Harda Blast Impact: हरदा में ब्लास्ट वाली जगह पर ही था प्रदूषण का खतरा, नहर में पटाखे बहाकर जहरीली कर दी हजारों एकड़ खेती की जमीन

Harda Blast Impact: सिराली, दीपगांव, बाबड़िया, महेन्द्र गांव, चौकड़ी, धूलिआ सहित एक दर्जन गांव की हजारों एकड़ फसल प्रभावित हो सकती है।

Harda Blast Impact: हरदा में ब्लास्ट वाली जगह पर ही था प्रदूषण का खतरा, नहर में पटाखे बहाकर जहरीली कर दी हजारों एकड़ खेती की जमीन

   हाइलाइट्स

  • 8 फरवरी की रात सिराली के पास नहर में बहाये गए सुतली बम
  • नहर के पानी से 20 हजार हेक्टेयर फसल की होती है सिंचाई
  • एक दर्जन गांव की फसलें हो सकती हैं प्रभावित

Harda Blast Impact: अधूरा ज्ञान कितना खतरनाक होता है, यह उसका उदाहरण है। हरदा हादसे के बाद जब्त पटाखों को नष्ट करने के लिये कोई वैज्ञानिक तरीका अपनाने की जगह उन्हें नहर में बहा दिया गया।

जिस नहर में ये पटाखे बहाए गए उसका पानी रबी सीजन की फसलों की सिंचाई (Harda Blast Impact) के लिये हो रहा है।

   दो हजार हेक्टेयर की फसल में दूषित पानी से सिंचाई!

जिम्मेदारों की लापरवाही से हरदा जिले के सिराली क्षेत्र की दो हजार हेक्टेयर की फसल में दूषित पानी से सिंचाई का खतरा (Harda Blast Impact) मंडरा रहा है। पटाखे में उपयोग होने वाले केमिकल से फसलों पर प्रभाव पड़ेगा।

सिराली, दीपगांव, बाबड़िया, महेन्द्र गांव, चौकड़ी, धूलिआ सहित एक दर्जन गांव की हजारों एकड़ फसल प्रभावित हो सकती है।

   नहर के पानी में ये केमिकल मिल सकते हैं

पटाखा बनाने के लिए जिस पाउडर का इस्‍तेमाल होता है, उसमें पोटेशियम परक्लोरेट, बेरियम नाइट्रेट, पर्लाइट पाउडर, मैग्नीशियम एलुमिनियम मिक्‍चर, एलुमिनियम पाउडर, टाइटेनियम पाउडर, ब्रिम स्टोन, कैल्शियम क्लोराइड, सोडियम नाइट्रेट, बेरियम क्लोराइड, कॉपर क्लोराइड इत्‍यादि शामिल हैं।

पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी पाण्डेय ने बताया कि इनमें से कई केमिकल पानी में पूरी तरह से घुलनशील होते हैं। जो पानी में पूरी तरह से घुलकर (Harda Blast Impact) खेतों तक पहुंच जाएंगे।

संबंधित खबर: Harda Blast Sound Wave: पटाखा फैक्ट्री वाली जगह से 2KM दूर कैसे दीवार हुई क्रेक-गिरी बाईक, जानें ब्लास्ट का साउंड वेव से कनेक्शन!

   कैंसर, पेट और किडनी संबंधी हो सकती है बीमारी

पटाखे के बारूद बनाने में इस्तेमाल होने केमिकल बेहद हानिकारक होते हैं। यदि ये किसी भी माध्यम से हमारे शरीर में पहुंचते हैं तो इनसे कैंसर, किडनी और पेट रोग संबंधी घातक बीमारियां हो सकती है।

पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी पांडे ने कहा कि यह वॉटर एक्ट 1974 का सीधा उल्लंघन है।

   गेहूं और चने में हो इस जहरीले पानी का उपयोग

नहर का पानी खेतों में जाकर फसलों की प्यास बुझाएगा। जिस इलाके का यह मामला है वहां रबी सीजन में अधिकांश क्षेत्र में गेहूं और चने की खेती होती है। यह गेहूं और चना आपकी और हमारी थाली में ही पहुंचेगा।

किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि प्रशासन की इस हरकत की कीमत (Harda Blast Impact) अब आम आदमी को चुकानी पड़ेगी।

संबंधित खबर: Action on Harda Blast: ह्यूमन राइट्स कमीशन ने ACS गृह, IG-कमिश्नर नर्मदापुरम से मांगी 15 बिंदुओं पर जानकारी, NGT ने ये दिया बड़ा आदेश

   सिराली के पास नहर में छोड़े गए पटाखे

आमासेल गांव के रहने वाले सोनू उपाध्याय ने एक वीडियो बनाकर इस पूरे मामले का खुलासा किया था। सिराली के पास बड़ी संख्या में जप्त सुतली बमों को बहा (Harda Blast Impact) दिया गया। मामला गुरुवार रात 8 बजे का बताया जा रहा है।

   मामले में यह सवाल हो रहे खड़े

  1. प्रशासन ने बड़ी मात्रा में पटाखे तो जब्त किये, लेकिन इसे किस वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने की योजना है।
  2. प्रशासन की यदि कोई प्लानिंग नहीं है तो क्या इन्हें पानी या जमीन में गड़ाने की योजना है।
  3. ऐसा करने पर क्या ये पानी या स्वाइल को प्रदूषित नहीं करेंगे।
  4. नहर में पटाखे छोड़ने के बाद यही पानी फसलों में पहुंचेगा, तो क्या इससे फसल प्रदूषित नहीं होगी।
  5. एक लापरवाही ने लोगों के स्वास्थ पर सवाल खड़े कर दिये हैं, क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। 

अब एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

किसान सोनू का कहना है कि उसने खुद इस बारे में जब तहसीलदार वीरेंद्र उईके से बात की तो उन्होंने कहा कि पटाखे नष्ट करने के लिए कर्मचारियों का कहा है, लेकिन नहर में फेंकने के लिए नहीं (Harda Blast Impact) कहा था।

इस मामले में नगर परिषद सिराली के सीएमओ राहुल शर्मा का कहना है कि तहसीलदार सिराली के मांगने पर वाहन भेजा गया था। लेकिन यह नहीं पता कि वाहन किस उपयोग के लिए ले जाया गया।

यह भी पढ़ें
Here are a few more articles:
Read the Next Article