Holika Dahan Muhurta Upay 2022 : होलिका दहन पर जरूर करें सभी टोटकों से बचने के ये खास उपाय

नई दिल्ली। होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष का होलिका दहन आज रात शुभ मुहूर्त किया जाएगा। ऐसा कहा जाता है कि होलिका दहन के दिन तंत्र—मंत्र किया जाता है। हालांकि साइंस में ये सब चीजें नहीं होती। न ही वो इसे मानता है। पर फिर भी अगर आपके के दिमाग में ऐसी कोई शंका या संशय है तो हम आपको कुछ ऐसी बातें या उपाय बताने जा रहे हैं जिनके करने से आप विभिन्न प्रकार के टोटकों से बच सकते हैं। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इस दिन कुछ खास उपाय करने से घर में धन—धान्य की वृद्धि भी होती है।

होलिका दहन कल Holika Dahan Muhurta 2022 गुरुवार यानि 17 मार्च को है। इसके बाद 18 मार्च को रंगों के साथ उमंग भरा त्योहार यानि धुरैड़ी मनाया जाएगा। पर होलिका दहन के मुहूर्त को Holika DahanUpay 2022 लेकर को लेकर भद्रा का भ्रम न रहे। इसके लिए हम आपको बताने जा रहे हैं। होलिका दहन का सही मुहूर्त, पूजन विधि। साथ ही कुछ खास उपाय। ऐसा माना जाता है इन्हें करने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। तो चलिए जानते हैं कौन से हैं वे खास उपाय।

छोटी होली के करें ये उपाय —
होलिका दहन (Holika Dahan) वाले दिन को छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिष (Astro Tips) के अनुसार इस दिन किए गए उपाय आर्थिक परेशानी को दूर करने में मदद कर सकते हैं। जो आपकी सुख—समृद्धि को बढ़ा सकते हैं।

होलिका दहन के दिन करें ये उपाय

शांति और धन वृद्धि के लिए —
गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना इस दिन बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करना आपको अच्छे स्वास्थ्य, धन और शांति में वृद्धि करता है।

नौकरी और व्यवसाय के लिए —
स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहन कर होलिका दहन करें। इस पूजन में एक नारियल लेकर अपने और परिवार के उपर से सात बार वार कर होलिका दहन की अग्नि में डाल दें। फिर सात बार होलिका की परिक्रमा करें। भगवान को फल या मिठाई का भोग लगाएं। ऐसा करना आपको नौकरी और व्यवसाय में आ रही परेशानी दूर कर सकता है।

मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए —
बड़ी मेहनतों के बाद भी अनुकूल परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं तो इसके लिए होलिका दहन की पूजा में नारियल, पान और सुपारी अर्पित करें।

आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए —
होलिका दहन के समय अलसी, गेहूं, मटर और चना को आग में डालने से आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलता है। ये भी कहा जाता है कि होली के दिन मोती शंख को स्नान कराकर उसकी पूजा करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।

होली पर टोटकों से बचने के उपाय —

  • इस दिन सफेद खाद्य पदार्थों से करें परहेज करना चाहिए। कहते हैं टोटकों में इसका उपयोग किया जाता है। करें तो सावधानी बरतें।
  • ऐसा कहते हैं कि टोटकों का उपयोग ज्यादातर सिर पर किया जाता है। इसलिए जहां तक संभव हो सिर को ढक कर रखें। इसके लिए कपड़े या टोपी का उपयोग किया जा सकता है।
  • कपड़ों का उपयोग भी इसमें होता है। अत: संभव हो तो इस दिन न तो किसी के कपड़े पहने और न ही अपने कपड़े किसी को पहनने दें।
  • होलिका दहन के दिन काले तिल काले कपड़ें में बांध कर रखें। फिर होलिका दहन में उसे स्वाहा कर दें। इससे आप पर चले रहे टोटके समाप्त हो जाते हैं।
  • अगर आप को नश की आदत हैं तो होलिका दहन के दिन इससे परहेज करें। क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि तंत्र—मंत्र और टोटके का उपयोग नशीली चीजों में भी किया जाता है।
  • इस दिन विभिन्न प्रकारों के तंत्र—मंत्र से बचने के लिए तंत्र के दवता यानि श्री बालाजी और काल भैरव की आराधना करना श्रेष्ठ माना जाता है।

क्या कहते हैं पंचांग —
पंडित रामगोविंद शास्त्री का कहना है 17 मार्च को रात 12:43 मिनट तक भद्रा रहने के भद्रा के बाद ही होलिका दहन होगा। जबकि पंडित सनत कुमार खंपरिया की मानें तो होलिका दहन अपने आप में बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का त्योहार है। इसमें भद्रा का कोई प्रभाव नहीं होता। बल्कि होलिका में सभी बुराइयां, अशुभ मुहूर्त जलकर खाक हो जाते हैं।

होलिका दहन मुहूर्त —

तिथि — 17 मार्च

समय — 09.06 शाम से रात्रि 10.16 बजे तक

धुरैड़ी — 18 मार्च, 2022

पूर्णिमा तिथि आरंभ : 17 मार्च, 2022 को दोपहर 01.29 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 18 मार्च, 2022 को दोपहर 12.47 बजे तक

वैकल्पिक मुहूर्त : मध्य राशि 01.12 से सुबह 06.28 बजे तक

होलिका दहन पूजा सामग्री –

एक लोटा जल, गाय के गोबर से बनी माला, अक्षत, गंध, पुष्प, माला, रोली, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, गेंहू की बालियां।

होलिका पूजा विधि –

1 — पूजन सामग्री रख कर थाली तैयार कर लें।

2 — पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठे पूजन स्थल पर पूजन करें। सबसे पहले पूजा थाली फिर स्वयं पर पानी छिड़कर ‘ऊं पुण्डरीकाक्षः पुनातु’ मंत्र का 3 बार जाप करें।

3 — दाएं हाथ में जल, चावल, फूल और एक सिक्का लेकर संकल्प लें।

4 — दाहिने हाथ में फूल और चावल लेकर भगवान गणेश का स्मरण करें।

5 — मां अम्बे का स्मरण करते हुए “ऊं अम्बिकायै नमः पंचोपचारार्थे गंधाक्षतपुष्पाणि सर्मपयामि” मंत्र का जाप करें।

6 — जाप करते हएु पुष्प के साथ रोली और अक्षत लगाकर मैया को चढ़ाएं।

7 — अब भगवान नरसिंह का स्मरण करें। पुष्प पर रोली और चावल लगाकर भगवान को अर्पित करें।

नोट : इस लेख में दी गई सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित है। बंसल न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता। अमल में लाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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