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तमिलनाडु में कांग्रेस के विभिन्न गुटों को साथ लाएगा भारी-भरकम समितियों का गठन: अय्यर

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Bhasha
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(आसिम कमाल)

नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने बृहस्पतिवार को कहा कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी की राज्य इकाई के लिए भारी-भरकम समितियां गठित करने से कांग्रेस पर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि यह कदम पार्टी के विभिन्न गुटों को साथ लाएगा।

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उनकी यह टिप्पणी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है कि पिछले दिनों कई समितियां गठित होने के बाद कांग्रेस के लोकसभा सदस्य कार्ति चिदंबरम ने खुलकर सवाल उठाए थे और कहा था कि इन भारी-भरकम समितियों को बनाने से कोई मकसद पूरा नहीं होगा क्योंकि इनमें से किसी के पास भी कोई ताकत नहीं होगी जिसका मतलब यह कि किसी की कोई जवाबदेही भी नहीं होगी।

इनमें से कई समितियों में शामिल अय्यर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में यह उम्मीद जताई कि इस विधानसभा चुनाव में द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन के आसानी से जीत हासिल करेगा और इसकी वजह यह है कि इस गठबंधन का मुकाबला ‘बहुत ज्यादा बंटी हुई’ अन्नाद्रमुक से होने जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव इस साल अप्रैल-मई में प्रस्तावित है। राज्य में अन्नाद्रमुक की सरकार है और यह पार्टी अपनी शीर्ष नेता जयललिता के निधन के बाद पहला विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

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अय्यर ने यह भी कहा कि अगर अन्नाद्रमुक का कोई धड़ा या फिर पूरी पार्टी ही भाजपा के साथ हाथ मिलाती है तो यह उसके लिए और भी नुकसानदेह होगा क्योंकि ‘‘तमिलनाडु में कभी हिंदू-मुस्लिम विभाजन जैसी कोई बात नहीं रही और आज भी नहीं है।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘कांग्रेस अकेले चुनाव नहीं लड़े जा रही है। वह द्रमुक के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी। हमारा मुकाबला वहां पलानीस्वामी और पनीरसेल्वम के बीच बहुत ही ज्यादा बंटी हुई अन्नाद्रमुक से है तथा उनके बीच दिल से कोई सुलह नहीं हुई है।’’

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अन्नाद्रमुक की सरकार को ‘गठबंधन सरकार’ करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और उप मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ऐसे गुटों का नेतृत्व कर रहे हैं जिनके बीच सुलह ही नहीं हो सकती।

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कार्ति चिदंबरम की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर अय्यर ने कहा, ‘‘प्रदेश कांग्रेस कमेटी को चलाने का यह ‘भारी-भरकम रास्ता’ है। यह पार्टी के प्रादेशिक नेतृत्व में मतभेदों को खत्म करने का माध्यम है। मैं इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं देखता।’’

उन्होंने उम्मीद जताई कि इन भारी-भरकम समितियों में से कुछ ज्यदा सक्रिय सदस्य एक छोटा समूह बनाएंगे जो निर्णय लेना वाला होगा।

यह पूछे जाने पर कि इतने ज्यादा लोगों को समितियों में शामिल करने से पार्टी को नुकसान हो सकता है तो कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इससे पार्टी एकजुट होगी। इससे सभी गुट महसूस करते हैं कि उनका प्रतिनिधित्व है और संबंधित समितियों में उनके गुटों के प्रतिनिधि प्रभावी हैं।’’

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दरअसल, कांग्रेस ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गत शनिवार को अपनी राज्य इकाई के लिए 32 उपाध्यक्षों समेत कई पदाधिकारियों की नियुक्ति की और कई समितियों एवं चुनाव प्रबंधन दल का गठन किया। कई समितियों में कार्ति को भी शामिल किया गया है।

तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लिए 32 उपाध्यक्ष, 57 महासचिव और 104 सचिव नियुक्त किए गए हैं। इसके साथ ही, पार्टी ने कार्यकारी समिति के सदस्य और 32 जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं।

भाषा हक

हक शाहिद

शाहिद

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