गृहमंत्री बोले,बंदियों की सजा एक माह होगी कम,जेल विभाग के 282 पदों की जल्द होगी परीक्षा

भोपाल। मुसीबत का आना पार्ट ऑफ लाइफ है और मुसीबत से बाहर आ जाना आर्ट ऑफ लाइफ है। जेलों में बंद दंडित बंदियों की सजा में एक माह की कमी की जाकर उन्हें 30 दिन पहले रिहा किया जायेगा। dr narottam mishra गृह एवं जेल मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ये बातें कोरोना वॉरियर्स जेलकर्मियों के लिये आयोजित सम्मान समारोह में सेंट्रल जेल भोपाल में कही। उच्च सुरक्षा इकाई के लिए 3 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित आवासीय परिसर का लोकार्पण भी सेंट्रल जेल में किया गया।

नन्हीं बालिकाओं को उपहार भेंट किये
जेल परिसर में मंत्री डॉ. मिश्रा ने महिला बन्दियों की नन्हीं बालिकाओं को उपहार भेंट किये। सेन्ट्रेल जेल के सभागार में मंत्री डॉ. मिश्रा और मंत्री सारंग ने दिवंगत जेल उप अधीक्षक त्रिपाठी और गैस त्रासदी के मृतकों को श्रद्धांजलि दी।

अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के निर्देश दिये

मंत्री डॉ. मिश्रा ने सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सेंट्रल जेल भोपाल के सांस्कृतिक भवन का सभागार अब जेल प्रहरी स्व. रमाकांत यादव सभागार के नाम से जाना जायेगा। उन्होंने छिंदवाड़ा के डिप्टी जेलर राजकुमार त्रिपाठी के कोरोना से दिवंगत होने पर उनकी धर्मपत्नी प्रीति त्रिपाठी को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के निर्देश दिये।

282 पदों की पूर्ति के लिये परीक्षा आयोजित की जायेगी
मंत्री डॉ. मिश्रा ने कहा कि पुलिसकर्मियों की तरह ही जेलकर्मियों के लिये भी सम्पूर्ण प्रदेश में सर्वसुविधा-युक्त आवासगृहों का निर्माण किया जायेगा। मंत्री डॉ. मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि आगामी 11 दिसंबर से 24 दिसंबर तक प्रदेश में जेल विभाग के 282 पदों की पूर्ति के लिये परीक्षा आयोजित की जायेगी।

परोपकार करने का संतोष प्रदान करता रहेगा

उन्होंने कोरोना वॉरियर्स को सम्मानित करते हुए कहा कि आपने अपनी कर्त्तव्यनिष्ठा और सेवा-परायण से अन्यों को भी महामारी से उबरने में सहायता प्रदान की है। मेडल नाम का होता है पर संतोष काम का होता है। आपके द्वारा जो कार्य किया गया है, वह आपको जीवन-भर परोपकार करने का संतोष प्रदान करता रहेगा।

मंत्री डॉ. मिश्रा ने जेल विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि कोरोना की महामारी के दौरान प्रदेश के 45 हजार से अधिक बंदियों का बेहतर प्रबंधन करते हुए एक भी कोरोना पीड़ित का काल-कवलित नहीं होना जेल विभाग की बेहतर कार्यप्रणाली को प्रदर्शित करता है। जेलें न केवल कारागार हैं बल्कि सुधारगृह भी हैं। यहाँ बंदियों के बौद्धिक विकास के द्वारा विकार दूर कर विकास का मार्ग प्रशस्त किया जाता है। मंत्री डॉ. मिश्रा ने कैदियों के आत्मबल संवर्धन के लिये कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश जेल महानिदेशक संजय चौधरी को दिये।

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