Guru Pushya Yog 25 August 2022 : 1500 वर्ष बाद 25 अगस्त को विशेष संयोगों में आ रहा है गुरू-पुष्य नक्षत्र, जानें क्यों है खास

Guru Pushya Yog 25 August 2022 : 1500 वर्ष बाद 25 अगस्त को विशेष संयोगों में आ रहा है गुरू-पुष्य नक्षत्र, जानें क्यों है खास

नई दिल्ली। अगर आप भी आने वाले दिनों में Guru Pushya Yog 25 August 2022  कोई शुभ काम या खरीदारी करने की सोच रहे हैं तो आपको बता दें इसके लिए सबसे शुभ माना जाने वाला गुरू पुष्य आने वाले हैं। जी हां ज्योतिषाचार्यों की मानें तो 25 अगस्त यानि गुरूवार को गुरू पुष्य का grah-nakshatra-in-hindi संयोग बन रहा है। आपको बता दें गुरूवार को एक ऐसा astrology योग बनने जा रहा है जो 1500 वर्षों बाद आ रहा है। जिसमें गुरू पुष्य के बाद 10 महायोगों का विशेष योग रहेगा।

क्या है ये योग –
ज्योतिषाचार्यों की मानें तो 25 अगस्त गुरुवार के दिन 10 महायोग के साथ गुरु-पुष्य नक्षत्र का संयोग 1500 वर्षों बाद दोबारा बन रहा है। गुरु-पुष्य नक्षत्र के संयोग पर शुभ कार्य की शुरुआत करना और नई चीजों की खरीदारी करना grah nakshatra in hindi News, अत्यंत ही शुभ फलदायी होता है। साल में ऐसा दो या तीन बार ही मौका आता है जब गुरू-पुष्य योग बनता है।

इन 5 ग्रहों की स्थिति के कारण बन रहा खास योग –
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 25 अगस्त को गुरु.पुष्य नक्षत्र के संयोग के दिन सूर्य सिंह राशिए गुरु मीन राशि में, शनि मकर राशि में, बुध कन्या राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। ये सभी 5 ग्रह इस दिन स्वंय की राशि में मौजूद रहेंगे जोकि बहुत ही शुभ संयोग है। गुरु.पुष्य नक्षत्र के दिन शनि और गुरु दोनों ग्रह खास तरह का योग भी बना रहे हैं क्योंकि दोनों ग्रह स्वराशि में होने के साथ शनि ग्रह पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं और पुष्य नक्षत्र के देवता गुरु ग्रह हैं। शुभ ग्रहों का ऐसा संयोग कई सदियों के बाद बन रहा है।

5 ग्रहों के संयोग के साथ इस दिन सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि और वरियान नाम के तीन बड़े और शुभ योग के साथ 10 योग भी बन रहे हैं। इन योगों में है शुभकर्तरी, वरिष्ठ, भास्कर, उभयचरी, हर्ष, सरल और विमल नाम जैसे राजयोग शामिल हैं। ऐसे में दिवाली से दो महीने पहले बने गुरु – पुष्य संयोग में खरीदारी और शुभ कार्य की शुरुआत करना शुभ अवसर है।

ऐसी धार्मिक मान्यताएं हैं कि गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ने के कारण इस महत्व काफी बढ़ जाता है। इस शुभ योग में सोना और सोने से बने अभूषण की खरीदारी करना व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि के द्वार खोलती है। ज्योतिषाचार्य की मानें तो जिस प्रकार चातुर्मास में भगवान विष्णु की पूजा और आराधना श्रेष्ठ मानते हैं उसी तरह गुरु-पुष्य नक्षत्र में खरीदारी करना बहुत ही बेहद शुभ माना गया है।

पुष्य नक्षत्र क्यों है खास, क्या है इसका महत्व
आपने अक्सर गुरू पुष्य नक्षत्र की बारे में सुना होगा। पर क्या आपने कभी सोचा है इसे इतना खास क्यों मानते हैं। तो आपको बता दें बृहस्पति देव का जन्म इसी नक्षत्र में हुआ था। तैत्रीय ब्राह्मण में कहा गया है कि बृहस्पतिं प्रथमं जायमानः तिष्यं नक्षत्रं अभिसं बभूव। यानि नारदपुराण के अनुसार इस नक्षत्र में जन्मा जातक महान कर्म करने वाला, बलवान, कृपालु, धार्मिक, धनी, विविध कलाओं का ज्ञाता, दयालु और सत्यवादी होता है। आरंभ काल से ही इस नक्षत्र में किये गये सभी कर्म शुभ फलदाई कहे गये हैं किन्तु मां पार्वती विवाह के समय शिव से मिले श्राप के परिणामस्वरुप पाणिग्रहण संस्कार के लिए इस नक्षत्र को वर्जित मानते हैं।

गुरु पुष्‍य योग

25 अगस्‍त को गुरु पुष्‍य योग सूर्योदय से शाम के 4 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। गुरु पुष्‍य योग धन और समृद्धि के लिए बहुत खास माना जाता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग

25 अगस्‍त को सर्वार्थ सिद्धि योग भी सूर्योदय से लेकर शाम के 4 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। मान्‍यता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग का संबंध मां लक्ष्‍मी से होता है।

अमृत सिद्धि योग

25 अगस्‍त को गुरु पुष्‍य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ही अमृत सिद्धि योग भी है। मान्‍यता है कि इस शुभ योग में की गई कोई भी पूजापाठ, अनुष्‍ठान या फिर अन्‍य शुभ कार्य भविष्‍य में शुभ फल प्रदान करते हैं।

चंद्रमा रहेंगे अपनी राशि में

इस दिन चंद्रमा का स्‍वराशि कर्क में रहना भी बहुत अच्‍छा माना जा रहा है। चंद्रमा का संबंध भी मां लक्ष्‍मी से होता है और उन्‍हें मां लक्ष्‍मी का भाई कहा जाता है। चंद्रमा का अपनी राशि में होना धन समृद्धि की दृष्टि से शुभ प्रभाव देने वाला माना जाता है।

नोट : इस लेख में दिए गए तत्व सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। बंसल न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता। इन पर अमल करने के पहले विशेषज्ञ की सलाह ले लें।

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