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मध्यप्रदेश के इस तहसील में स्थित है द्वापरयुग के समय का गणेश मंदिर: हर साल तिल बराबर बढ़ता है अकार, लाखों श्रद्धालुओं की लगती है भीड़

MP Ganesh Chamatkari Mandir: मध्यप्रदेश के इस तहसील में स्थित द्वापरयुग के समय का गणेश मंदिर, हर साल टिल बराबर बढ़ता है अकार

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Manya Jain
मध्यप्रदेश के इस तहसील में स्थित है द्वापरयुग के समय का गणेश मंदिर: हर साल तिल बराबर बढ़ता है अकार, लाखों श्रद्धालुओं की लगती है भीड़

MP Ganesh Chamatkari Mandir: गणेश चतुर्थी 2024 का त्योहार 7 सितंबर, 2024 को मनाया जाएगा। यह त्योहार भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और शुभकामनाओं का देवता माना जाता है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर लोग भगवान गणेश की मूर्तियों की स्थापना करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, और दस दिनों तक उत्सव मनाते हैं. वैसे तो देश में कई गणेश जी के मंदिर हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गणेश मंदिर के बारे में बताएंगे.

जहां भगवान गणेश का अकार तिल के बराबर हर साल बढ़ता है. यह मंदिर विंध्याचल पर्वत पर स्थित है.

पुराणों में भी है इसका उल्लेख 

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बता दें मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की बरेली तहसील के अंतर्गत आने वाले उदयगिरी गांव से होकर यहां पहुंचा जाता है. बरेली से लगभग 12 से 14 किलोमीटर की दूरी पर उबड़-खाबड़ रास्ते से लगभग 3 किलोमीटर पर ये मंदिर है.

यहां के स्थानियों और बुजुर्गों का कहना है कि इस मंदिर में स्थापित गणेश भगवान की प्रतिमा मानव द्वारा स्थापित नहीं की गई है बल्कि इसकी स्थापना द्वापर युग में जामवंत द्वारा की गई थी.

जिसका पुराणों में उल्लेख किया गया है.

तिल बराबर बढ़ती है गणेश प्रतिमा 

यह मूर्ति बाकि मूर्तियों से अलग है क्योंकि ये हर साल थोड़ी-थोड़ी बढ़ती है. ग्रामीणों की मानें तो यह प्रतिमा जब देखि गई थी तो इसका आकर लगभग डेढ़ फिट था, लेकिन समय बढ़ते बढ़ते इसका आकर 3.5 फिट हो गया है.

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वहां के लोगों का कहना है कि यह प्रतिमा हर साल लगभग टिल बराबर बढ़ती है. जिससे आज इसका आकर बढ़ते ही जा रहा है.

दुर्गम रास्ते से पहुंचते हैं श्रद्धालु

याह गणेश मंदिर लगभाग 1200 फीट की ऊंचाई पर स्थिति है मंदिर में हर साल गणेश चतुर्थी के मौके पर श्रद्धालु बड़े से  उबड़-खाबड़ और दुर्गम मार्गो से होते हुए दर्शन करने आते हैं.

इस मंदिर में जाने के लिए आपको पहले उबड़-खाबड़ पहाड़ों की चढ़ाई करनी पड़ती है. जहां आपको कुछ पथरीली सीढ़ियां और बहुत सारा घनघोर जंगल मिलता है. यहां पर कोई सड़क नहीं है ना ही कोई बिजली है ना ही किसी भी तरह की पानी की व्यवस्था है.

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जंगली जानवरों से भरे जंगल के बीच में से होते हुए मंदिर तक पहुंचा जाता है.

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