Shree Lairai Jatra: गोवा के शिरगांव में श्री लैराई 'जात्रा' के दौरान बड़ा हादसा, भगदड़ में 7 की मौत, 30 से ज्यादा घायल

Shree Lairai Jatra: गोवा के शिरगांव में श्री लैराई 'जात्रा' के दौरान बड़ा हादसा, भगदड़ में 7 की मौत, 30 से ज्यादा घायल goa-shirgao-shri-lairai-jatra-tragedy-goa-stampede-update-hindi-news-pds

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Goa Stampede Shree Lairai Jatra 2025 Tragedy: गोवा के शिरगांव गांव में आयोजित प्रसिद्ध श्री लैराई देवी 'जात्रा' उत्सव के दौरान शुक्रवार रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। घायलों को तत्काल गोवा मेडिकल कॉलेज (GMC) और नॉर्थ गोवा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, मापुसा में भर्ती कराया गया है।

हादसा कैसे हुआ?

यह हादसा तब हुआ जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु हर साल की तरह इस पारंपरिक धार्मिक आयोजन में शामिल होने पहुंचे। रात के समय जब उत्सव चरम पर (Goa Stampede Shree Lairai Jatra) था, तभी अचानक भीड़ में अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घायलों में से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है, बाकी अधिकांश खतरे से बाहर हैं।

CM प्रमोद सावंत ने मौके का लिया जायजा

हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने नॉर्थ गोवा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल और बिचोलिम अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पीड़ितों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और जरूरी सहायता मुहैया कराई जाए।

लैराई देवी जात्रा क्या है?

श्री लैराई जात्रा, जिसे शिरगांव जात्रा भी कहा जाता है, गोवा का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। यह चैत्र मास (मार्च-अप्रैल) में शिरगांव (बिचोलिम तालुका) में आयोजित होता है। यह उत्सव लैराई देवी को समर्पित है, जिन्हें गोवा के शिरोडा और शिरगांव क्षेत्रों में श्रद्धा से पूजा जाता है।

इस जात्रा की सबसे खास बात होती है अग्नि पर चलने की परंपरा, जिसे "धोंड" नामक श्रद्धालु निभाते हैं। ये लोग जलती हुई अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं – यह उनकी आस्था, तपस्या और मानसिक दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा जात्रा में देवी की शोभायात्रा, भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़े और प्रसाद वितरण जैसे कई धार्मिक आयोजन होते हैं।

गोवा की सांस्कृतिक विरासत पर चोट

यह हादसा न केवल श्रद्धालुओं के लिए बल्कि गोवा की समृद्ध धार्मिक परंपरा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। जहां एक ओर यह आयोजन आस्था का प्रतीक है, वहीं प्रशासन और आयोजकों के लिए यह एक चेतावनी भी है कि भविष्य में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा उपायों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है।

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