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बता दें मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की बरेली तहसील के अंतर्गत आने वाले उदयगिरी गांव से होकर यहां पहुंचा जाता है. बरेली से लगभग 12 से 14 किलोमीटर की दूरी पर उबड़-खाबड़ रास्ते से लगभग 3 किलोमीटर पर ये मंदिर है.
यहां के स्थानियों और बुजुर्गों का कहना है कि इस मंदिर में स्थापित गणेश भगवान की प्रतिमा मानव द्वारा स्थापित नहीं की गई है बल्कि इसकी स्थापना द्वापर युग में जामवंत द्वारा की गई थी.
जिसका पुराणों में उल्लेख किया गया है.
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तिल बराबर बढ़ती है गणेश प्रतिमा
यह मूर्ति बाकि मूर्तियों से अलग है क्योंकि ये हर साल थोड़ी-थोड़ी बढ़ती है. ग्रामीणों की मानें तो यह प्रतिमा जब देखि गई थी तो इसका आकर लगभग डेढ़ फिट था, लेकिन समय बढ़ते बढ़ते इसका आकर 3.5 फिट हो गया है.
वहां के लोगों का कहना है कि यह प्रतिमा हर साल लगभग टिल बराबर बढ़ती है. जिससे आज इसका आकर बढ़ते ही जा रहा है.
दुर्गम रास्ते से पहुंचते हैं श्रद्धालु
याह गणेश मंदिर लगभाग 1200 फीट की ऊंचाई पर स्थिति है मंदिर में हर साल गणेश चतुर्थी के मौके पर श्रद्धालु बड़े से उबड़-खाबड़ और दुर्गम मार्गो से होते हुए दर्शन करने आते हैं.
इस मंदिर में जाने के लिए आपको पहले उबड़-खाबड़ पहाड़ों की चढ़ाई करनी पड़ती है. जहां आपको कुछ पथरीली सीढ़ियां और बहुत सारा घनघोर जंगल मिलता है. यहां पर कोई सड़क नहीं है ना ही कोई बिजली है ना ही किसी भी तरह की पानी की व्यवस्था है.
जंगली जानवरों से भरे जंगल के बीच में से होते हुए मंदिर तक पहुंचा जाता है.
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