हनीट्रैप का बढ़ता खतरा: इस तरह जाल में फंस जाते हैं अधिकारी से लेकर साइंटिस्ट तक, जानें मन कैसे हो जाता है हनी में ट्रैप

हनी ट्रैप के मामले व्यक्ति विशेष के व्यक्तित्व की मनोवैज्ञानिक कमियों का लाभ उठाने पर आधारित होते हैं, विशेषतः इच्छाओं से जुड़ी कमजोरियों का.

हनीट्रैप का बढ़ता खतरा: इस तरह जाल में फंस जाते हैं अधिकारी से लेकर साइंटिस्ट तक, जानें मन कैसे हो जाता है हनी में ट्रैप

डॉ सत्यकांत त्रिवेदी

हनी ट्रैप का मनोविज्ञान: हनी ट्रैप के मामले व्यक्ति विशेष के व्यक्तित्व की मनोवैज्ञानिक कमियों का लाभ उठाने पर आधारित होते हैं, विशेषतः भावनात्मक आवश्यकताओं और इच्छाओं से जुड़ी कमजोरियों का। रोमांटिक या यौन संबंध बनाने का लालच देकर करके लाभ उठाना पूरे स्कैम के कोर में होता है। हनी ट्रैप के मनोविज्ञान को मैं विस्तार से समझाने का प्रयास कर रहा हूं।

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साइकोलॉजिकल फैक्टर्स

विपरीत लिंग से जुड़ने की आसक्ति: कई लोगों को रोमांटिक या भावनात्मक संबंधों की तीव्र इच्छा होती है। स्कैमर्स आपमें अपनेपन और भावनात्मक रिश्ते का भ्रम पैदा करके आपका लाभ उठाते हैं।

Honey Trap - हनी ट्रैप

वैलीडेशन का लालच: स्केमर्स अक्सर ऐसे व्यक्तियों को निशाना बनाते हैं जो इनसिक्योर महसूस कर सकते हैं या वैलिडेशन (मान्यता) की तलाश में हैं। प्रशंसा और चापलूसी विक्टिम्स को विशेष महसूस करवाकर उनकी आत्म मुग्धता को पोषण देते हैं।

विश्वसनीय बनने की कला: स्कैमर्स अक्सर वास्तविक प्रतीत होने वाली बातचीत से शुरू होता है जो विश्वास पैदा करता है। एक बार विश्वास स्थापित हो जाने पर, स्कैमर्स गिव एंड टेक की रणनीति का उपयोग कर सकता है - ट्रैप्ड के लिए कुछ ऐसा करना जिससे वे एहसान वापस करने के लिए बाध्य महसूस करें।

इमोशनल मैनिपुलेशन: एक मनगढ़ंत परिस्थिति बनाकर जो सहानुभूति का रवैया उत्पन्न करती है, स्कैमर्स, ट्रैप्ड को जल्दबाजी में निर्णय लेने या पैसे देने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

त्रुटि पूर्ण बिलीफ सिस्टम का फायदा: घोटालेबाज विभिन्न पूर्वाग्रहों का लाभ उठाते हैं, जैसे कि अभी देते जाओ शायद कल सब ठीक हो जाए। कई बार ये भी सोचना कि इतना लॉस हो चुका थोड़ा और सही।

जागरूकता है जरूरी 

इन सब मामलों में जागरूकता और विवेक एक मात्र विकल्प है। कई बार हमारे पास ट्रेप्ड व्यक्ति हताशा,कुंठा और आत्महत्या तक के विचार लिए हुए आते हैं। परेशानी बढ़ने पर उचित संवाद और कानून की मदद लेने से हिचकना नहीं हैं।

(लेखक बंसल हॉस्पिटल भोपाल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक हैं और सामायिक विषयों पर लिखते हैं)

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