भारत के इस राज्य में हुआ था भगवान गणेश का अवतरण: आज भी माता पार्वती के साथ विराजित हैं बप्पा, जानें क्या है रहस्य

Ganesh Ji Janmsthali: भारत के इस राज्य में हुआ था भगवान गणेश का अवतरण: आज भी माता पार्वती के साथ विराजित हैं बाप्पा, जानें क्या है रहस्य

भारत के इस राज्य में हुआ था भगवान गणेश का अवतरण: आज भी माता पार्वती के साथ विराजित हैं बप्पा, जानें क्या है रहस्य

Ganesh Ji Janmsthali

Ganesh Ji Janmsthali: हिन्दू धर्म में भगवान् गणेश जी बहुत ज्यादा महत्व है. जैसा आप जानतें हैं कि अभी गणेश उत्सव चल रहा है. देश भर में हिन्दुधर्म के लोगों के घर में 10 दिन में गणेश जी स्थापित हैं.

ये मन जाता है कि गणेश चतुर्थी के दिन ही सुख समृद्धि के देवता भगवान् गणेश का अवतरण हुआ था. इसके साथ ही गणेश उत्सव के दौरान पूजा में गणेश जी मनपसंद भोग लगाने से मनोकामना पूरी होती है.

लेकिन क्या आप जानतें हैं भारत में वो जगह अभी भी है जहाँ भगवान् गणेश का जन्म हुआ था. जैसा हम जानतें हैं कि गणेश जी का अवतरण माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से किया था।

उन्होंने एक बालक की आकृति बनाकर उसमें प्राण फूंके, जिससे गणेश जी का जन्म हुआ। भगवान शिव ने अज्ञानवश उनका सिर काट दिया, लेकिन बाद में एक हाथी का सिर लगाकर उन्हें जीवनदान दिया।

कहां हुआ भगवान का जन्म 

बताया जाता है कि भारत के उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में बसी डोडीताल झील के पास बाप्पा का जन्म हुआ था. बता दें यह सतह समुद्र ताल से लगभग 3,310 मीटर की उंचाई पर स्थित है.

इसके करीब ही एक मंदिर को भगवान गणेश की जन्मस्थली माना जाता है. बताया जाता है भगवान गणेश के साथ माता पार्वती भी विराजमान है. जो भगवान गणेश के जन्मस्थली का संकेत देते हैं.

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यहां माता पार्वती की अन्नपूर्णा के रूप में पूजा की जाती है. यहाँ पर भक्त मां अन्नपूर्णा और भगवान गणेश के दर्शन के लिए आते हैं. उनका विश्वास है कि भगवान गणपति डोडीताल के अन्नपूर्णा मंदिर मे अपनी माता के साथ आज भी निवास करते हैं.

डोडीताल झील का अनसुलझा रहस्य

डोडीताल झील, जो उत्तरकाशी जिले में स्थित है, एक षट्कोणीय पर्वतीय झील है जो लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर तक फैली हुई है। इसकी गहराई का अब तक कोई सही अनुमान नहीं लगाया जा सका है। वैज्ञानिकों ने कई बार इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।

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डोडीताल झील की गहराई आज भी एक अनसुलझा रहस्य बनी हुई है। यह ताजे मीठे पानी की झील 3,657 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, और यहां से अस्सी गंगा नदी की उत्पत्ति होती है, जो आगे चलकर गंगोरी में भागीरथी नदी से मिलती है।

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