MP: ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा विवाद सुलझा, बैठक में बनी सहमति, 15 अक्टूबर को अब नहीं होगा विरोध प्रदर्शन

Gwalior Ambedkar Statue Controversy: ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा विवाद पर बढ़ा तनाव, पुलिस ने धारा 163 लागू कर सुरक्षा बढ़ाई। प्रशासन के लिए चुनौती है कि वो विरोध प्रदर्शन को किसी अप्रिय घटना में परिवर्तित न होने दे।

MP: ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा विवाद सुलझा, बैठक में बनी सहमति, 15 अक्टूबर को अब नहीं होगा विरोध प्रदर्शन

मॉक ड्रिल अभ्यास करती पुलिस।

हाइलाइट्स

  • ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा विवाद सुलझा

  • 15 अक्टूबर को नहीं होगा प्रदर्शन

  • बैठक में दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति

Gwalior Ambedkar Statue Controversy: ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा विवाद सुलझ गया है। प्रशासन ने एक बैठक बुलाई थी जिसमें दलित और सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों के बीच सौहार्दपूर्ण सहमति बन गई है। इस सहमति के बाद, भीम आर्मी ने 15 अक्टूबर को प्रस्तावित अपना आंदोलन वापस ले लिया है।

[caption id="attachment_914120" align="alignnone" width="1172"]publive-image मॉक ड्रिल अभ्यास करती पुलिस।[/caption]

विवाद की जड़ क्या है

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाने की मांग कई महीनों से चल रही थी। इस मांग का समर्थन भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और ओबीसी महासभा जैसे संगठनों ने किया। वहीं, कुछ वकीलों का एक गुट इस प्रस्ताव का विरोध कर रहा है। विवाद तब और भड़क गया जब हाईकोर्ट के ही वकील अनिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर डॉ. अंबेडकर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।

एफआईआर के मुताबिक, मिश्रा ने अपने वीडियो में डॉ. अंबेडकर को ‘अंग्रेजों का एजेंट’, ‘झूठा’ और ‘गुलाम’ कहकर संबोधित किया। इस बयान ने पूरे ग्वालियर-चंबल अंचल में तनाव पैदा कर दिया। दलित संगठनों ने 15 अक्टूबर को ग्वालियर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा कर दी है।

सोशल मीडिया पर अपीलों से बढ़ा तनाव

जैसे-जैसे विरोध की तारीख नजदीक आ रही है, सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक सक्रिय हो गए हैं। दलित संगठनों ने लोगों से 15 अक्टूबर को ग्वालियर पहुंचने की अपील की है। जवाब में सवर्ण समाज के संगठनों ने भी उसी दिन शक्ति प्रदर्शन करने की घोषणा कर दी। इससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है कि कहीं शहर में दो समुदाय आमने-सामने न आ जाएं।

ग्वालियर पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 260 भड़काऊ पोस्ट हटवाई हैं और 50 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए हैं। पुलिस की सायबर टीम लगातार सोशल मीडिया पर नजर रखे हुए है ताकि कोई भ्रामक खबर या उकसाने वाली सामग्री न फैल सके।

प्रशासन ने बढ़ाई चौकसी, धारा 163 लागू

तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए ग्वालियर जिला प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी है। इस आदेश के तहत बिना अनुमति कोई भी धरना, प्रदर्शन, रैली या चल समारोह नहीं निकाला जा सकेगा। कलेक्टर रुचिका चौहान और एसएसपी धर्मवीर सिंह ने शहर के व्यापारियों, प्रबुद्ध नागरिकों और शांति समिति के सदस्यों के साथ बैठक की और सभी से शांति बनाए रखने की अपील की।

बैठक में सहमति बनी कि 15 अक्टूबर को कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं किया जाएगा। फिर भी प्रशासन किसी भी ढिलाई के मूड में नहीं है। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालेगा या अफवाह फैलाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कराई गई मॉक ड्रिल

संभावित हिंसा और उपद्रव से निपटने के लिए पुलिस ने शनिवार (11 अक्टूबर) को बहोड़ापुर स्थित पुलिस लाइन में मॉक ड्रिल (mock drill) की। इसमें बलवा (riot control) से निपटने की पूरी रिहर्सल की गई। पुलिस बल को दो टीमों में बांटा गया। एक टीम ने प्रदर्शनकारियों की भूमिका निभाई, जबकि दूसरी ने भीड़ नियंत्रण की।

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पुलिस ने रिहर्सल के दौरान आंसू गैस के गोले छोड़े और पथराव की स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया दी जाए, इसका अभ्यास किया। इस दौरान एक आरक्षक संतोष सिंह घायल हो गए, जिसके माथे पर टांके आए। एसएसपी ने सभी पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए कि वे बलवा किट (riot gear) अपने वाहनों में रखें, उसकी साफ-सफाई करें और उसे पहनने का अभ्यास भी करें।

क्या है जिला प्रशासन की रणनीति

कलेक्टर रुचिका चौहान ने शांति समिति के सदस्यों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाएं और लोगों को भड़काऊ पोस्ट डालने से रोकें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बिना अनुमति कोई आयोजन न किया जाए, यदि कहीं आयोजन होता है तो तत्काल कार्रवाई की जाए।

गांवों में भी प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें सहयोग के लिए कहा गया है। शांति समिति के सदस्यों ने प्रशासन को भरोसा दिलाया है कि वे किसी भी हालत में माहौल बिगड़ने नहीं देंगे।

[caption id="attachment_914114" align="alignnone" width="1053"]publive-image पुलिस और अधिकारियों के बीच हुई बैठक।[/caption]

सोशल मीडिया पर सायबर टीम की पैनी नजर

ग्वालियर पुलिस की सायबर टीम दिन-रात सोशल मीडिया मॉनिटर कर रही है। जिले में कई वाट्सऐप ग्रुप, फेसबुक पेज और एक्स अकाउंट्स पर नजर रखी जा रही है। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने कहा कि कुछ लोग झूठी खबरें और भ्रामक जानकारी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पुलिस ऐसे लोगों पर लगातार कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि त्योहारों का मौसम है, ऐसे में लोग आपसी भाईचारे और सौहार्द बनाए रखें। प्रशासन सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम है।

हालात पर नजर बनाए हुए हैं अधिकारी

ग्वालियर में शांति समिति की बैठक में 30 से अधिक अधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। बैठक में स्पष्ट कहा गया कि जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं और बिना अनुमति कोई आयोजन नहीं होगा। पुलिस ने शहर के सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में मीटिंग करें, लोगों को समझाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम को दें।

ग्वालियर जिला प्रशासन की कोशिश है कि 15 अक्टूबर को कोई भी अप्रिय घटना न हो और शहर की शांति व्यवस्था कायम रहे।

[caption id="attachment_914109" align="alignnone" width="1180"]publive-image हाईकोर्ट परिसर में मई में पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प।[/caption]

प्रशासन के लिए क्या है चुनौती

15 अक्टूबर को ग्वालियर प्रशासन और पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि दोनों गुटों को आमने-सामने आने से कैसे रोका जाए। प्रशासन को सोशल मीडिया पोस्ट्स, वीडियो और अफवाहों की तुरंत पहचान करनी होगी।

भीड़ नियंत्रण, संवेदनशील इलाकों में पुलिस तैनाती, रोड ब्लॉक्स और नाकेबंदी जैसे उपाय पहले से तैयार रखने होंगे। शहर में अतिरिक्त बल, रिजर्व पुलिस और RPF को स्टैंडबाय पर रखना होगा।

किसी पक्ष को यह महसूस न हो कि पुलिस या प्रशासन किसी दूसरे गुट का समर्थन कर रहा है। दोनों समुदायों के लोगों के साथ संवाद करना चाहिए ताकि किसी भी तरह की हिंसा से पहले समझौते या मध्यस्थता का रास्ता निकाला जा सके। प्रशासन को मीडिया को भी सटीक और तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग करने की अपील करनी चाहिए ताकि अफवाहें न फैलें।

इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर विशेष मॉनिटरिंग जारी रखनी चाहिए।

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