Gujrat Election 2022: पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का है गुजरात से खास कनेक्शन

Gujrat Election 2022: पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का है गुजरात से खास कनेक्शन

Gujrat Election 2022: इन दिनों गुजरात विधनासभा के चुनाव चल रहे हैं। गुजरात देश के प्रमुख राज्यों में से एक है। गुजरात वो राज्य है जिसने देश में महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे नेता दिए, लेकिन कम ही लोग जानते है कि गुजरात से एक और नेता का इतिहास जुड़ा है वो है पाकिस्तान के संस्थापक और कायदा-ए-आज़म मोहम्मद अली जिन्ना। जिन्ना के माता-पिता भी गुजरात से थे। आइए बताते हैं आपको कि किस तरह से जिन्ना का गुजरात से नाता है।

राजकोट के रहने वाले थे जिन्ना के माता-पिता

जिन्ना के माता पिता गुजरात के राजकोट जिले के रहने वाले थे। राजकोट जिले के पानोली मोटी गांव में रहा करते थे। पूर्व विदेश मंत्री जसंवत सिंह की किताब के मुताबिक जिन्ना का परिवार खोजा मुसलमान था। परिवार ने मुस्लिम धर्म को अपना लिया। जसंवत सिंह ने अपनी किताब ‘जिन्नारू इंडिया, पार्टिशन, इंडिपेंडेंस’ में लिखा है कि जिन्ना के दादा पूंजाभाई ठक्कर अपने तीन बेटों वलजीभाई, नथुभाई, जेनाभाई और एक बेटी मानबाई के साथ हमेशा पानेली गाँव में रहे।

जसंवत सिंह के किताब के मुताबिक जिन्ना के दादा अपने चार बेटों के साथ इसी गांव में रहते थे। जिन्ना के पिता जेनाभाई ठक्कर और मॉ मीठाबाई ठक्कर बिजनेस के सिलसिले में कराची चले गए। कराची में उनका बिजनेस बढ़ता चला गया। इसी दौरान उनके घर बेटे ने जन्म लिया उसका नाम मोहम्मद अली जेनाभाई रखा गया। जेनाभाई का यही बेटा जब लंदन पढ़ने गया तो उसने अपना नाम मोहम्मद अली जिन्ना रख लिया।

एक ही जिले में गांधी और जिन्ना का परिवार

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना के माता-पिता एक ही राज्य और एक ही जिले के रहने वाले थे। दोनों का जिला राजकोट था। राजकोट जो गुजरात के काठियावाड़ में आता है। राजकोट के पोरबंदर में महात्मा गांधी का जन्म हुआ था। विदेश जाने के पहले महात्मा गांधी की भी उनकी मां ने शादी कस्तूरबा बाई से करा दी थी । जिन्ना भी विदेश पढ़ने गए तब उनकी मां ने एमीबाई से उनकी शादी करा दी। हांलाकि जिन्ना जब विदेश से लौट तब तक एमीबाई का निधन हो चुका था।

कैसे आया सुर्खियों में आया गांव

2005 में सुर्खियों में आया ये गांव । जब 2005 में बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी जब पाकिस्तान गए थे। पाकिस्तान में लाल कृष्ण आडवाणी जिन्ना की मज़ार पर गए और उनको श्रृदांजलि दी। आडवाणी ने जिन्ना को हिंदु- मुस्लिम एकता का राजदूत बताया । उसी के बाद से देशी विदेशी मीडिया ने इस घर के दरवाजे खटखटाना शुरू कर दिए। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक इस घर में रहने वाला परिवार मीडिया के लोगों से मिलकर परेशान हो गया है।

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