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अच्छी स्क्रिप्ट मुश्किल से हाथ आती है : मां-बेटी के संबंध को दिखाने वाली फिल्म ‘त्रिभंग’ पर काजोल ने कहा

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Bhasha
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बेदिका

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) प्रसिद्ध अभिनेत्री काजोल का कहना है कि वह आने वाली फिल्म ‘त्रिभंग’ में अपने किरदार को जीवन के साथ जोड़ कर देख सकती हैं। त्रिभंग में खास तौर से मां और बेटी के बीच के संबंधों को दिखाया गया है।

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अभिनेत्री रेणुका सहाणे की इस फिल्म में उस विषय को उठाया गया है, जिसपर अकसर कोई बात नहीं करता। सामान्य तौर पर हिन्दी सिनेमा में बाप-बेटे के संबंधों पर चर्चा होती है, लेकिन मां को हमेशा दरकिनार कर दिया जाता है या उसे त्याग की मूर्ति के रूप में दिखाया जाता है।

‘बाजीगर’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘कभी खुशी, कभी गम’ जैसे बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर में काम की चुकी काजोल का कहना है कि वह अपने करियर को लेकर कभी कोई योजना नहीं बनाती हैं। अभिनेत्री का कहना है कि सबकुछ ‘अच्छा स्क्रिप्ट’ मिलने पर निर्भर करता है।

जूम पर पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में काजोल ने कहा, ‘‘मैंने हमेशा अच्छे स्क्रिप्ट पर काम किया है। अगर मुझे कुछ अच्छा लगता है तो मैं वह करुंगी, अगर अच्छा नहीं लगता है तो मैं नहीं करुंगी। मैं कभी योजना नहीं बनाती कि मेरा अगला किरदार क्या होगा या कैसी फिल्म करुंगी। अच्छी स्क्रिप्ट मुश्किल से हाथ आती है।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘मैं कह सकती हूं कि मैं ऐसा किरदार निभाना चाहती हूं या ऐसी फिल्म करना चाहती हूं, लेकिन अंत में आपको अच्छी स्क्रिप्ट पर ही काम करना होगा। यह जुआ है, कभी आपकी किस्मत अच्छी होती है और कभी नहीं होती है।’’

‘त्रिभंग’ में लोकप्रिय बॉलीवुड स्टार और ओडिशी नृत्यांगना ‘अनु’ की भूमिका निभा रही काजोल का फिल्म में अपनी मां नयन के साथ बेहद कड़वा संबंध है। काजोल का कहना है कि उन्हें यह किरदार एक नजर में भा गया था।

फिल्म में तन्वी आजमी, मिथिला पाल्कर और कुणाल रॉय कपूर मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का प्रीमियर नेटफ्लिक्स पर शुक्रवार को होना है।

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हालांकि, निजी जिंदगी में काजोल का संबंध अपनी नानी शोभना समर्थ और मां तनुजा के साथ ‘त्रिभंग’ के किरदार से उलट बेहद मधुर रहा है, लेकिन इस बारे में अभिनेत्री का कहना है कि वह समझ सकती हैं कि कैसे आपसी संवाद की कमी दो बेहद मजबूत लोगों के बीच के संबंधों को बना-बिगाड़ सकती है।

फिल्म के किरदारों के संबंध में अभिनेत्री का कहना है, ‘‘अनु और नयन जैसे लोग हैं, उसमें मुझे कुछ समानता दिखती है, क्योंकि दोनों रचनात्मक, बेहद मजबूत विचार वाले और व्यक्तिगत रूप से स्वतंत्र किरदार हैं। मैं देख सकती हूं कि मेरी मां काफी हद तक नयन की तरह है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे अनु और खुद में भी समानता नजर आती है। वह मुखर है, बिना डरे बोलती है, वह बहुत हद तक मेरे जैसी है। लेकिन, जब आप बाकि चीजों के बारे में सोचते हैं तो पता चलता है कि दो ऐसे मजबूत लोगों की आपस में नहीं बनती है, या फिर जब उनके बीच संवाद की दिक्कत होती है तो सबकुछ बर्बाद हो सकता है।’’

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भाषा अर्पणा उमा

उमा

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