Heatwave Deaths Tragedy: हीटवेव के चलते 700 लोगों की हुई थी मौत, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Heatwave Deaths Tragedy: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि मौसमी आपदा से निपटने के लिए क्या तैयारियां की जा रही हैं।

Heatwave Deaths Tragedy

हाईलाइट्स:

  • साल 2024 में हीटवेव के चलते 700 मौतें होने की खबर सामने आई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बड़ी मौसमी आपदा से निपटने के लिए तैयारियों के बारे में पूछा है।
  • सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गृह मंत्रालय, एनडीएमए समेत अन्य संस्थानों को नोटिस भेज कर जवाब मांगा है।

Heatwave Deaths Tragedy: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। दरअसल, पिछले साल देशभर में गर्मी और हीटवेव की वजह से 700 से ज्यादा मौतें होने की खबरों के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और इससे जुड़ी एजेंसियों से पूछा है कि इस बड़ी मौसमी आपदा से निपटने के लिए क्या तैयारियां की जा रही हैं।

Heatwave Deaths Tragedy: किनसे मांगा जवाब?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल हैं, ने गृह मंत्रालय, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और दूसरी संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है।

याचिका किसने दायर की?

यह मामला पर्यावरण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि सरकार को यह निर्देश दिए जाएं कि वह हीटवेव से बचने के लिए पुख्ता उपाय करे—जैसे कि गर्मी की अगाही प्रणाली, 24x7 हेल्पलाइन, और तुरंत राहत के लिए योजनाएं।

Heatwave Deaths Tragedy: पहले भी हो चुकी हैं जानलेवा गर्मियां

याचिकाकर्ता के वकील आकाश वशिष्ठ ने बताया कि पिछले साल भारी गर्मी की वजह से सैकड़ों लोगों की जान गई थी, और मौसम विभाग लगातार चेतावनी दे रहा है कि आने वाले समय में हीटवेव और गंभीर होंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले जहां हीटवेव का असर सिर्फ उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत तक सीमित था, अब यह पूरब, उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत तक फैल गया है।

NDMA की गाइडलाइन सिर्फ कागज़ों तक?

तोंगड़ ने बताया कि 2019 में NDMA ने हीटवेव से निपटने के लिए गाइडलाइन जारी की थी, लेकिन देश के कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अब तक उसे लागू नहीं कर पाए हैं।

क्या है कानूनी जिम्मेदारी?

आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 35 के तहत केंद्र सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखे।

गरीबों और मजदूरों को मदद की मांग

याचिका में यह भी अपील की गई है कि हीटवेव के दौरान बीमार या जान गंवाने वालों को मुआवजा दिया जाए, और गरीब व मजदूर तबके को आर्थिक सहायता या न्यूनतम मजदूरी दी जाए ताकि वे सुरक्षित रह सकें।

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