तीनों ‘काले कानून’ खत्म कर किसानों को नए साल की सौगात दे सरकार: कांग्रेस

नयी दिल्ली, 30 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस ने किसान संगठनों और सरकार के बीच नए दौर की बातचीत की पृष्ठभूमि में बुधवार को कहा कि केंद्र को तीनों ‘काले कृषि कानूनों’ को निरस्त कर किसानों को नए साल की सौगात देनी चाहिए।

पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश के किसान विश्वास नहीं करते।

उन्होंने प्रधानमंत्री के पूर्व के कुछ बयानों का हवाला देते हुए ट्वीट किया, ‘हर बैंक खाते में 15 लाख रुपये और हर साल दो करोड़ नौकरियां। 50 दिन दीजिए, नहीं तो…. हम कोरोना वायरस के खिलाफ 21 दिनों में युद्ध जीतेंगे। न तो कोई हमारी सीमा में घुसा है और न किसी चौकी पर कब्जा किया है।’

उन्होंने कहा, ’’मोदी जी के ‘असत्याग्रह’ के लंबे इतिहास के कारण उन पर किसान विश्वास नहीं करते।’’

हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम मांग कर रहे हैं कि सरकार अपना हठ छोड़े। तीनों काले कानून खत्म करें और इसके बाद नए सिरे से किसान मजदूर को नए साल की सौगात दें। सरकार के पास नयी शुरुआत का मौका है।’’

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र और हरियाणा प्रदेश की भाजपा सरकारें जनता के बीच विश्वास खो चुकी है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘हरियाणा में 10 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है। हरियाणा की सरकार किसानों की बात नहीं सुन रही है। बेहतर होता कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मुलाकात करते और उन्हें जमीनी स्थिति से अवगत कराते।’’

सैलजा ने आरोप लगाया, ‘‘सरकार कारपोरेट को गले लगाती है, लेकिन किसानों और गरीबों की नहीं सुनती। अगर खेती का निगमीकरण किया गया तो किसान भी जीएसटी और दूसरे करों के दायरे में आ जाएगा। इससे किसान का नुकसान होगा। इसका मतलब कि यह कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का प्रयास है।’’

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने दावा किया, ‘‘इन तीनों काले कानूनों के विरोध में किसान लगातार विरोध कर रहे हैं, लेकिन लगता है कि सरकार हठधर्मिता पर उतर चुकी है। गतिरोध तोड़ने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।’’

उन्होंने दावा किया कि इन कानूनों से सिर्फ किसानों को नुकसान नहीं होगा, बल्कि महंगाई बढ़ेगी तो देश के हर नागरिक का नुकसान होगा।

भाषा हक

हक नरेश

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