Monkeypox Alert: देश में मंकीपॉक्स का खतरा, मध्यप्रदेश में अलर्ट, डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल ने कहा- सभी जिले बचाव की तैयारी करें

Monkeypox Alert: देश में मंकीपॉक्स का खतरा, मध्यप्रदेश में अलर्ट, डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल ने कहा- सभी जिले बचाव की तैयारी करें

Monkeypox Alert

Monkeypox Alert: मंकीपॉक्स बीमारी को लेकर एमपी में अलर्ट जारी किया गया है। मंगलवार, 20 अगस्त को डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने प्रदेश में मंकीपॉक्स से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, मंकीपॉक्स से बचाव के लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया जाए और जरूरी प्रबंध किए जाएं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी सभी जिलों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि मंकीपॉक्स (Monkeypox Alert) बीमारी का केंद्र वर्तमान में अफ्रीका के देशों में है। इस बीमारी का प्रथम प्रकरण भारत में 14 जुलाई 2022 को केरल में पाया गया था, तत्पश्चात 30 लेबोरेटरी कन्फर्म प्रकरण केरल एवं दिल्ली में मिले थे। किन्तु 27 मार्च 2024 के बाद कोई नया केस सामने नहीं आया है।

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क्या हैं गाइडलाइन

स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन मुताबिक सभी संदिग्ध प्रकरणों को चिन्हाकिंत स्वास्थ्य सुविधाओं में अलग रखा जाएगा। उपचार करने वाले चिकित्सक द्वारा आइसोलेशन समाप्त करने का निर्णय लिए जाने पर ही स्वास्थ्य संस्था से डिस्चार्ज किए जाने के निर्देश हैं। ऐसे समस्त संभावित प्रकरण एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के जिला सर्विलेंस अधिकारी की निगरानी में रहेंगे।

सैंपल NIV पुणे भेजे जाएंगे

संभावित संक्रमण की स्थिति में मंकीपॉक्स (Monkeypox Alert) वायरस परीक्षण के लिए प्रयोगशाला का सैंपल एनआईवी (NIV) पुणे भेजे जाएंगे। साथ ही मंकीपॉक्स का पॉजिटिव प्रकरण पाए जाने पर कांटैक्ट ट्रेसिंग कर विगत 21 दिनों में रोगी के संपर्क में आए व्यक्तियों की पहचान किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

WHO ने पिछले हफ्ते PHEIC घोषित किया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 14 अगस्त 2024 को (मंकीपॉक्स) बीमारी (Monkeypox Alert) को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (पीएचईआईसी) घोषित किया गया है। मंकीपॉक्स एक वायरल जूनोटिक बीमारी है। जो मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षा वन क्षेत्रों (Tropical Rain Forest Areas) में पाई जाती है। मंकीपॉक्स से संक्रमित रोगी को सामान्यतः बुखार, रेश और लिम्फ नोड्स में सूजन पाई जाती है। कुछ रोगियों में चिकित्सकीय जटिलताएं हो सकती हैं। मंकीपॉक्स एक स्व-सीमित संक्रमण है जिसके लक्षण सामान्य रूप से 2-4 सप्ताह में समाप्त हो जाते हैं। गंभीर प्रकरणों में मृत्यु दर 1-10% प्रतिशत है।

मंकीपॉक्स वायरस आंख, कान या मुंह से शरीर में पहुंचता है

मंकीपॉक्स (Monkeypox Alert) वायरस पशुओं से मनुष्य में और मनुष्य से मनुष्य में भी फैल सकता है। उक्त वायरस कटी-फटी त्वचा, रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट या म्यूकस मेम्ब्रेन (आंख, नाक या मुंह) के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। संक्रमित पशु/वन्यपशु से मानव में वायरस का संचरण काटने, खरोंचने, शरीर के तरल पदार्थ एवं घाव से सीधे अथवा अप्रत्यक्ष संपर्क (जैसे दूषित बिस्तर) के माध्यम से हो सकता है। मनुष्य से मनुष्य में संक्रमण और संचरण मुख्य रूप से लार्ज रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स के माध्यम से लंबे समय तक निकट संपर्क से होता है। वायरस शरीर के तरल पदार्थ और घाव के सीधे संपर्क के माध्यम से और घाव के साथ अप्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से भी प्रसारित हो सकता है। जैसे संक्रमित व्यक्ति के दूषित कपड़ों या लिनेन के माध्यम से।

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मंकीपॉक्स फैलने में लगते हैं 7-14 दिन

मंकीपॉक्स (Monkeypox Alert) का इनक्युबेशन पीरियड आमतौर पर 7-14 दिनों का होता है, लेकिन यह 5-21 दिनों तक हो सकता है और इस अवधि के दौरान व्यक्ति आमतौर पर संक्रामक नहीं होता है। संकमित व्यक्ति के चकत्ते दिखने से 1-2 दिन पहले तक रोग फैला सकता है। सभी चकत्तों से पपड़ी गिर न जाए रोगी तब तक संक्रामक बना रह सकता है।

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