Gold Hallmarking: सोने के गहनों पर अब हॉलमार्किंग होगी जरूरी, 288 जिलों में लग गए सेंटर, जानें क्या होता है, और फायदा

हाल ही में सोना खरीदने और बेचने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है जहां पर अब केंद्र सरकार ने सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया है।

Gold Hallmarking: सोने के गहनों पर अब हॉलमार्किंग होगी जरूरी, 288 जिलों में लग गए सेंटर, जानें क्या होता है, और फायदा

Gold Hallmarking: सोना खरीदना हर कोई चाहता है तो वहीं पर सोना खरा ना मिले तो कभी ठगा महसूस भी होता है। हाल ही में सोना खरीदने और बेचने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है जहां पर अब केंद्र सरकार ने सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया है. सोने की हॉलमार्किंग के दूसरे चरण के लिए 32 और जिलों को इसमें शामिल किया जा चुका है। बताते चलें कि, एक जून से सोने की हॉलमार्किंग का दूसरा चरण शुरू हुआ था।

उपभोक्ता मंत्रालय का बयान

आपको बताते चलें कि, यह नई खबर में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इस बारे में बताते हुए कहा है कि अनिवार्य हॉलमार्किंग के सेकेंड फेज के दायरे में सोने के गहनों के तीन अतिरिक्त कैरेट (20, 23 और 24 कैरेट) की जांच के लिए 32 नए जिले शामिल हो गए हैं। जिसके चलते BIS की वेबसाइट www.bis.gov.in पर इन 288 जिलों की लिस्ट मुहैया करा दी गई है जिसके जरिए अब हर जिलों में गोल्ड हॉलमार्किंग की जाएगी।

जानें क्या होती है हॉलमार्किंग

आपको बताते चलें कि, हॉलमार्किंग याने हॉलमार्क या स्टैंडर्ड मार्क सोने की ज्वैलरी के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा दिया जाता है जिसमें असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान बना होता है. इसके अलावा हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है। वहीं बताते चलें कि, भारत की एकमात्र एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) द्वारा हॉलमार्क सरकारी गारंटी के लिए दिया जाता है। वहीं पर इसके आने से अब ग्राहकों को नकली ज्वेलरी से बचाने और ज्वेलरी कारोबार की निगरानी के लिए हॉलमार्किंग जरूरी है. इसका फायदा यह है कि जब आप इसे बेचने जाएंगे तो किसी तरह की डेप्रिसिएशन कॉस्ट नहीं काटी जाएगी। जिससे वे सही कीमत में खरीदी कर पाएंगे।

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