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Hariyali Amavasya 2025: प्रकृति की पूजा का दिन हरियाली अमावस्या, जितनी धार्मिक आस्था उतना ही वैज्ञानिक महत्व

Hariyali Amavasya 2025: आज हरियाली अमावस्या है। ये दिन प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सम्मान का दिन है। हरियाली अमावस्या के दिन पौधे लगाए जाते हैं।

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Rahul Garhwal
Hariyali Amavasya 2025 Religious and Scientific Importance expert comment hindi news

हाइलाइट्स

  • हरियाली अमावस्या 2025
  • प्रकृति की पूजा का दिन
  • धार्मिक और साइंटिफिक महत्व

Hariyali Amavasya 2025: सावन की रिमझिम बरसात और चारों ओर हरियाली। ऐसे खुशनुमा मौसम में प्रकृति की पूजा का दिन आता है जिसे हरियाली अमावस्या कहते हैं। हरियाली अमावस्या न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व है, बल्कि इसका वैज्ञानिक महत्व भी उतना ही गहरा है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है। वहीं साइंटिफिक नजरिए से देखें तो सावन के महीने में पौधरोपण के लिए एकदम सही समय होता है।

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हरियाली अमावस्या का पौराणिक महत्व

Hariyali Amavasya

प्रकृति की पूजा का दिन

इस दिन को धरती की हरियाली, पेड़-पौधों और पर्यावरण के सम्मान के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि पेड़-पौधों में देवताओं का वास होता है।

शिव और पार्वती की आराधना

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। सावन भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है और यह अमावस्या उनके आशीर्वाद के लिए खास मानी जाती है।

पितरों की शांति

अमावस्या तिथि पितरों (पूर्वजों) की आत्मा की शांति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। लोग तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं।

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वृक्षारोपण का महत्व

पौराणिक मान्यता है कि इस दिन लगाए गए पौधे हजार गुना पुण्य फल देते हैं। इसी कारण जगह-जगह वृक्षारोपण कार्यक्रम भी होते हैं।

धार्मिक स्नान और दान

हरियाली अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान, व्रत, और दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति आती है।

हरियाली अमावस्या का साइंटिफिक महत्व

plantation hariyali amavasya

वृक्षारोपण का सही समय

वरिष्ठ पर्यावरणविद सुभाष C पांडे का कहना है कि हरियाली अमावस्या धार्मिक आस्था के जरिए लोगों को प्रकृति से जोड़ती है। हरियाली अमावस्या सावन में आती है, जब बारिश होती है। यह पौधे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है क्योंकि मिट्टी में नमी रहती है और पौधों की ग्रोथ अच्छी होती है। इस समय पर स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाए जाते हैं तो उनके जीवित रहने की संभावना 70 प्रतिशत से ज्यादा होती है।

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'स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाएं'

वरिष्ठ पर्यावरणविद सुभाष C पांडे ने कहा कि हरियाली अमावस्या पर स्थानीय प्रजाति के पौधे जैसे आम, इमली, जामुन, नीम, पीपल, बरगद जैसे पौधे लगाने चाहिए। इन पौधों को 2-3 महीने पानी मिल जाता है तो इतना उनके जीवित रहने के लिए पर्याप्त होता है। हरियाली अमावस्या पौधरोपण के लिए सबसे अनुकूल समय होता है क्योंकि पानी 2-3 बार गिर चुका होता है।

Subhash C Pandey

भूजल स्तर बढ़ाते हैं पौधे

वरिष्ठ पर्यावरणविद सुभाष C ने कहा कि पेड़ जितनी ऊंचाई तक बढ़ते हैं उतनी ही उनकी जड़ें जमीन के अंदर जाती हैं। पेड़ भूजल स्तर को बढ़ाते हैं। जब बारिश खत्म हो जाएगी तब भी भूजल स्तर बेहतर बना रहेगा।

'भारतीय धर्म और दर्शन की कई बातें विज्ञान से संबंद्ध'

वरिष्ठ पर्यावरणविद सुभाष C ने कहा कि स्कंद पुराण में लिखा है कि पेड़ों को लगाकर ही आप मोक्ष प्राप्त करेंगे। मनुस्मृति में भी लिखा है कि पेड़ों को लगाए बिना आपको मोक्ष प्राप्त नहीं होगा। रामायण काल में राम ने पौधों से सीता का पता पूछा था। अब ये साइंटिफिकली प्रमाणित हो चुका है कि पेड़-पौधे आपस में बातचीत करते हैं। वे हमारी बातों को सुनते हैं और उस पर रिएक्ट भी करते हैं। भारतीय धर्म और दर्शन अपने आप में बहुत विकसित और परिपूर्ण था। उसकी कई बातें विज्ञान से संबंद्ध थीं।

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पेड़-पौधे भी सुन सकते हैं हमारी आवाज !

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