देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड की पूरी कहानी, जानिए कैसे इस घटना को दिया गया था अंजाम

Devendra Chaurasia

भोपाल। हटा के बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड एक बार फिर से सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद, मध्य प्रदेश पुलिस ने पथरिया विधायक के पति और मुख्य आरोपी गोविंद सिंह परिहार की तलाश शुरू कर दी है। कोर्ट ने गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को 14 दिनों का वक्त दिया है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड है क्या और इसे कैसे अंजाम दिया गया था।

क्रेशर प्लांट पर की गई थी हत्या

15 मार्च 2019, कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया अपने भाई महेश प्रसाद, अशोक और बेटे स्वमेश के साथ सुबह करीब 10.45 मिनट पर गिट्टी क्रेशर प्लांट के दफ्तर पहुंचे थे। वे दफ्तर खोल ही रहे थे कि तभी तीन गाड़ियों और मोटरसाइकलों से कई लोग वहां पहुंचते हैं और उनपर लाठी, रॉड से हमला बोल देते हैं। हमले में कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया और उनके बेटे स्वमेश गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। दोनों को दमोह अस्पताल में भर्ती करवाया जाता है, जहां देवेंद्र चौरसिया की हालत और गंभीर हो जाती है। इसके बाद उन्हें जबलपुर ले जाया जाता है जहां उन्होंने मृत घोषित कर दिया जाता है।

गोविंद सिंह समेत 28 लोग हैं इस मामले में आरोपी

एफआईआर में विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह समेत कुल 28 लोगों को आरोपी बनाया जाता है। पुलिस शुरूआत में हत्या के प्रयास यानी धारा 307 समेत कुल 8 धाराओं में मुकदमा दर्ज करती है। लेकिन तभी देवेंद्र चौरसिया जबलपुर में दम तोड़ देते हैं। इसके बाद पुलिस इस मामले में आरोपियों के खिलाफ 302 के तहत भी मुकदमा दर्ज करती है।

हत्या के वक्त प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी

प्रदेश में उस वक्त कांग्रेस की सरकार थी और देवेंद्र चौरसिया हाल ही में बसपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए थे। इस कारण से पुलिस तेजी से कार्रवाई करने में जुट जाती है। लेकिन तब तक नामजद सभी आरोपी फरार हो जाते हैं। हालांकि इस दौरान पुलिस कुछ लोगों को गिरफ्तार भी करती है जिसमें पथरिया विधायक रामबाई के कुछ रिश्तेदार और जिला पंचायत अध्यक्ष के बेटे इंद्रपाल को गिरफ्तार किया जाता है।

इस वजह से की गई थी हत्या

FIR में दर्ज बयान के अनुसार, उनके बेटे ने पुलिस को बताया कि देवेंद्र चौरसिया दमोह के बहुजन समाज पार्टी के पुराने नेता रहे थे। वे दमोह से कई बार चुनाव भी लड़े थे। उनके भाई की पत्नी जिला पंचायत सदस्य भी हैं। यानी दमोह के राजनीतिक गलियारों में उनकी अच्छी पकड़ थी। इस दौरान 30 जनवरी 2019 को दमोह के जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल के खिलाफ एक अविश्वास प्रस्ताव आता है। इस प्रस्ताव को 9 जिला पंचायत सदस्य लेकर आते हैं। इन 9 सदस्यों में एक सदस्य देवेंद्र चौरसिया के भाई की पत्नी भी होती है। बेटे के अनुसार इस प्रस्ताव की अगुवाई भी देवेंद्र चौरसिया ही कर रहे थे। लेकिन ये बात जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल और पूर्व उपाध्यक्ष रही पथरिया विधायक रामबाई को पसंद नहीं आई।

Devendra Chaurasia murder case

खुद की सुरक्षा के लिए ज्वाइन किया था कांग्रेस

स्वमेश ने आरोप लगाया कि उनके पिता देवेंद्र से इस मामले को लेकर राबाई के पति गोविंद सिहं और शिवचरण पटेल के बेट इंद्रपाल ने अविश्वास प्रस्ताव से पीछे हटने को कहा और ऐसा नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दी। खैर, उस वक्त किसी प्रकार से विवाद थम गमा और शिवचरण राम भी अध्यक्ष बने रहे। हालांकि देवेंद्र चौरसिया पर खतरा कम नहीं हुआ। इसी को देखते हुए उन्होंने 12 मार्च को अपनी सुरक्षा के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में कांग्रेस ज्वाइन कर ली। लेकिन तीन दिन बाद ही उनकी हत्या कर दी गई। हत्यारों ने जब उनपर हमला किया तो वो बोल रहे थे कि तुमने बसपा छोड़ कांग्रेस क्यों जॉइन कर लिया।

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