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Ahilyabai Holkar
Ahilyabai Holkar: सनातन संस्कृति की संरक्षक, वीरांगना, न्यायप्रिय और प्रजावत्सला शासिका देवी अहिल्याबाई होल्कर का जीवन आज भी भारत के लिए एक प्रेरणा है। वह शिवभक्ति में लीन एक ऐसी रानी थीं, जिन्होंने न्याय के लिए अपने स्वयं के पुत्र को भी मृत्युदंड सुनाने का साहस किया था।
अहिल्याबाई का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था
अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गांव में हुआ। विवाह 1737 में खंडेराव होल्कर से हुआ और पति की मृत्यु के बाद उन्होंने मालवा राज्य का शासन संभाला। उनका शासन 28 वर्षों तक नारी नेतृत्व, सामाजिक न्याय, धार्मिक पुनर्जागरण और जनकल्याण का प्रतिमान बना रहा।
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देवी अहिल्याबाई शिव भक्त थीं।[/caption]
पुत्र को सुनाया मृत्यु दंड का आदेश
एक बार उनके पुत्र मालोजीराव के रथ की चपेट में आकर एक गाय का बछड़ा मर गया और मालोजीराव बिना किसी मानवीयता के आगे निकल गए। जब अहिल्याबाई को यह जानकारी मिली, तो उन्होंने बिना किसी मोह के बेटे को उसी प्रकार रथ से कुचलकर मृत्यु दंड देने का आदेश दे दिया। अब यह साहस कौन जुटाता ? कोई सामने नहीं आया, तो अहिल्याबाई खुद रथ पर सवार होकर अपने बेटे को कुचलने के निकल पड़ीं। इस दौरान वहीं गाय महारानी के रथ के सामने आड़कर खड़ी हो गई। इस पर देवी अहिल्याबाई के सिपाह-सालारों ने बताया कि आपकी मंशा को गाय समझ गई है, इसलिए वह अपने दुख की तरह किसी और को दुखी नहीं देखना चाहती है। इसलिए आप उसका इशारा समझें और अपने फैसले को बदल लें। इसके बाद अहिल्याबाई ने पुत्र को क्षमा कर दिया।
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देवी अहिल्याबाई होल्कर।[/caption]
इन मंदिरों का पुनर्निर्माण और संरक्षण कराया
- काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण
- रामेश्वर, द्वारका, बद्रीनाथ, अयोध्या, गया जैसे तीर्थों का जीर्णोद्धार
- महेश्वर में नर्मदा किनारे भव्य अहिल्या महल का निर्माण
- सिक्कों पर शिवलिंग और नंदी की छपाई
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देवी अहिल्यााबाई होल्कर की इंदौर में स्थापित प्रतिमा।[/caption]
उनका शासनकाल आज भी न्याय, धर्म और सेवा का प्रतीक माना जाता है। उनके जीवन से हर नारी और शासक को प्रेरणा लेनी चाहिए।
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Datia Satna Airport: दतिया-सतना से फ्लाइट उड़ने को तैयार, मोदी करेंगे वर्चुअली लोकार्पण, जानें यात्रा का पूरा शेड्यूल
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