Himanta Biswa Sarma: असम के 15 वें मुख्यमंत्री बने, जानिए क्यों उन्हें पूर्वोत्तर का चाणक्य कहा जाता है

Himanta Biswa Sarma

नई दिल्ली। कई दिनों तक चली माथापच्ची के बाद आखिरकार हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) आज असम के नए मुख्यमंत्री बन गए। कल गुवाहाटी में बीजेपी विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी थी। वे असम के 15वें मुख्यमंत्री बने हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर कौन हैं हिमंत बिस्वा सरमा और कैसा रहा है उनका राजनीतिक सफर।

उन्हें पूर्वोत्तर का चाणक्य भी कहा जाता है

असम में लगातार दूसरी बार बीजेपी को जीत दिलाने में हिमंत बिस्वा सरमा का हाथ माना जाता है। साथ ही वे असम में पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से भी ज्यादा लोकप्रिय थे। इतना ही नहीं उन्हें पूर्वोत्तर का चाणक्य भी कहा जाता है। चुनावी प्रचार में लोगों से कैसे संवाद किया जाए, ये कोई हिमंत बिस्वा सरमा से सीखे। इस चुनाव में, जोरदार प्रचार अभियान, तेज और आक्रामक रणनीति के कारण, उन्होंने लगातार दूसरी बार बीजेपी को जीत दिलाई और अब असम के सीएम बन गए हैं।

2016 विधानसभा जीत के भी हीरो थे

हालांकि हिमंत बिस्वा सरमा शुरूआत से बीजेपी में नहीं रहे हैं। 2015 में कांग्रेस से मतभेद के बाद उन्होंने भाजपा ज्वाइन किया था। साल 2016 के विधानसभा चुनाव में हिमंत ने कांग्रेस को हराने के लिए पूरी ताकत झोक दी थी और तब जाकर भाजपा असम में परचम लहरा पाई थी। लोगों को 2016 में लग रहा था कि हिमंत बिस्वा सरमा ही असम के अगले मुख्यमंत्री होंगे। लेकिन तब पार्टी ने उनकी जगह सर्बानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री बनाया था।

हिमंत के विरोधी भी मित्र होते हैं

हिमंत बिस्वा सरमा के निजी जीवन को देखें तो उनका जन्म 1 फरवरी 1969 को जोरहाट में हुआ था। उनके पिता कैलाश नाथ शर्मा प्रसिद्ध कवि एवं लेखक थे। जबकि उनकी मां मृणालिनी देवी असम साहित्‍य सभा से जुड़ी हैं। हिमंत के बारे में कहा जाता है कि वो चाहे किसी भी पार्टी में रहें, उनके विरोधी भी मित्र होते हैं। हमेशा गरीबों के लिए खड़े रहने वाले हिमंत बिस्व शर्मा को असम के लोग प्यार से दादा कहकर बुलाते हैं। कहा तो ये भी जाता है कि अगर वे किसी विपक्षी नेता को कह दें कि तुम मेरी पार्टी में शामिल हो जाओं, तो वो आने से मना नहीं कर पाता।

राजनीतिक जीवन

हिमांता बिस्‍व शर्मा ने कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वे 2001 से 2015 तक जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की सीट पर विधायक रह चुके हैं। 2015 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और अब अपने राजनीतिक सफर को एक नए कलेवर में आगे बढ़ा रहे हैं। 2016 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद वे कैबिनेट मंत्री बने थे और अब 2021 विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया है।

काफी प्रभावशाली हैं हिमंत बिस्वा सरमा

असम में हिमंत बिस्वा सरमा, प्रभाव और प्रमुखता के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से काफी आगे हैं। 2016 के चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को जीत दिलाने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है। साथ ही CAA आंदोलन और कोरोना महामारी की चुनौतियों से निपटने में भी हिमंत बिस्वा शर्मा का योगदान सबसे ज्यादा रहा। उत्तर-पूर्व भारत में भाजपा की स्थिति को और अधिक मजबूत में उनका ही हाथ माना जाता है। गृह मंत्रालय के अलावा लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों को संभालने के साथ ही हिमंत बिस्वा सरमा उत्तर-पूर्व डेमोक्रेटिक एलायंस (NEDA) के संयोजक के रूप में भी काम करते रहे हैं।

असम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी

बतादें कि 126 सीटों वाली विधानसभा में, बीजेपी ने 60 सीटें जीती हैं। जबकि उसके गठबंधन सहयोगी असोम गण परिषद (AJP) ने नौ सीटें और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (UPPL) ने छह सीटें जीती हैं। दूसरे स्थान पर रही कांग्रेस ने 29 सीटें जीतीं और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने 16 सीटें जीतीं। जबकि बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने चार सीटें जीती हैं।

Share This

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password