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Gwalior Student Drone: ग्वालियर जिले के ‘द सिंधिया स्कूल’ (Scindia School Student) के एक हाई स्कूल के छात्र ने ऐसा ड्रोन बनाया है, जिसमें एक व्यक्ति भी बैठकर उड़ान भर सकता है। छात्र का नाम मेधांश त्रिवेदी बताया जा रहा है। हाई स्कूल के छात्र ने सिंगल-सीटर ड्रोन-कॉप्टर बनाकर सभी को चौंका दिया है।
छात्र के इस नई खोज की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग छात्र की खूब तारीफ कर रहे हैं। इसी कड़ी में छात्र की तारीफ उद्योगपति आनन्द महिंद्रा ने भी की है। उन्होंने छात्र की सराहना करते हुए कहा है कि ‘नवाचार अक्सर जुनून, समर्पण और विचारों को वास्तविकता में बदलने की इच्छा से उत्पन्न होता है।’
ड्रोन में क्या है खास?
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यह ड्रोन (Gwalior Student Drone) 80 किलो के व्यक्ति को लेकर 6 मिनट तक लगातार हवा में उड़ान भर सकता है। इस ड्रोन में करीब 45 हॉर्स पावर की शक्ति है। अभी यह ड्रोन करीब 4 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। इस ड्रोन की गति 60 किलो मीटर प्रति घंटा है वहीं 1.8 मीटर चौड़ा और 1.8 मीटर लंबा है। सुरक्षा के चलते अभी इस ड्रोन को 10 मीटर की उंचाई तक ही उड़ा रहे हैं।
मेधांश के इस ड्रोन से एग्रीकल्चर ड्रोन में लगने वाली 4 मोटर लगाई गई हैं। मेंधाश का कहना है कि भविष्य में आम लोगों के काम आने वाले ड्रोन का निर्माण करूंगा। इससे एक व्यक्ति को दूसरी जगह पहुंचाने और एग्रीकल्चर में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। बता दें, मेधांश को यह एग्रीकल्चर ड्रोन बनाने में कुल 3 महीने लगे हैं।
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उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने की सराहना
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने मेधांश की लगन और समर्पण की तारीफ करते हुए कहा, “यह एक खोज से अधिक इंजीनियरिंग के प्रति जुनून और काम पूरा करने की प्रतिबद्धता का उदाहरण है। ऐसे युवा हमारे देश को अधिक जुझारु और इन्नोवेटीव बनाएंगे।”
सोशल मीडिया पर मेधांश के ड्रोन को शानदार काम बताया गया। कई यूजर्स ने लिखा कि खोज का आधार ज्ञान नहीं, बल्कि जुनून और समर्पण है। मेधांश जैसे युवाओं की सोच और मेहनत एक प्रगतिशील और रचनात्मक राष्ट्र की नींव रखती है।
क्या कहा मेधांश ने?
छात्र मेधांश त्रिवेदी बताया कि मुझे चाइना के ड्रोन देखने के बाद इस ड्रोन (Gwalior Student Drone) को बनाने की प्रेरणा मिली है। इस सफर में उनके शिक्षक मनोज मिश्रा ने न केवल तकनीकी मदद दी बल्कि प्रेरित भी किया।
मेधांश का सपना एक एयर टैक्सी कंपनी स्थापित करने और सस्ता हेलीकॉप्टर बनाने का है। ड्रोन बनाने के दौरान मेधांश को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन परिवार और शिक्षकों के सहयोग से मेधांश अपने सपने को साकार करने में सफल हो पाया।
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