं। उन्होंने सरकार से मिल रही जानकारी पर भरोसा किया और लोगों की मदद करने और उन्हें बचाने के लिए अपने पड़ोसियों के साथ सामूहिक रूप से काम किया।

ये इसलिए संभव हुआ क्योंकि ताइवान सरकार ने इसके लिए प्लान बनाया और लंबे समय से इस पर काम किया है। इसमें एक तरफ इमारतों की बनावट में नियमों का सख्ती से पालन है तो दूसरी ओर झटकों के बाद राहतकर्मी, मेडिकलकर्मियों के साथ आम लोगों की ट्रेनिंग है।"

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