Hindi Diwas 2024: 5 सेकंड में सुना दी ABCD, हिंदी वर्णमाला सुनाने में लोगों के पसीने छूटे ! देखें वीडियो

Hindi Diwas 2024: हिंदी दिवस पर लोगों ने 5 सेकंड में ABCD तो सुना दी, लेकिन हिंदी वर्णमाला सुनाने में उनके पसीने छूट गए, वीडियो देखें।

Hindi Diwas 2024 People have forgotten the Hindi alphabet

Hindi Diwas 2024: हिंदी हमारी मातृभाषा है। हम सभी बचपन से हिंदी सुनते, बोलते और लिखते-पढ़ते आए हैं। आज हिंदी दिवस पर आपको ये जानकर हैरानी होगी कि जिस वर्णमाला ने हमें हिंदी सिखाई, लोग उसे ही भूल गए हैं। लोगों को अंग्रेजी की ABCD तो मुंहजुबानी याद है, लेकिन हिंदी वर्णमाला अ आ इ ई... याद नहीं है। बंसल न्यूज डिजिटल ने कुछ युवाओं से ABCD और हिंदी वर्णमाला सुनाने को कहा। ABCD तो 5 सेकंड में सुना दी, लेकिन हिंदी वर्णमाला सुनाने में लोगों के पसीने छूट गए।

युवाओं से पूछे 2 सवाल

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बंसल न्यूज डिजिटल ने युवाओं से 2 सवाल पूछे। पहला सवाल 10 सेकंड में ABCD सुनाइए। दूसरा सवाल 20 सेकंड में हिंदी वर्णमाला सुनाइए। अगर वे दोनों सवालों का टाइम लिमिट के अंदर सही जवाब देते तो उन्हें गिफ्ट में नोटपैड और पेन दिया जाता। कुछ युवाओं ने कोशिश की तो वे अ से अं-अ: तक ही सुना पाए, तो वहीं कुछ युवाओं ने टूटी-फूटी गलत हिंदी वर्णमाला सुनाई।

कुछ तो ABCD भी गलत बोल बैठे

हिंदी वर्णमाला सुनाने की बात तो दूर रही, कुछ युवा ABCD भी गलत सुना बैठे। एक लड़की से जब सवाल किया गया तो उसका कहना था कि वो हिंदी वर्णमाला कैसे सुना पाएगी और सोच में डूब गई। हिंदी वर्णमाला की जगह वो बाहरखड़ी सुनाने लगी। एक युवा ने कहा कि उसे हिंदी वर्णमाला पूरी याद नहीं है।

'हमसे ना हो पाएगा'

एक लड़की ने 5 सेकंड में ABCD तो सुना दी, लेकिन जब हिंदी वर्णमाला सुनाने की बारी आई तो थोड़ी कोशिश करने के बाद कह दिया हमसे ना हो पाएगा। वहीं एक लड़का क ख ग घ के बाद सीधे श पर आ गया और फिर भूलकर चुप हो गया। एक लड़की ने हिंदी वर्णमाला के सवाल पर कहा कि उसे इसका जवाब नहीं आता।

मातृभाषा हिंदी को भुला देना चिंता की बात

बंसल न्यूज डिजिटल को ऐसा एक भी शख्स नहीं मिला जो अ से ज्ञ तक सही हिंदी वर्णमाला सुना पाया हो। एक तरफ हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की बात की जाती है, तो वहीं दूसरी ओर हिंदी को लेकर लोगों का ऐसा हाल है कि उन्हें हिंदी वर्णमाला तक याद नहीं है। अंग्रेजी की ABCD लोगों को मुंहजुबानी याद है, लेकिन वर्णमाला जिससे सभी ने हिंदी सीखी थी, उसे लोग भूल गए हैं। अंग्रेजी को अपनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन मातृभाषा हिंदी को इस तरह भुला देना वाकई चिंता की बात है।

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