Success Story of Parle-G: कैसे करोड़ों लोगों का पसंदीदा बिस्किट बना पार्ले-जी ?

Success Story of Parle-G : हम हमारे दिन की शुरुआत नाश्ते के साथ पीना पसंद करते हैं। लेकिन कई लोगों को चाय के साथ बिस्किट खाना पसंद करते हैं।

Success Story of Parle-G: कैसे करोड़ों लोगों का पसंदीदा बिस्किट बना पार्ले-जी ?

Success Story of Parle-G : हम हमारे दिन की शुरुआत नाश्ते के साथ पीना पसंद करते हैं। लेकिन कई लोगों को चाय के साथ बिस्किट खाना पसंद करते हैं।

लेकिन हमेशा से ही सभी की बचपन पसंदीदा बिस्किट पार्ले-जी ही रही रही है। लेकिन आज भी कई लोग नाश्ते में चाय के साथ पार्ले-जी खाना पसंद करते हैं।

लेकिन आज हम आपको बातएंगे की कैसे ये सामान आते का बिस्किट करोड़ों लोगों की पसंद बना और कैसे इस बिस्किट का नाम पार्ले जी रखा गया ?

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82 साल पुराना इतिहास सहेजा है पार्ले-जी

बता दें पार्ले-जी की शुरुआत मुंबई के विले पारले इलाके में लगभग 82 साल पहले एक बंद पुरानी फैक्ट्री से हुई थी।

साल 1929 में मोहनलाल दयाल जो एक व्यापारी थे उन्होंने विले पारले इलाके में बंद पड़ी फैक्टरी को खरीदा.

जिसके बाद उन्होंने उस फैक्ट्री में कन्फेक्शनरी बनाने की शुरुआत की।

शुरूआती दौर में फैक्टरी की शुरुआत में केवल परिवार के सदस्य ही काम किया करते थे।

लेकिन मोहनलाल दयाल का लक्ष्य इतने तक ही सीमित नहीं रहा।

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उन्होंने विले पारले की फैक्ट्री में कन्फेक्शनरी बनाने के 10 साल बाद 1939 में बिस्किट बनाना शुरू किया।

जिसके बाद मोहनलाल यादव ने परिवार के इस बिजनेस को ऑफिशियल नाम पारले प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड दिया।

बिस्किट के सस्ते दाम और अच्छी क्वालिटी के कारण कंपनी लोकप्रियता बढ़ने लगी। शुरुआत में पारले बिस्किट का नाम पारले ग्लूको रखा गया था।

गेहूं की कमी के कारण बंद हुआ था पार्ले बिस्किट का उत्पादन

आपको बता दें 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद पार्ले बिस्किट के उत्पादन में मुश्किलें आने लगी। जिसकी वजह थी अचानक देश में होने वाली गेहूं की कमी।

इस मुश्किल के चलते पारले को अपने ग्लूको बिस्किट का उत्पादन रोकना पड़ा। क्योंकि गेहूं इसका मुख्य स्रोत था. उसके बाद कुछ समय तक इसका उत्पादन जौ से किया जाने लगा।

कोरोना में बनाया धमाकेदार रिकॉर्ड

कोरोना काल में लॉकडाउन में पारले-जी बिस्किट ने नया और धमाके रिकॉर्ड बनाया। लोखड़ौन के दौरान पारले-जी बिस्किट ने अपनी बिक्री से पिछले 82 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

आज देशभर में 130 से ज्यादा फैक्ट्रियां हैं और लगभग 50 लाख रिटेल स्टोर्स स्थापित हैं.

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