Fever Reasion : मेडिकल की नजर से ये भी हैं बुखार आने के कारण

Fever Reasion : मेडिकल की नजर से ये भी हैं बुखार आने के कारण

नई दिल्ली। कोरोना काल में बुखार का नाम सुनते ही Fever Reasion लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन जरूरी नहीं कि ये बुखार बैक्टीरिया और वायरस के कारण ही आए। इसके अलावा भी कई कारण होते हैं जिनसे हमें फीवर आ सकता है। मेडिकल के नजरिए से जानते हैं क्या हैं इसके अन्य कारण।

कैसे बनती है बुखार की स्थिति
किसी भी चीज से बाहरी अटेक के कारण हमारा शरीर जब उसके अपोजिट प्रतिक्रिया दिखाता है तो हमारे बुखार का अहसास होता है। जानकारी की माने तो सामान्य रूप से बुखार के हजार से ज्यादा कारण हो सकते हैं। परन्तु चिकित्सक नजरिए से बात करेंतो इसके मुख्य रूप् से 3 कारण बताए गए हैं।

1 — पैथोजन
यह कारण बैक्टीरिया, वायरस, फंगस इंफेक्शन और परजीवी के जरिए होता है। साधारण तौर पर यही कारण होता है। जिसमें मौसम में परिवर्तन या किसी रोगाणु के कारण यदि मरीजों की संख्या में इजाफा होता है तो आसपास में भी यह बढ़ता है।

2 — फिजिकल रीजन :
फिजिकल कारणों में उन कारणों को गिना जाता है। जो किसी चोट—चपेट लगने, खरोंच, इंफेक्शन, लंबे समय से चल रही बीमारी आदि के कारण होता है।

3 — केमिकल
किसी रासायनिक चीज या उत्पाद के शरीर पर बाहरी साइड से लगने या शरीर के अंदर जाने से दुष्प्रभाव पड़ने लगता है। इसके अतिरिक्त किसी दवा का प्रतिकूल प्रभाव को भी इसी में शामिल किया गया है।

ये हैं सामान्य तापमान
हमारे शरीर का सामान्य तापमान 98.3 या 99 फारेनहाइट होता है। कुछ लोग 99 100 पर आते ही डरने लग जाते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। 100 ​तक होने पर भी डरने की बजाए अपने डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामॉल ली जा सकती है। हर 15 मिनट में ठंडे पानी की पट्टी रखना चाहिए। ताकि बुखार सिर पर न चढ़े। जहां तक हो विटामिन-सी से युक्त फल और सब्जियां खानी चाहिए।

बुखार का कोई मौसम नहीं
आपको बुखार किसी भी मौसम में आ सकता है। इसकी पहचान शरीर में थकान, तेज और गर्म सांस से होती है। चेहरे पर हल्के हल्के दाने भी इसकी पहचान है। सावधानी रखी जाए तो इससे आसानी से छुटकारा भी पाया जा सकता है। हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण शरीर आसानी से खाँसी, जुकाम, और बुखार आदि से ग्रसित हो जाता है। मौसम का बदलाव वायरल फीवर का कारण बन जाता है।

इस स्थिति में कराएं ब्लड टैस्ट
दो दिन से ज्यादा दिन तक बुखार आने की स्थिति में ब्लड टैस्ट कराएं। यदि आसपास डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया से पीड़ित व्यक्ति है तो फिर यह टैस्ट बहुत जरूरी हो जाता है। इसके माध्यम से प्लेटलेट काउंट जरूर करवाना चाहिए। पेट का इंफेक्शन, गलत डायजेशन, यूटीआई, कैंसर आदि से भी बुखार बढ़ सकता है।

(नोट — इस लेख में दिए गए तत्व सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। बंसल न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता। इस पर अमल करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य ले लें।)

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