Baijnath Agarwal Death: गीता प्रेस के ट्रस्टी बैजनाथ अग्रवाल का निधन, सीएम योगी ने जताया दुख

गीता प्रेस (Geeta Press) गोरखपुर (Gorakhpur) के ट्रस्टी रहे बैजनाथ अग्रवाल (Baijnath Agarwal) का 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

Baijnath Agarwal Death: गीता प्रेस के ट्रस्टी बैजनाथ अग्रवाल का निधन, सीएम योगी ने जताया दुख

Baijnath Agarwal Death: गीता प्रेस (Geeta Press) गोरखपुर (Gorakhpur) के ट्रस्टी रहे बैजनाथ अग्रवाल (Baijnath Agarwal) का 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने साल 1950 में गीता प्रेस ट्रस्ट जॉइन किया था। शहर के सिविल लाइंस स्थित हरिओमनगर आवास पर शुक्रवार रात उन्होंने 90 साल की आयु में अंतिम सांस ली। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बतौर ट्रस्टी सम्मानित भी किया था।

सीएम योगी ने जताया दुख 

बैजनाथ अग्रवाल के निधन पर शनिवार (28 अक्टूबर) को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "गीता प्रेस, गोरखपुर के ट्रस्टी श्री बैजनाथ अग्रवाल जी का निधन अत्यंत दुःखद है। विगत 40 वर्षों से गीता प्रेस के ट्रस्टी के रूप में बैजनाथ जी का जीवन सामाजिक जागरूकता और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा है। उनके निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। प्रभु श्री राम दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों और संपूर्ण गीता प्रेस परिवार को यह अथाह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।"

गांधी शांति से किया जा चुका है सम्मानित 

संस्कृति मंत्रालय की तरफ साल 2021 में गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। जिस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था, ''गीता प्रेस विश्व का ऐसा इकलौता प्रिंटिंग प्रेस है, जो सिर्फ एक संस्था नहीं है बल्कि एक जीवंत आस्था है।

गीता प्रेस का कार्यालय करोड़ों लोगों के लिए किसी भी मंदिर से जरा भी कम नहीं है।" गांधी शांति पुरस्कार में 1 करोड़ रुपये की राशि के साथ एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। गांधी शांति पुरस्कार एक वार्षिक पुरस्कार है, जिसकी शुरूआत सरकार ने 1995 में महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के अवसर पर गांधी द्वारा प्रतिपादित आदर्शों को सम्मान देते हुए की थी।

साल 1923 में हुई थी गीता प्रेस की शुरुआत 

गीता प्रेस की शुरुआत सन 1923 में हुई थी। इसके संस्थापक महान गीता-मर्मज्ञ श्री जयदयाल गोयन्दका थे। यह दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है, जिसने 14 भाषाओं में 41।7 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित की हैं, जिनमें श्रीमद्‍भगवद्‍गीता की 16।21 करोड़ प्रतियां शामिल हैं।

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