Hathras Accident: हाथरस में जिसके सत्संग में मौत का तांडव, वो सफेद सूट वाले नारायण हरि कौन हैं, जानें उनकी पूरी कहानी

Hathras Accident: हाथरस में जिसके सत्संग में 100 से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई। वे सफेद सूट वाले बाबा नारायण हरि कौन हैं।

Hathras Accident: हाथरस में जिसके सत्संग में मौत का तांडव, वो सफेद सूट वाले नारायण हरि कौन हैं, जानें उनकी पूरी कहानी

Hathras Accident: हाथरस में भोले बाबा के सत्संग में 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। सैंकड़ों घायल हैं। सत्संग में अचानक भगदड़ मच गई। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भीड़ ने कुचल दिया। हादसे के बाद से भोले बाबा फरार हैं। आखिर जिनके सत्संग में मौत ने तांडव किया वो भोले बाबा कौन हैं। भोले बाबा का असली नाम नारायण हरि है और वे एटा के रहवासी हैं।

सफेद सूट नारायण हरि की पहचान

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भोले बाबा नारायण हरि की पहचान सफेद सूट है। वे ज्यादातर सफेद सूट पहनते हैं। वे सियासी गलियारों से भी जुड़े हैं। नारायण हरि को यूपी के कई बड़े नेताओं के साथ एक मंच पर देखा गया है। इसमें समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव भी शामिल हैं।

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नारायण हरि ये भोले बाबा तक का सफर

नारायण हरि एटा के बहादुर नगरी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने एटा में ही शुरुआती पढ़ाई की। बचपन में पिता के साथ खेती करते थे। इसके बाद पुलिस में भर्ती हुए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के 12 थानों में नौकरी की। इसके अलावा इंटेलिजेंस में भी रहे। नारायण हरि दावा करते हैं कि 18 साल नौकरी करने के बाद 90 के दशक में VRS ले लिया था, लेकिन ये सच नहीं है। असलियत ये है कि उन्हें जब वे हेड कॉन्स्टेबल के पद पर इटावा में थे, तब उनके खिलाफ एक यौन शोषण का केस दर्ज हुआ। इस मामले के सामने के बाद उन्हें यूपी पुलिस ने बर्खास्त कर दिया। जेल में सजा काटने के बाद उन्होंने अपना नाम और पहचान बदल ली और बाबा बन गए। वे गांव में झोपड़ी बनाकर रहने लगे।

नारायण हरि ने नाम बदला

नारायण ने अपना नया नाम साकार विश्वहरि रख लिया। वे सत्संग करने लगे। समागम में उनकी पत्नी भी साथ रहती हैं। वे दूसरे बाबा की तरह भगवा कपड़े नहीं पहनते। नारायण साकार हरि सफेद सूट और सफेद जूतों में नजर आते हैं। कई बार कुर्ता-पजामा और सफेद टोपी लगाकर सत्संग करते हैं।

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कई IAS-IPS नारायण हरि के चेले

भोले बाबा नारायण हरि उत्तर प्रदेश के अलावा आसपास के राज्यों में भी सत्संग करते हैं। कई IAS-IPS अधिकारी भी नारायण हरि के चेले हैं। उनके समागम में कई नेता और अफसर पहुंचते हैं। बाबा कहते हैं कि उन्हें नहीं मालूम कि सरकारी नौकरी से आध्यात्म की ओर खींचकर कौन लाया ? वे नौकरी से VRS लेने के बाद भगवान से साक्षात्कार का दावा करते हैं।

बाबा की खुद की आर्मी

नारायण हरि की खुद की आर्मी है। इन्हें सेवादार कहते हैं। यहीं कार्यक्रम की सारी व्यवस्था संभालते हैं। भोजन, पानी और ट्रैफिक यही आर्मी देखती है। ये आर्मी काले कपड़ों में रहती है।

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बाबा के समागम में बंटता है पानी

भोले बाबा नारायण हरि के सत्संग में भक्तों को पानी बांटा जाता है। उनके अनुयायी ऐसा मानते हैं कि पानी पीने से सारी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। एटा में बहादुर नगर गांव में नारायण हरि दरबार लगाते हैं। आश्रम के बाहर एक हैंडपंप है। इसका पानी पीने के लिए लंबी-लंबी लाइन लगती हैं।

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