Halloween Pumpkin: आत्माओं को खुश करने के लिए इंदौर में भूतों का त्यौहार, क्या है हैलोवीन का कद्दू कनेक्शन?

हर साल 31 अक्टूबर को हैलोवीन मनाया जाता है. हैलोवीन डे यूरोप और अमेरिका के देशों में मनाया जाता है. लेकिन अब इस दिन को भारतीय भी मना रहे हैं.

Halloween Pumpkin: आत्माओं को खुश करने के लिए इंदौर में भूतों का त्यौहार, क्या है हैलोवीन का कद्दू कनेक्शन?

इंदौर से अविनाश रावत की रिपोर्ट।

इंदौर। Halloween Pumpkin: हर साल 31 अक्टूबर को हैलोवीन मनाया जाता है। हैलोवीन डे यूरोप और अमेरिका के देशों में मनाया जाता है. लेकिन अब इस दिन को भारतीय भी मना रहे हैं।

लेकिन क्या अप जानते हैं हैलोवीन क्यों मनाया जाता है? और इसका कनेक्शन किससे है? तो आइए आज हम जानंगे हैलोवीन के बारे में-  हैलोवीन का नाम लेते ही भूतिया चेहरे और कद्दू का जिक्र आता है. हैलोवीन के दौरान लोग कद्दू को खोखला करके  उसमें आंखे, नाक, मुंह या उसको डरावना बनाकर उसके अंदर कैंडिल रखते हैं, ताकि वो अंधेरे में और डरवाना लगे।  इन कद्दूओं को हैलोवीन कहा जाता है।

क्यों मनाया जाता है हैलोवीन डे

यूरोपीय देशों में रहने वाले लोगों का कहना है कि भूतों का गेटअप करने से पूर्वजों की आत्‍माओं को शांति मिलती है। लिहाजा ईसाई समुदाय में सेल्टिक कैंलेंडर के आखिरी दिन यानी 31 अक्टूबर को हैलोवीन फेस्टिवल बडी धूमधाम से मनाया जाता है।

अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोपियन देशों के कई राज्यों में इसे नए साल की शुरुआत के तौर पर मनाया जाता है। दरअसल, हैलोवीन की शुरुआत सबसे पहले आयरलैंड और स्‍कॉटलैंड में हुई थी। इंटरनेट और सोशल मीडिया के युग में यह त्यौहार दुनियाभर में प्रसिद्ध हो गया है।

आज के समय में इसका इतना क्रेज बढ़ गया है कि पितृपक्ष में पितरों का तर्पण करने वाले लोग अब उन्हीं पूर्वजों को खुश रखने के लिए हैलोवीन फेस्टीवल भी मनाने लगे हैं। इतना ही नहीं इसके लिए 2 से 5 हजार रुपए प्रति कपल के हिसाब से बाकायदा रजिस्ट्रेशन फीस भी चुका रहे हैं।

इंदौर में मनाया गया हैलोवीन डे

बता दें इंदौर के मालवा मिल इलाके के एक कैफे में भी हैलोवीन डे सेलिब्रेट किया जा रहा है। कैफे मोका नाम के इस कैफे में चारों तरफ भूत-प्रेतों की ऑकृतियों से सज्जा हो चुकी है। हैलोवीन डे के लिहाज से मैन्यू भी तैयार किया गया है।

क्या है हैलोवीन का कद्दू कनेक्शन?

हैलोवीन डे पर जिस तरह आज भूत-प्रेतों का गेटअप किया जाता है, ठीक वैसा ही कभी लोग कद्दू को खोखला करके उसमें डरावने चेहरे बनाते थे। फिर इसी खोखले कद्दू के भीतर जलती हुई मोमबत्‍ती रखी जाती थी, ताकि अंधेरे में देखने से यह डरावना लगे। कायदे से हैलोवीन इसी कद्दू को कहा जाता था।

त्‍योहार खत्‍म होने के बाद कद्दू को दफना दिया जाता है। इंदौर में यूरोपीय देशों की तर्ज पर कद्दू तो नहीं रखा जा रहा है लेकिन भूत-प्रेत की सज्जा के साथ लोग खुद भी यही गेटअप बना रहे हैं।

हैलोवीन में कद्दू का महत्व

हैलोवीन डे को बच्चे ट्रिक और ट्रीट (Trick or Treat) कहते हैं. इस दिन लोग एक दूसरे को घर-घर जाकर कैंडी गिफ्ट करते हैं. अगर गेटअप की बात करें तो तो इस फेस्टिवल में खास बच्चे कॉस्ट्यूम पहनकर, डरावना मेकअप लगाकर मास्क पहनकर निकलते हैं।

इस दिन बच्चे अपने हाथ में कद्दू रखते हैं जिसमें आंख , नाक और मुंह बनाकर उसके अंदर कैंडल रखते हैं और सभी कद्दू बाद में दफना दिए जाते हैं।

ऐसा माना जाता है किसानों की मान्यता के अनुसार इस दिन बुरी आत्माएं खेत में आकर उनकी फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं,  इसीलिए कद्दू में कैंडिल जाकर आत्माओं को रास्ता दिखाया जाता है।

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