लाठीचार्ज का साइड इफेक्ट: 7 अक्टूबर को प्रदेशभर के अतिथि स्कूलों में नहीं पढ़ाएंगे, बहिष्कार की ये वजह

MP Aithi Shikshak Protest: 2 अक्टूबर की रात आंदोलन कर रहे अतिथि शिक्षकों पर लाठीचार्ज और एफआईआर के विरोध में अतिथियों का प्रदर्शन

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MP Aithi Shikshak Protest: राजधानी भोपाल में 2 अक्टूबर की रात आंदोलन कर रहे अतिथि शिक्षकों पर लाठीचार्ज और उसके बाद अतिथि शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों समेत 200 अज्ञात अतिथियों पर FIR मामले के साइड इफेक्ट दिखने लगे हैं।

आजाद अतिथि शिक्षक संघ ने स्कूलों के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। जिसके बाद 7 अक्टूबर को प्रदेशभर के अतिथि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने नहीं जाएंगे। अतिथियों का अभी ये विरोध सांकेतिक है और इसलिए वे सिर्फ एक दिन का ही बहिष्कार कर रहे हैं।

अपनी मांगों को लेकर अतिथि शिक्षक संगठन लगातार रणनीति बना रहे हैं। जरुरत पड़ने पर भविष्य में इस तरह के प्रोटेस्ट को ज्यादा दिनों तक भी चलाया जा सकता है।

राज्यपाल के नाम सौपेंगे ज्ञापन

7 अक्टूबर, सोमवार को अतिथि शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने नहीं जाएंगे, बल्कि तहसील और कलेक्टर कार्यालयों में जाकर सामूहिक रूप से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौपेंगे।

10 सितंबर का महाआंदोलन तात्कालिक समस्याओं के निराकरण के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया था। 2 अक्टूबर का प्रदर्शन महापंचायत की घोषणाओं को लेकर किया गया।

अब 7 अक्टूबर को स्कूलों का बहिष्कार लाठीचार्ज और अतिथियों पद दर्ज एफआईआर के विरोध में हो रहा है।

अतिथि शिक्षकों के बहिष्कार के मायने

प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में अतिथि महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रदेशभर में करीब डेढ़ लाख अतिथि शिक्षक विभिन्न वर्ग में है। इनमें से 50 हजार अतिथियों के बहिष्कार का मतलब 5 स्टूडेंट प्रति टीचर्स के हिसाब से 2.5 लाख बच्चों को पढ़ाने के लिए टीचर्स का नहीं होना है।

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यह स्थिति एक दिन की है, यदि आंदोलन बढ़ता है या भविष्य में ज्यादा दिनों के लिए बहिष्कार किया जाता है तो शिक्षा व्यवस्था के क्या हाल होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

इस पत्र से समझें स्कूलों की मुश्किलें

प्रदेश के करीब 1 हजार स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है। ये स्कूल पूरी तरह से अतिथियों के भरोसे पर है। कई स्कूलों में नियमित शिक्षक गिने चुने हैं। यहां भी पठन पाठन अतिथियों के भरोसे पर ही है।

हाल ही में सोशल मीडिया पर मण्डला जिले के शासकीय कन्या शिक्षा परिसर मोहगांव का एक पत्र वायरल हुआ जो प्राचार्य ने मंडला के ट्राइबल विभाग के सहायक​ आयुक्त को लिखा था।

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इस पत्र में प्राचार्य ने लिखा कि अतिथि शिक्षकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का पत्र दिया है। अतिथियों के हड़ताल पर जाने से व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी, कृपया मार्गदर्शन दें।

यह पत्र 4 अक्टूबर को लिखा गया। इस पत्र से इतना तो पता चलता ही है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था अतिथियों पर किस हद तक निर्भर है। हालांकि बंसल न्यूज डिजिटल इस पत्र की सत्यता की पुष्टी नहीं करता है।

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अतिथि शिक्षकों की समस्याएं अब भी बरकरार

अतिथि शिक्षकों की समस्याएं अब भी बरकरार हैं। भिंड के परशुराम गुर्जर की अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्ति जुलाई 2023 में हुई थी। पोर्टल में फीडिंग नहीं होने से सालभर का वेतन नहीं मिला, ऊपर से पोर्टल में फीडिंग नहीं हुई तो अब वह दोबारा अतिथि शिक्षक भी नहीं बन पाएगा।

शून्य शिक्षक वाले स्कूल में परशुराम ने पूरे साल काम किया। मतलब स्कूल इन्हीं के भरोसे पर था। परशुराम गुर्जर 4 महीने से डीपीआई के चक्कर लगा रहे हैं। ये समस्या किसी एक अतिथि शिक्षक की नहीं है, बल्कि लोक शिक्षण संचालनालय में हर रोज अतिथियों की ऐसी कहानियां मिल जाएंगी।

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